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Showing posts from July, 2020

दालचीनी (Cinnamomum)

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     दालचीनी    एक छोटा सदाबहार पेड़ है, जो कि 10–15 मी (32.8–49.2 फीट) ऊंचा होता है, यह  श्रीलंका  एवं दक्षिण  भारत  में बहुतायत में मिलता है। इसकी  छाल   मसाले की तरह प्रयोग होती है। इसमें एक अलग ही सुगन्ध होती है, जो कि इसे गरम मसालों की श्रेणी में रखती है।  पत्तियों के तेल से मच्छर भगाया जाता है।   दालचीनी का उपयोग  दालचीनी के 10-20 मिली काढ़ा को पिएं। इससे  हमेशा हिचकी आने की शिकायत   से आराम मिलता है। 500 मिग्रा शुंठी चूर्ण, 500 मिग्रा  इलायची , तथा 500 मिग्रा दालचीनी को पीस लें। भोजन के पहले सुबह-शाम लेने से भूख बढ़ती है। दालचीनी, और लौंग का काढ़ा बना लें। 10-20 मिली मात्रा में पिलाने से उल्टी पर रोक लगती है। दालचीनी का तेल आंखों के ऊपर (पलक पर) लगाएं। इससे आंखों का फड़कना बन्द हो जाता है, और आंखों की रोशनी भी बढ़ती है। दालचीनी के तेल को रूई से दांतों में लगाएं। इससे आराम मिलेगा।  दालचीनी के 5-6 पत्तों को पीसकर मंजन करें। इससे दांत साफ, और चमकीले हो जाते हैं।  दालचीनी के 8...

अलसी (flax seeds)

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     अलसी  या  तीसी  रेशेदार फसलों में इसका महत्वपूर्ण स्थान है। इसके रेशे से मोटे कपड़े, डोरी, रस्सी और टाट बनाए जाते हैं। इसके  बीज  से  तेल  निकाला जाता है  जिसमें यह गुण होता है कि वायु के संपर्क में रहने के कुछ समय में यह ठोस अवस्था में परिवर्तित हो जाता है। विशेषकर जब इसे विशेष रासायनिक पदार्थो के साथ उबला दिया जाता है। तब यह क्रिया बहुत शीघ्र पूरी होती है। इसी कारण अलसी का तेल रंग, वारनिश और छापने की  स्याही  बनाने के काम आता है। इस पौधे के एँठलों से एक प्रकार का रेशा प्राप्त होता है जिसको निरंगकर  लिनेन  (एक प्रकार का कपड़ा) बनाया जाता है। तेल निकालने के बाद बची हुई सीठी को  खली  कहते हैं जो गाय तथा भैंस को बड़ी प्रिय होती है। इससे बहुधा पुल्टिस बनाई जाती है। आयुर्वेद   में अलसी को मंदगंधयुक्त, मधुर, बलकारक, किंचित कफवात-कारक, पित्तनाशक, स्निग्ध, पचने में भारी, गरम, पौष्टिक, कामोद्दीपक, पीठ के दर्द ओर सूजन को मिटानेवाली कहा गया है। अलसी के उपयोग    गरम   पानी   ...

मेथी (Fenugreek Seeds)

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      मेथी  एक  वनस्पति  है जिसका पौधा १ फुट से छोटा होता है। इसकी पत्तियाँ  साग  बनाने के काम आतीं हैं तथा इसके दाने  मसाले  के रूप में प्रयुक्त होते हैं। स्वास्थ्य की दृष्टि से यह बहुत गुणकारी है।  मेथी के दानों  से साबुन और सौंदर्य प्रसाधनों की चीजें बनाई जाती हैं।   गाँवों में प्रसूता स्त्री को मेथी के लड्डू विशेष रूप से दिये जाते हैं। मेथी और मेथी के तेल में डायबिटीज को नियंत्रित करने और गाँठ को बनने से रोकने के गुण होते हैं।   मेथी का उपयोग  1-2 चम्मच मेथी के दानों को रात भर के लिए भिगो दें। इसे सुबह पीसकर बालों की जड़ों में लगाएं। एक घण्टे बाद बालों को धो लें। सप्ताह में दो से तीन बार लगाने से बालों का गिरना  बंद हो जाता है। मेथी के बीजों  को दूध में पीस लें। इसे छानकर तैयार कर लें। इस रस को गुनगुना या हल्का गर्म करके 1-2 बूँद कान में डालें। इससे कान का बहना बंद हो जाता है। हृदय को स्वस्थ रखने के लिए मेथी के 10-15 मिली काढ़े में शहद मिलाकर पिएं। मेथी के दाने खराब कोलेस्ट्रॉल को भ...

