धनिया (Coriander)
धनिया भारतीय रसोई में प्रयोग की जाने वाली एक सुंगंधित हरी पत्ती है।धनिया एक आहार है, इसलिए इसकी खेती देश भर में की जाती है। सामान्यतः इसके पत्तो का उपयोग सब्ज़ी की सजावट और ताज़े मसाले के रूप में किया जाता है। इसके बीज को सुखाकर सूखे मसाले की तरह प्रयोग किया जाता है। धनिया के कच्चे पत्तों में विटामिन A, C और K के गुण मौजूद है और इसके बीज में - फाइबर, कैल्शियम, कॉपर, आयरन | धनियाबीज संपूर्ण पाचन तन्त्र को मज़बूत करता है। धनिया बीज को रोज़ दो - तीन बार सौंफ़ की तरह चबाकर खाएं।
धनिया का उपयोग
- अधिक प्यास लगती है, तो धनिया के पानी में मधु, और मिश्री मिलाकर पीने से पित्त के कारण लगने वाली प्यास मिटती है।
- 175 ग्राम धनिया के पेस्ट को, 1 लीटर पानी में मिला लें। इसे रात भर छोड़ कर सुबह छान लें। इसमें 100 ग्राम मिश्री, तथा 100 ग्राम मधु मिला लें। इसे 10-15 मिली की मात्रा में पीने से लाभ होता है। हरा धनिया के फायदे अधिक प्यास में बहुत काम आता है।
- 10-20 मिली धनिए के काढ़ा में चीनी मिलाकर पीने से प्यास, और जलन शांत होती है।
- बराबर-बराबर मात्रा में धनिया, आंवला, वासा, मुनक्का तथा पित्तपापड़ा लें। इनका चूर्ण बना लें। 25 ग्राम चूर्ण को 200 मिली पानी में रात भर भिगो दें। इसे सुबह-शाम छानकर, मिश्री मिला लें। इसे पीने से प्यास मिटती है, और मुंह के सूखने की परेशानी में लाभ होता है।
- बच्चों की खांसी होने पर चावलों के पानी में, 10-20 ग्राम धनिया को घोंट लें। इसमें चीनी मिलाकर सुबह, दोपहर, तथा शाम को पिलाना है। इससे बच्चों की खांसी, और दमे में लाभ होता है।
- अदरक का रस 10 मिली, गुड़ 10 ग्राम, धनिया 5 ग्राम, अजवायन 5 ग्राम लें। इनके साथ ही, काला जीरा 5 ग्राम, दालचीनी 5 ग्राम, इलायची, तथा मोथा 5-5 ग्राम लें। इनका गाढ़ा काढ़ा बना लें। काढ़ा की 2-4 ग्राम की मात्रा सेवन करें। इससे खांसी, बुखार, बवासीर, टीबी आदि बीमारी में लाभ होता है।
- रात भर पानी से भिगोए हुए धनिया के बीजों को, छिलका रहित होने तक अच्छी तरह धो लें। इन बीजों को सुखाकर, भून लें। इसमें मरिच, हल्दी, सेंधा नमक, तथा नींबू के रस को मिला लें। इसे थोड़ी मात्रा में लेकर चबाने से भूख बढ़ती है।
- धनिया से बने काढ़ा का सेवन करने से आंतों के रोग में लाभ मिलता है। धनिया के सूखे फलों से बने काढ़ा का सेवन करने से पित्तज-विकार, कंठ की जलन, उल्टी में लाभ मिलता है।
- धनिया से बने काढ़ा में दूध, एवं चीनी मिला लें। इसे पीने से पाचनतंत्र के विकार में फायदा होता है।
- धनिया, लौंग, सोंठ, तथा निशोथ को बराबर-बराबर मात्रा में लेकर चूर्ण बना लें। इसे गर्म पानी के साथ 2-2 ग्राम, सुबह-शाम सेवन करें। इससे पाचन-शक्ति ठीक रहती है।
- धनिया, तथा सोंठ से बने 20 मिली काढ़ा में एरंड मूल का चूर्ण (1 ग्राम) मिला लें। इसे दिन में दो बार पिलाने से भोजन ठीक से पचता है।
