खसखस (khus khus)

      खस या खसखस एक सुगंधित पौधा है। पौधे की जड़ों का उपयोग विशेष प्रकार का पर्दा बनाने में होता है |इसको ग्रीष्म ऋतु में कमरे तथा खिड़कियों पर लगाते हैं और पानी से तर रखते हैं जिससे कमरे में ठंडी तथा सुगंधित वायु आती है और कमरा ठंडा बना रहता है। यह सघन गुच्छेदार घास राजस्थान एवं भारत के अन्य राज्यों में स्वजात उगती पाई जाती है। इसकी जड़ों से प्राप्त तेल इत्र उद्योग में प्रसाधन सामग्री बनाने व साबुन का सुगंध प्रदान करने में प्रयुक्त होता है। खस तेल का आमवात, कटिवेदना व मोच में  मालिश करने पर आराम मिलता है।

खसखस का इस्तेमाल


  1. अत्यधिक प्यास लगने की परेशानी में 2-4 ग्राम खसखस की जड़ को मुनक्का के साथ पीसकर पिलाएं। इससे अधिक प्यास लगने की परेशानी खत्म होती है।
  2.  खसखस की जड़ का बारीक चूर्ण बना लें। इसे शरीर पर लेप करें। इससे अधिक पसीना आने की समस्या का समाधान होता है।
  3. उल्टी पर रोक लगाने के लिए बराबर-बराबर की मात्रा में मूंग, पिप्पली, खस तथा धनिया का 5-10 ग्राम चूर्ण बना लें। इसे 6 गुना पानी में रात भर के लिए भिगो दें। सुबह छानकर पीने से पित्तज विकार के कारण होने वाली उल्टी ठीक हो जाती है।
  4. 3-6 ग्राम खस के चूर्ण में मधु मिलाकर चावल के धोवन के साथ पिएं। इससे पित्तज विकार की वजह से होने वाली उल्टी और अत्यधिक प्यास लगने की परेशानी ठीक होती है।
  5. चीनी का शर्बत बना लें। इसमें 1-2 बूंद पुदीना का अर्क मिलाएं। इसमें 1-2 बूंद खसखस की जड़ का अर्क डालकर पीने से उल्टी बंद हो जाती है।
  6.  10-40 मिली मात्रा में खसखस का सेवन करें। इससे सूजन की समस्या ठीक हो जाती है, पेट के कीड़े खत्म होते हैं, बवासीर, डायिबटीज, बुखार तथा कुष्ठ रोग में लाभ मिलेगा, इससे खून की कमी दूर होती है।
  7. खस, नागरमोथा तथा धनिया को पानी में पीस लें। इसका लेप करें। इससे त्वचा के विकार ठीक होते हैं।
  8. खस की जड़, ईख की जड़, कुश की जड़ तथा रक्तचंदन को मिलाकर काढ़ा बना लें। इसे 10-30 मिली की मात्रा में पीने से मूत्र रोग जैसे- पेशाब का रुक-रुक कर आना और पेशाब करने में दर्द आदि समस्या ठीक हो जाती है।
  9.  2-4 ग्राम खस की जड़ के चूर्ण में 5 ग्राम मिश्री मिला लें। इसका सेवन करें। इससे कम पेशाब आने की समस्या ठीक हो जाती है। यह मूत्र के अन्य विकारों में भी लाभ देता है।
  10. चेचक को ठीक करने के लिए खसखस का बारीक चूर्ण बना लें। इससे शरीर पर लेप करने से चेचक की बीमारी में आराम मिलता है।
  11. बुखार में लाभ पाने के लिए नागरमोथा, पित्तपापड़ा, उशीर, लालचन्दन, सुगन्धबाला तथा सोंठ की बराबर-बराबर मात्रा लें। इसका काढ़ा बना लें। इसे ठंडा करके 20-40 मिली मात्रा में सेवन करेंं। इससे बुखार और बुखार में लगने वाली प्यास की समस्या ठीक हो जाती है।
  12. इसी तरह खसखस, शालपर्णी, बृहती, कंटकारी, पृश्नपर्णी, सोंठ, चिरायता, मोथा, गुडूची लें। इसमें गोक्षुर मिलाकर काढ़ा बना लें। इसे 10-40 मिली पीने से वात विकार के कारण होने वाले बुखार में लाभ होता है।
  13. खसखस के पंचांग का काढ़ा बनाकर भांप देने से भी बुखार उतर जाता है।
  14. केवल खस और लाल चंदन के चूर्ण को चीनीयुक्त चावल के धोवन के साथ पिएं। इससे रक्तपित्त, तमक श्वास, अधिक प्यास लगने की परेशानी और जलन की समस्या में आराम होता है।
  15. इसी तरह 10-40 मिली खसखस की जड़ का सेवन से भी रक्तपित्त में लाभ होता है।
  16. मांसपेशियों में ऐंठन होतो 2-4 ग्राम खस की जड़ के चूर्ण में 1 ग्राम सोंठ का चूर्ण मिला लें। इसमें शहद मिलाकर खाएं। इससे हाथों या पैरों की ऐंठन और कंपकंपी की परेशानी ठीक  हो जाती है।
  17. शरीर की जलन से परेशानी रहते हैं तो खसखस की जड़ को पीसकर पूरे शरीर पर लगाएं। इससे शरीर की जलन शांत हो जाती है।
  18. इसी तरह लालचन्दन, चन्दन, खस तथा पद्माक का काढ़ा बना लें। इसे ठंडे पानी में मिलाएं। इस पानी से नहाने पर शरीर की जलन ठीक हो जाती है।
  19. सीने में दर्द की परेशानी में 2-4 ग्राम खस की जड़ का चूर्ण बना लें। इसमें 500 मिग्रा पिप्पली की जड़ का चूर्ण मिला लें। इसमें घी मिलाकर खाएं। इससे छाती का दर्द ठीक हो जाता है।
  20. पित्तज रोग को ठीक करने के लिए 2-4 ग्राम खस की जड़ के चूर्ण का सेवन करें। 
  21. इसी तरह 5-10 मिली खस की जड़ के रस में चीनी के चूर्ण को मिलाकर पीने से पित्तोन्माद में लाभ होता है।

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