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ख़ुबानी (Apricot)

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     खुबानी गुठली वाला फल होता है और इसकी खास बात ये है कि खुबानी को कच्चा और सूखे मेवे दोनों रुपों में खाया जा सकता है। खुबानी पौष्टिकता के भरपूर होने के कारण खुबानी के फायदे भी स्वास्थ्य के दृष्टि से बहुत होते हैं। आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि आयुर्वेद में खुबानी का प्रयोग औषधि के रुप में बहुतायत मात्रा में की जाती है। खुबानी आड़ू या प्लम जैसा होता है जिसका छिलका थोड़ा खुरदुरा और मुलायम जैसा होता है। आयुर्वेद के अनुसार खुबानी मीठा और गर्म तासीर का होता है। खुबानी के गुणों के कारण यह वात और कफ को कम करने के साथ कमजोरी दूर करने में मददगार होता है। इसके अलावा खुबानी स्पर्म या शुक्र की क्ववालिटी और संख्या बढ़ाने में भी सहायता करता है। खुबानी आग से जलने पर दर्द  और जलन कम करने में भी फायदेमंद होता है। खुबानी के फल का जलीय एवं ऐथेनॉल सार क्षयरोगरोधी यानि ट्युबरक्लोसिस को होने से रोकने में मदद करता है। साथ ही खुबानी का ब्युटैनॉलिक-सार जीवाणुरोधी भी होता है। खुबानी का सार बैक्टिरीया से लड़ने में मदद करता है। खुबानी का उपयोग 1-2 बूंद खुबानी के बीज का तेल कान में डालने से क...

अंजीर (Fig)

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     अंजीरअच्छी सेहत के लिए एक लोकप्रिय प्राचीन घरेलू उपचार है। ये पौष्टिक होने के साथ-साथ स्वादिष्ट भी होते हैं। अंजीर विभिन्न आवश्यक पोषक तत्वों का एक मिश्रण है। वे फाइटोन्यूट्रिएंट्स, एंटीऑक्सिडेंट्स और विटामिन से भरपूर होते हैं। अंजीर को फल या ड्राई फ्रूट के रूप में खाया जा सकता है। अंजीर का सेवन या तो ताजा या सूखा के रूप में किया जा सकता है और इसका स्वाद मीठा होता है। फिकस कैरिका शहतूत परिवार में फूलों के पौधों की एक एशियाई प्रजाति है, जिसे आम अंजीर के रूप में जाना जाता है। अंजीर मध्य पूर्व और भू मध्य क्षेत्रों के शुष्क और धूप स्थानों में उगाए जाने वाले फल हैं। इनकी खेती प्राचीन काल से की जाती रही है। खाद्य अंजीर उन पहले पौधों में से एक है जिनकी खेती मनुष्यों द्वारा की गई थी। अंजीर के पेड़ की छाल चिकनी और सफेद रंग की होती है। इसका पेड़ मुख्य रूप से सूखी और धूप वाली जगह पर तेजी से बढ़ता है और जड़ें बहुत गहरी होती हैं। यह पहाड़ी क्षेत्र में भी आसानी से उग सकता है। पेड़ की ऊंचाई 9-10 मीटर हो सकती है। ये हिमालय और शिवालिक क्षेत्रों में बहुतायत में पाए जाते हैं। ईरान, भार...

सीताफल, शरीफा (Custurd apple)

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     सीताफल को शरीफा भी बोलते हैं। इसका स्वाद अन्य फलों से अलग होता है। सीतफल एक ऐसा आहार है, जो शरीर को स्वस्थ बनाने के साथ-साथ कई बीमारियों के उपचार के लिए भी प्रयोग में लाया जाता है। इसका फल गोल होता है। फल के अंदर का हिस्सा मांसल, या गुदायुक्त होता है। सीताफल के बीज चिकने, चमकीले, भूरे-काले रंग के होते हैं। जब सीताफल कच्ची अवस्था में होता है, तो यह थोड़ा पीला, और हरा रंग का होता है। यह आम फलों की तरह ही एक स्वादिष्ट फल है, जिसको लोग बड़ी पसंद से खाते हैं। सीताफल  का इस्तेमाल कफ दोष को ठीक करने के लिए, खून की मात्रा को बढ़ाने के लिए, उल्टी, दांतों के दर्द से आराम पाने के लिए किया जाता है।आयुर्वेद के अनुसार, सीताफल का प्रयोग एक-दो नहीं बल्कि, अनेक रोगों के इलाज के लिए किया जा सकता है।  सीताफल का उपयोग  शरीफा के वृक्ष के तने का काढ़ा बना लें। इसे 15-30 मिली मात्रा में पिएं। इससे दस्त पर रोक लगती है। महिलाएं 1-2 ग्राम शरीफा की जड़ के चूर्ण का सेवन करे। इससे प्रसूता संबंधित विकार में लाभ होता है। रोम छिद्र विकार को ठीक करने के लिए सीताफल के पत्ते का पेस...

