राई (Mustard)

     राई  के बीज से तेल निकाला जाता है जिसका उपयोग विभिन्न प्रकार के भोज्य पदार्थ बनाने और शरीर में लगाने में किया जाता है। इसका तेल अंचारसाबुन तथा ग्लिसराल बनाने के काम आता है। इसके बीजों का उपयोग मसाले के रूप में भी होता है। यह आयुर्वेद की दृष्टि से भी बहुत महत्त्वपूर्ण है। इसका तेल सभी चर्म रोगों से रक्षा करता है। इसके हरे पत्ते से सब्जी भी बनाई जाती है।



राई का लाभदायक  प्रयोग 

  1. राई का काढ़ा बनाकर उससे सिर धोने से बाल गिरने बन्द हो जाते हैं तथा सिर के जूं, फुंसी तथा खुजली आदि रोग दूर हो जाते हैं।
  2. कक्षा (बगल या काँख) में होने वाली गांठ को पकाने के लिए, गुड़, गुग्गुल और राई को बारीक पीसकर, जल में मिला लें। इसे कपड़े की पट्टी पर लेप कर चिपका दें। गांठ पककर फूट जाती है।
  3.  राई को पीसकर मस्तक पर लगाने से सिर दर्द में लाभ होता है।
  4.  500-750 मिग्रा राई तथा 1 ग्राम शक्कर को मिलाकर जल के साथ सेवन करें। इससे जुकाम दूर हो जाता है।
  5. राई के आटे को सरसों के तेल या एरंड तेल में मिलाकर कान के जड़ पर लेप करें। इससे कान के जड़ के आस-पास होने वाली सूजन में लाभ होता है।
  6. 100 मिली सरसों तेल या तिल तेल को अच्छी प्रकार से उबालें। उबाल आने पर आंच बन्द कर दें। कुछ ठंडा होने पर 10 ग्राम राई के दाने, 10 ग्राम लहसुन और डेढ़ ग्राम कपूर डालकर ढक कर रख दें। ठंडा होने पर छानकर, बोतल में भरकर रख लें। इसे कान में 4-5 बूंदे डालते रहने से कान का बहना रुक जाता है और कान के घाव ठीक होते हैं।
  7. राई को पीसकर गुनगुने जल में मिलाकर कुल्ला करने से दांत का दर्द का ठीक होता है।
  8. राई के तेल में सेंधा नमक मिलाकर दांतों पर मलने से मसूड़ों से सम्बन्धित विकारों में लाभ होता है।
  9. 500 मिग्रा राई, बनाएं 250 मिग्रा और मिश्री मिलाकर सुबह-शाम लें। इससे कफ पतला होकर सरलता से बाहर निकलने लगता है।
  10. 500 मिग्रा राई चूर्ण में घी तथा मधु मिलाकर, सुबह-शाम सेवन करें। इससे सांसों के रोग में लाभ होता है।
  11. राई की पत्तियों में कोलेस्ट्रॉल कम करने का गुण पाया जाता है। ये पत्तियां कोलेस्ट्रॉल को कम करके दिल की बीमारियों से बचाव करती हैं।
  12. हृदय में कम्पन या दर्द हो, व्याकुलता और बैचेनी हो, कमजोरी महसूस होती हो तो हाथ-पैरों पर राई के चूर्ण की मालिश करने से लाभ होता है।
  13. हैजा में जब रोगी को बहुत उलटी दस्त होते हों तो राई को पीसकर पेट पर लेप करने से उलटी-दस्त बन्द हो जाते हैं।
  14. किसी भी प्रकार की उलटी-दस्त में पेट पर राई का लेप करने से लाभ होता है।
  15. हैजे की शुरुआती अवस्था में 1 ग्राम राई को शक्कर के साथ सेवन कराने से लाभ होता है।

