कम्पिल्लक कबीला (Red berry)
कम्पिल्लक (कबीला) एक सुन्दर फल है। यह हल्के लाल रंग का गन्धहीन और स्वादहीन फल है। यह ठण्डे पानी में नहीं घुलता है। यह उबलते हुए पानी में थोड़ा घुलता है, और एल्कोहल और ईथर में पूरी तरह से घुल जाता है।कम्पिल्लक के वृक्ष लगभग 10 मीटर तक ऊँचे और अनेक शाखा-प्रशाखाओं से युक्त तथा सदा हरे रहने वाले होते हैं। इस वृक्ष की लकड़ी लाल, चिकनी एवं मजबूत होती है। इसके फल गोलाकार तथा बीज श्यामले रंग के, चिकने और लगभग गोलाकार होते हैं। फलों के पकते समय लालिमा युक्त चमकदार फल पराग उत्पन्न होता है। इसी को कबीला कहते है। फलों के पक जाने पर उन्हें मोटे कपड़े में डालकर रगड़ते हैं। इस तरह रज को अलग निकाल लिया जाता है। शुद्ध कबीला हल्का, सुगन्धरहित, स्वाद रहित तथा लालिमायुक्त होता है। उँगली को जल में गीला कर कम्पिल्लक पर रखने से जो रज उँगली में लगे उसे सफेद कागज पर रगड़ दें। यदि पीले रंग की रेखा व निशान पड़ जाए तो उसे शुद्ध मानना चाहिए। कम्पिल्लक (कबीला) के उपयोग टंकण, कम्पिल्लक तथा हरीतकी चूर्ण को समान मात्रा में मिला लें। इसे हरीतकी काढ़ा की भावना देते हुए 125 मिग्रा की वटी ब...