चाय (tea leaf)

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     चाय सिर्फ ऊर्जा प्रदान करने का ही काम नहीं करती है। इसके औषधिकारक गुण अनगिनत है जिसके कारण आयुर्वेद में चाय को कई बीमारियों के इलाज के रुप में प्रयोग किया जाता है। चाय के  उपयोग   अक्सर काम के तनाव के कारण सिर में दर्द होने लगता है। चाय सिरदर्द से आराम दिलाने में बहुत फायदेमंद होता है।  चाय के पत्तों का काढ़ा बनाकर 5-15 मिली मात्रा में पीने से सिरदर्द से आराम मिलता है। ठंड के मौसम के जाने और गर्मी के मौसम के आने के समय लोगों को आँख आने की बीमारी होती है। आँख लाल होकर दर्द होने लगता है। आँख आने पर चाय का इस्तेमाल  इस तरह से करने पर बहुत फायदा मिलता है।  चाय का काढ़ा बनाकर उसके 1-2 बूंदों को नेत्रों में डालने से 2-3 दिन में आँख आने पर जो परेशानी होती है उससे राहत मिलती है। आमाशय के कारण या गर्म खाद्द पदार्थों के ज्यादा सेवन से भी गले में घाव जैसा हो जाता है जिसके कारण दर्द होने लगता है। चाय के काढ़े से दिन में 2-3 बार गरारा करने से गले में जो घाव या सूजन होता है उससे राहत मिलती है।      बनफ्सा, मुलेठी तथा चाय का ...

राई (Mustard)

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     राई  के बीज से  तेल  निकाला जाता है जिसका उपयोग विभिन्न प्रकार के भोज्य पदार्थ बनाने और शरीर में लगाने में किया जाता है। इसका तेल  अंचार ,  साबुन  तथा ग्लिसराल बनाने के काम आता है।  इसके बीजों का उपयोग  मसाले  के रूप में भी होता है। यह  आयुर्वेद  की दृष्टि से भी बहुत महत्त्वपूर्ण है। इसका तेल सभी चर्म रोगों से रक्षा करता है।   इसके हरे पत्ते से सब्जी भी बनाई जाती है। राई का लाभदायक    प्रयोग   राई का काढ़ा बनाकर उससे सिर धोने से बाल गिरने बन्द हो जाते हैं तथा सिर के जूं, फुंसी तथा खुजली आदि रोग दूर हो जाते हैं। कक्षा (बगल या काँख) में होने वाली गांठ को पकाने के लिए, गुड़, गुग्गुल और राई को बारीक पीसकर, जल में मिला लें। इसे कपड़े की पट्टी पर लेप कर चिपका दें। गांठ पककर फूट जाती है।  राई को पीसकर मस्तक पर लगाने से सिर दर्द में लाभ होता है।  500-750 मिग्रा राई तथा 1 ग्राम शक्कर को मिलाकर जल के साथ सेवन करें। इससे जुकाम दूर हो जाता है। राई के आटे को सरसों के तेल या एरंड ...