  16.  राई तथा कर्पूर को पीसकर थोड़ा गर्म कर पेट पर लेप करने से उल्टी में लाभ होता है।
  17. 1-2 ग्राम राई चूर्ण में, शक्कर मिलाकर सेवन करें। साथ में आधा कप पानी पीने से हाजमा दुरूस्त होने के साथ ही पेट का दर्द भी ठीक होता है।
  18. 2 ग्राम राई में शक्कर मिलाकर सेवन करें और ऊपर से 750 मिग्रा से 1 ग्राम चूने को आधा कप जल में मिलाकर पिलाने से पैट की गैस में लाभ होता है।
  19. बनाए और राई के दाने को बराबर मात्रा में लेकर चूर्ण बना लें। 500 मिग्रा-1 ग्राम चूर्ण को गोमूत्र के साथ पीने से लिवर, तिल्ली विकार में लाभ होता है।
  20. मासिकधर्म की रुकावट हो या मासिक धर्म के समय कष्ट होता हो या मासिक धर्म स्राव कम होता हो तो गुनगुने जल में राई का चूर्ण मिला लें। रोगी स्त्री को इस जल में बैठाने (कमर में डूबे) से लाभ होता है।
  21. गर्भाशय के दर्द या बहुत अधिक दर्द की स्थिति में राई के फायदे ले सकते हैं। नाभि के नीचे या कमर पर राई का लेप लगाने से दर्द ठीक होता है।
  22. गठिया या सूजाक के कारण या अन्य किसी कारण से जोड़ों पर सूजन और पीड़ा हो तो राई के लेप में कपूर मिलाकर शून्य हुए अंग पर मालिश करने से बहुत लाभ होता है।
  23. राई और शक्कर को पीसकर, कपड़े की पट्टी पर लेप करें और दर्द वाले स्थान पर बांधने से दर्द ठीक होता है।
  24. यदि दर्द हल्का-हल्का कई दिनों तक बना रहे तो राई के दाने और सहिजन की छाल को मट्ठे में पीसकर पतला-पतला लेप करें। इससे आराम मिलता है।
  25. राई के तेल में पकौड़े या पूरी तलकर खाएं। राई के तेल की मालिश कर, गुनगुने जल से स्नान करें। इससे वात विकार जैसे गठिया ठीक होता है। ध्यान रहे कि मस्तिष्क, आंख आदि कोमल भागों पर राई के तेल की मालिश ना करें।
  26. दर्द वाले स्थान पर राई का लेप लगाने से लाभ होता है।
  27.  त्वचा के भीतर कांटा घुस जाय तो राई के आटे में घी और शहद मिलाकर लेप करने से कांटा ऊपर आ जाता है।
  28. राई के आटे को 8 गुने पुराने गाय के घी में मिलाकर लेप करने से कुष्ठादि रोग ठीक होते हैं। खुजली, एक्जिमा, दाद आदि पर इस मलहम को लगाने से राई का लाभ औषधी के रूप में मिलता है।
  29. शरीर की जलन में राई के फायदे मिलते हैं। शरीर में कहीं जलन हो रही हो और सूजन भी हो तो ऐसे रोग में राई का लेप लाभदायक होता है।
  30. फेफड़ों की सूजन, लिवर की सूजन तथा श्वास नलिका में सूजन हो तो राई का लेप बहुत फायदेमन्द होता है।
  31. हाथ-पैर मुड़ जाने से दर्द या सूजन आ जाय तो अरंड के पत्ते पर राई का लेप चुपड़ कर गुनगुना कर बांध देने से सूजन उतर जाती है।
  32. राई के दाने और नमक को जल में पीसकर लेप करने से भी सूजन ठीक होता है।
  33. जीभ पर सफेद मैल-सा जम जाय, भूख-प्यास ना लगती हो, साथ-साथ हल्का-हल्का बुखार भी रहता हो तो ऐसे लक्षणों में 500 मिग्रा राई के आटे को सुबह-शाम शहद के साथ सेवन करने से लाभ होता है।
  34. बुखार और हैजा में बेहोशी आ जाने पर, कांख, छाती और जंघा पर राई का लेप प्रभावकारी है।
  35.  अफीम विष के प्रभाव से या सांप के विष प्रभाव से यदि रोगी बेहोश हो गया हो तो कांख, छाती, जांघ आदि स्थानों पर राई का लेप लगाने से बेहोशी दूर हो जाती है।
  36. राई  के 5-10 ग्राम चूर्ण को ठंडे जल में पीस लें। इसे लगभग एक-डेढ़ गिलास जल में डालकर पिला दें। इससे उल्टी होती है और जहर तत्काल शरीर से बाहर निकल जाता है। इसका सबसे बेहतर लाभ यह भी है कि अन्य उल्टी कराने वाली औषधियों की तरह इससे शरीर पर कोई बुरा प्रभाव नहीं पड़ता है या शिथिलता नहीं आती है।
  37. काली राई को पीसकर मस्तक में लेप करने से आधासीसी या अधकपारी रोग में लाभ होता है।
  38. राई के फायदे से गंजेपन की समस्या में लाभ मिलता है। आधी कच्ची और आधी सेंकी हुई काली राई के दाने को पीसकर कड़वे तेल (सरसों) में मिला लें। इसे लगाने से सिर के गंजेपन में लाभ होता है।
  39. काली राई के तेल को पैरों और पैरों के तलवे पर मालिश करें। इससे जुकाम में लाभ होता है।
  40. नाक पर इसके तेल की मालिश करने से नाक का बहना तुरन्त बन्द हो जाता है।
  41. गले की हल्की सूजन हो तो काली राई के दाने की तेल से मालिश करने से लाभ होता है।
  42. 2-4 ग्राम काली राई के चूर्ण का सेवन करने से कब्ज ठीक होता है।
  43.  काली राई को पीसकर पेट तथा वक्ष-स्थल (छाती) पर लगाने से उल्टी (वमन) बंद हो जाती है।
  44. काली राई के तेल में कपूर मिलाकर लेप करने से भी गठिया में लाभ होता है।
  45. काली राई  को सिरके के साथ पीसकर लेप करने से दाद  ठीक होता है।
  46. काली राई को जल के साथ पीसकर लेप करने से फोड़ा में लाभ होता है।
  47. काली राई का लेप लगाने से गांठ की परेशानी से आराम मिलता है।
  48.  काली राई के तेल की मालिश करने से सूजन ठीक होती है। इससे आलस्य मिटता है, चुस्ती तथा फूर्ति आती है।
  49. शरीर के भीतर अगर कहीं खून का जमाव हो जाये तो वहां काली राई के तेल की मालिश करके सेंक दें। खून का जमाव खुल जाता है।
  50. पित्त की सूजन में काली राई की पट्टी बांधने से बहुत जल्दी लाभ होता है।
  51.  बच्चों की छाती पर काली राई के तेल  की मालिश करने से उनकी खांसी मिट जाती है। 
  52. कपास के पत्ते और काली राई के दाने को पीसकर बिच्छू के काटने वाले स्थान पर लेप करें। इससे बिच्छू के डंक का असर खत्म हो जाता है।
  53. काली राई को अधिक मात्रा में खिलाने से उल्टी होती है और इससे सांप के विष का असर कम हो जाता है।