बेल (wood apple)

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     बेल मुख्य रुप से भारत में पाया जाने वाला एक पौधा है। आमतौर पर लोग जूस या शरबत के रुप में बेल का सेवन ज्यादा करते हैं।हिंदू धर्म में इसे एक पवित्र पौधा माना जाता है और पूजा में बेल के पत्तों का इस्तेमाल किया जाता है। आयुर्वेद में इसे महत्वपूर्ण औषधि माना गया है जो पाचन संबंधी कई बीमारियों में फायदेमंद है।  इस फल का हर हिस्सा ही सेहत के लिए के लिए गुणकारी है, बाहर से यह फल जितना ही कठोर होता है अंदर से उतना ही मुलायम और गूदेदार होता है। इसके गूदे में मौजूद बीज भी कई बीमारियों के इलाज में फायदा पहुंचाते हैं। बेल के फल में विटामिन सी, कैल्शियम, फाइबर, प्रोटीन और आयरन भी अधिक मात्रा में मिलते हैं। बेल के नियमित सेवन से शरीर के लिए आवश्यक पोषक तत्वों की आपूर्ति होती है साथ ही शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है। बेल के उपयोग  डायरिया और पेचिश :  आधा चम्मच बेलगिरी के चूर्ण को पानी के साथ मिलाकर दिन में दो बार इसका सेवन करें। बार बार शौच जाने की समस्या :  दो चम्मच बेल के गूदे को आधा गिलास पानी में मिलाकर जूस बना लें और दिन में दो बार इसका से...

नींबू (Lemon)

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     नींबू से सब परिचित हैं। लोग नींबू का इस्तेमाल कर कई व्यंजन बनाते हैं।नींबू की चटनी को बहुत ही पसंद से खाई जाती है। नींबू की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि जहां दूसरे फल पकने पर मीठे हो जाते हैं, वहीं नींबू का स्वाद हर समय खट्टा ही रहता है। नींबू विटामिन C का मुख्य स्रोत है। नींबू के सेवन से स्कर्वी रोग भी ठीक होता है। इतना ही नहीं नींबू का प्रयोग कर कई और भी बीमारी ठीक की जा सकती है। नींबू की कई जातियां पाई जाती है, जैसे- कागजी नींबू, बिजौरी नींबू, जम्मीरी नींबू, मीठा नींबू इत्यादि। औषधी के रूप में कागजी नींबू का ही प्रयोग करना चाहिए। इसका आकार छोटा या मध्यम होता है। इसका वृक्ष कांटों से युक्त, झाड़ीनुमा होता है। इसके फूल छोटे, सफेद अथवा गुलाबी रंग के होते हैं। फूलों से सुगंध आती है। नींबू के उपयोग 1 कप पीने लायक गर्म दूध में आधा नींबू निचोड़-कर दूध फटने से तुरन्त पहले पी जायें। यह रक्तस्राव को तुरन्त बंद कर देता है। इस प्रयोग को एक या दो बार से अधिक न करें। 5 मिली फल के रस में मधु, नारिकेलोदक और नमक मिलाकर सेवन करें। इससे अधिक प्यास लगने की परेशानी ठीक होती है। जीभ...

बथुआ (Wild spinach)

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     बथुआ हर सब्जी मार्केट में आसानी से मिल जाता है, और देश भर में लोग बथुआ  का सेवन करते हैं। आप भी जरूर बथुआ को खाते होंगे, लेकिन आपको केवल यह पता होगा कि बथुआ को साग के रूप में खाया जाता है। बथुआ एक महत्त्वपूर्ण तथा स्वास्थ्यवर्धक शाक (Bathua vegetable) है। इस पौधे के पत्ते  शीतादरोधी (Antiscorbutic) तथा पूयरोधी (Antidiuretic) होते हैं।  बथुए में अनेक प्रकार के लवण एवं क्षार पाए जाते हैं, जिससे यह पेट रोग के लिए फायदेमंद होता ही है साथ ही अनेक बीमारियों में भी काम में लाया जा सकता है। बथुआ  के  उपयोग बथुआ के बीजों (1-2 ग्राम) का चूर्ण बना लें। इसे मधु के साथ सेवन करें। इससे रक्तपित्त में लाभ होता है। दांत में दर्द हो रहा हो तो बथुआ के बीज का चूर्ण बनाकर दांतों पर रगड़ें। इससे दांत का दर्द तो ठीक होता ही है, साथ ही मसूड़ों की सूजन भी कम हो जाती है।   बथुआ के पत्तों को उबालकर पीस लें। इसे सूजन वाले अंग पर लगाने से सूजन कम हो जाती है।  बथुआ के पत्तों की सब्जी बनाकर सेवन करें। इससे खांसी में आराम मिलता है। बथुआ के रस (5 मिली) में नमक...

आलू (Potato)

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      आलू सबसे आम और महत्वपूर्ण भोजन स्रोतों में एक है। भारत के हर रसोईघर में आलू के बिना कोई भी व्यंजन बनाना मुश्किल होता है। लेकिन क्या आप इसके फायदों के बारे में जानते हैं। वैसे आम तौर पर लोगों का मानना है कि आलू खाने से वजन बढ़ता है लेकिन ये सच नहीं है। आलू में इतने पौष्टिक तत्व और गुण हैं कि इस खाद्द पदार्थ को कई बीमारियों के लिए औषधि के रुप में उपयोग किया जाता है। आलू मीठा और गर्म तासीर का होता है। यह खाने में रुची बढ़ाने के साथ-साथ सूजन कम करने में मददगार होता है। इससे प्राप्त सोलैनिन (Solanine) वेदना कम करने वाला तथा तंत्रिका शूलरोधी (Anti-neuralgic) यानि नर्व के दर्द से राहत दिलाता है। 50-200 मिग्रा की मात्रा में सोलैनीन का प्रयोग करने से कण्डू यानि चर्म रोग कम होता है। आलू पचाने में भारी तथा मल को गाढ़ा करने वाला होता है। लेकिन इसको ज्यादा खाने से शरीर में आलस्य पैदा होता है। आलू के उपयोग आलू के भुने हुए कंद या गांठ  का सेवन करने से मुखपाक या मुँह के छाले कम होते हैं। 2-5 मिली आलू के पत्ते के रस में मधु तथा सेंधा नमक मिलाकर सेवन करने से गले की जलन (कण्ठदाह)...