काली मिर्च (Black Pepper)

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     काली मिर्च  एक औषधीय मसाला है। इसे  मरिच  भी कहते हैं। यह दिखने में थोड़ी छोटी, गोल और काले रंग की होती है। इसका स्वाद काफी तीखा होता है।   सफेद मरिच काली मरिच का ही एक अलग रूप है। आधे पके फलों की काली मरिच बनती है तथा पूरे पके फलों को पानी में भिगोकर, हाथ से मसल कर ऊपर का छिल्का उतार देने से वह सफेद मरिच बन जाती है। छिल्का हट जाने से इसकी गरम तासीर कुछ कम हो जाती है तथा गुणों में कुछ सौम्यता आ जाती है।      काली मिर्च  का उपयोग   एक काली मरिच  को सुई की नोंक पर लगाकर उसे दीपक में जला लें। उसमें से निकलने वाले धुएं को सूंघने से सिरदर्द में आराम होता है। इससे हिचकी भी बंद होती है। सिर दर्द में काली मिर्च के फायदे बहुत लाभकारी साबित होते हैं। भृंगराज के रस अथवा चावलों के पानी के साथ काली मरिच को पीसकर माथे पर लेप करने से आधासीसी का दर्द यानी माइग्रेन भी ठीक होता है। बालों में जूँ हो जाने पर 10-12 सीताफल के बीज और 5-6 काली मिर्चों को पीस कर सरसों के तेल में मिला लें। इसे रात में सोने से पहले बालों की जड़ो...

धनिया (Coriander)

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     धनिया   भारतीय रसोई में प्रयोग की जाने वाली एक सुंगंधित हरी पत्ती है। धनिया  एक आहार है, इसलिए इसकी खेती देश भर में की जाती है।   सामान्यतः इसके पत्तो का उपयोग सब्ज़ी की सजावट और ताज़े मसाले के रूप में किया जाता है। इसके बीज को सुखाकर सूखे मसाले की तरह प्रयोग किया जाता है।   धनिया के कच्चे पत्तों में विटामिन A, C और K के गुण मौजूद है और इसके बीज में - फाइबर, कैल्शियम, कॉपर, आयरन |  धनियाबीज संपूर्ण पाचन तन्त्र को मज़बूत करता है। धनिया बीज को रोज़ दो - तीन बार सौंफ़ की तरह चबाकर खाएं। धनिया  का उपयोग   अधिक प्यास लगती है, तो धनिया के पानी में मधु, और मिश्री मिलाकर पीने से  पित्त के कारण लगने वाली प्यास  मिटती है। 175 ग्राम धनिया के पेस्ट को, 1 लीटर पानी में मिला लें। इसे रात भर छोड़ कर सुबह छान लें। इसमें 100 ग्राम मिश्री, तथा 100 ग्राम मधु मिला लें। इसे 10-15 मिली की मात्रा में पीने से लाभ होता है। हरा धनिया के फायदे अधिक प्यास में  बहुत काम आता है। 10-20 मिली धनिए के काढ़ा में चीनी मिलाकर पीने से प्यास...

पुदीना (Mint)

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      पुदी ना  एक  बारहमासी , खुशबूदार जड़ी है।   आयुर्वेद के अनुसार, पुदीना कफ और वात दोष को कम करता है, भूख बढ़ाता है।   पुदीना के अंदर कई  पोषक तत्व  पाए जाते हैं जैसे कि ऊर्जा, कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, नियासिन, विटामिन ए, विटामिन सी, सोडियम, पोटेशियम, आयरन, मैग्नीशियम और कैल्शियम आदि |  पुदीना     का उपयोग बड़ी मात्रा में दवाईयों, सौंदर्य प्रसाधनों, कालफेक्शनरी, पेय पदार्थो, सिगरेट, पान मसाला आदि में खुशबू हेतु किया जाता है। पुदीने के  उपयोग   पुदीना अपने वातशामक गुण के कारण बालों के रूखेपन को कम करने में सहयोग देता है । ऐसा होने से बालों की रूसी एवं उनका बेजान होकर झड़ना या टूटना कम होता है, जिससे बाल प्राकृतिक रूप से बढ़ने लगते हैं। कभी-कभी ठंड लगने पर या कान में पानी चले जाने पर कान में दर्द होने लगता है। ऐसे में पुदीना के पत्ते का रस निकालना है, और इसे 1-2 बूंद कान में डालना है।  पाचन शक्ति ख़राब होने के कारण सर में दर्द होता है । पुदीने की चाय ऐसे में बहुत फायदेमंद सिद्ध हो सकती है, क्योंकि य...