- बराबर-बराबर मात्रा में धनिया, और सोंठ का काढ़ा बना लें। इसे 20-30 मिली मात्रा में सुबह-शाम पीने से पाचन-शक्ति बढ़ जाती है।
- पेट में गैस होने पर 10-15 मिली धनिया तेल का सेवन करने से आराम मिलता है।
- धनिया, और सोंठ का काढ़ा पीने से पेट दर्द, और अनपच ठीक होती है।
- पेट दर्द में 2 ग्राम धनिया चूर्ण को, 5 ग्राम मिश्री के साथ मिला लें। इसे दिन में दो-तीन बार देने से गर्मी से होने वाले पेट दर्द में लाभ होता है।
- 5 ग्राम धनिया को 100 मिली पानी में रात में भिगो लें। इसे सुबह मसलकर, छानकर रखें। इस पानी को बच्चों को पिलाने से पेट दर्द में लाभ होता है।
- 10-20 मिली धनिया का जूस को 10 मिली सिरके में मिलाकर लगाने से पेट दर्द ठीक हो जाता है।
- कब्ज में फायदे के लिए, 20 ग्राम धनिया, तथा 120 मिली पानी को मिट्टी के बरतन में डालकर, रात भर रहने दें। सुबह इसे छानकर, 13 ग्राम खांड डाल लें। इसे थोड़ा-थोड़ा पीने से कब्ज में लाभ मिलता है।
- 20 ग्राम धनिया को कूटकर, एक गिलास पानी में उबाल लें। इस पानी को कपड़े से छान लें। इसे एक-एक बूंद आंखों में डालने से आंख के रोग जैसे- आंखोंं में होने वाली दर्द, आंखों से पानी बहने की परेशानी में फायदा होता है।
- धनिया का जूस को बकरी के दूध में मिला लें। इसे आंख में एक-एक बूंद डालने से, आंखों का दर्द ठीक हो जाता है।
- धनिया बीज, और जौ को बराबर-बराबर लेकर पीस लें। इसका गाढ़ा लेप बना लें। इसे आंखों पर बांधने से आंख के दर्द ठीक हो जाते हैं।
- धनिया के 20-25 ग्राम ताजे पत्तों को पीस लें। इसमें चने का आटा मिलाकर लेप करने से आंखों के दर्द ठीक होते हैं।
- आंखों में जलन होने पर धनिया के पत्तों की चटनी बनाकर खाने से आराम मिलता है।
- 20 ग्राम धनिया को 400 मिली पानी में उबालें। जब यह एक चौथाई बचे, तो इससे आंखों को धोएं। इससे आंख की सूजन, और दर्द में फायदा होता है।
- 10-20 ग्राम धनिया, या इसकी 20-30 हरी पत्तियों को पीस लें। इससे चेहरे पर लगाने से आंखों के रोग में लाभ होता है।
- धनिया के 20 ग्राम पत्तों को पीस लें। इसमें थोड़ा-सा कपूर मिला लें। इसे 1-2 बूंद नाक में डालने से, और सिर पर मलने से, नाक से खून बहना (नकसीर) बंद हो जाता है।
- बराबर-बराबर मात्रा में धनिया, और आंवला को रात भर पानी में भिगोकर, सुबह पीसें, और छान लें। इसमें मिश्री मिलाकर पीने से गर्मी से होने वाले सिर दर्द में आराम मिलता है।
- धनिया का गाढ़ा काढ़ा बना लें। इसे 6 ग्राम की मात्रा में रोज सेवन करें। इससे सिर दर्द में आराम होता है।
- धनिया के बीजों को पीसकर सिर में लेप करने से सिर दर्द में लाभ होता है।
- कंठ के रोग में 10-20 ग्राम धनिया को पीसकर, जौ के सत्तू में मिलाकर कंठ पर लगाएं। इससे कंठ के रोग ठीक हो जाते हैं।