राई की पुल्टिस बनाने की विधि (वयस्क व्यक्ति के उपयोग के लिए)

3 भाग अलसी चूर्ण और 1 भाग राई को ठंडे जल में घोटकर बनाएं।

राई की पुल्टिस बनाने की विधि (बच्चों के लिए)

राई चूर्ण 1 भाग तथा अलसी चूर्ण 10-15 गुना अधिक लें।
राई के इस्तेमाल से जुड़ी कुछ सावधानियां हैं जिनका आपको ध्यान रखना हैः-
  • थोड़ी मात्रा में राई का सेवन करने से भूख बढ़ती है, पसीना आता है। इसका अधिक मात्रा में सेवन वामक है।
  • लेप-राई का लेप हमेशा ठंडे जल में बनाएं।
  • राई का लेप सीधे त्वचा पर ना लगाएं, इससे फुंसी, फफोले आदि उठने का भय रहता है।
  • त्वचा के लाल होने पर लेप को उतार दें और उस अंग को पोंछ कर वहां पर घी या तेल लगा दें।
  • आंतरिक प्रयोग के लिऐ राई का छिलका उतार कर प्रयोग करें। इसके लिए राई को हल्के से पानी में भिगोकर हिलाते रहें। इसके बाद जब छिलका उतर जाये तो सुखा लें तथा पीसकर आटा बनाकर शीशी में सुरिक्षत रख लें।



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