- धनिया के 5-10 ग्राम बीजों को दिन में दो-तीन बार चबाने से कंठ का दर्द ठीक हो जाता है।
- गंजेपन की समस्या के इलाज के लिए धनिया के 100 ग्राम चूर्ण को, 100 मिली सिरका के साथ पीसकर, सिर पर लेप करें। इससे गंजेपन में लाभ होता है।
- त्वचा रोग, जैसे- शरीर में पित्ती उछलने पर, धनिया के पत्तों के रस को शहद के साथ मिलाकर लगाना चाहिए।
- धनिया को अनार आदि अम्ल द्रव्य, और नमक के साथ पीस लें। इसे थोड़ी-थोड़ी देर पर खाने से उल्टी रुक जाती है।
- हरा धनिया के 30-40 मिली काढ़े में, 10 ग्राम मिश्री, और चावल का पानी 20 मिली मिला लें। इसे थोड़ा-थोड़ा पिलाने से गर्भवती महिलाओं को होने वाली उल्टी बंद हो जाती है।
- धनिया, सोंठ, तथा नागरमोथा को समान मात्रा में लेकर काढ़ा बना लें। 10-30 मिली काढ़ा में मिश्री मिलाकर, गर्भवती स्त्री को पिलाने से उल्टी ठीक हो जाती है। इससे अन्य लोगों को भी लाभ मिलता है।
- दस्त में फायदे के लिए 10 ग्राम भुना हुआ धनिया खाएं। इससे दस्त में लाभ होता है।
- इसी तरह, बराबर-बराबर मात्रा में धनिया, अतिविषा, कर्कटश्रृंगी, तथा गजपिप्पली से चूर्ण बना लें। इस चूर्म को 1/2-1 ग्राम मात्रा में लेकर, मधु मिलाकर सेवन करें। इससे बच्चों की उल्टी, और दस्त पर रोक लगती है।
- धान्यपञ्चक (धनिया, सोंठ, नारगमोथा, सुगन्धवाला, बेल का गुदा) से बने काढ़ा का सेवन करने से दस्त में लाभ होता है।
- दस्त में जलन, तथा प्यास लगने पर धनिया, तथा सुगन्धबाला का काढ़ा बना लें। 20-40 मिली काढ़ा को ठंडे जल के साथ पीना चाहिए। प्यास के साथ-साथ दर्द अधिक हो, तो धनिया, तथा सोंठ का काढ़ा पीने से लाभ होता है।
- पेचिश में 20 ग्राम धनिया को एक गिलास पानी में भिगोकर पीस छान लें। इसे सुबह पिएं।
- योनि से असामान्य रक्तस्राव हो रहा हो, तो 10-20 मिली धनिया काढ़ा को दिन में दो-तीन बार पिलाने से मेनोरेजिया में लाभ होता है।
- बवासीर में लाभ के लिए 10-20 ग्राम धनिया के बीजों को, एक गिलास पानी, और 10 ग्राम मिश्री के साथ उबालकर पिलाएं। इससे बवासीर से बहने वाला खून रुक जाता है।
- इसी तरह हरड़, गिलोय, तथा धनिया को समान मात्रा में लेकर चार गुने पानी में उबालें। जब यह एक चौथाई बच जाए, तो गुड़ डालकर सेवन करने से बवासीर में लाभ होता है।
- जोड़ों के दर्द से परेशान हैं, तो 6 ग्राम धनिया के चूर्ण में, 10 ग्राम शक्कर मिलाकर सुबह-शाम खाएं। इससे जोड़ों के दर्द में फायदा होता है।
- पित्त विकार के कारण होने वाले बुखार में 10 ग्राम धनिया, और 10 ग्राम चावल को रात भर भिगो दें। इस काढ़ा को 30 मिली मात्रा में सुबह-शाम पिलाने से बुखार में लाभ होता है। धनिया के औषधीय गुण बुखार के लक्षणों से राहत दिलाने में फायदेमंद होता है।
- पेट की गैस की समस्या में धनिया डालकर पकाए हुए पानी का सेवन करना हितकर होता है।

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