चाय (tea leaf)

     चाय सिर्फ ऊर्जा प्रदान करने का ही काम नहीं करती है। इसके औषधिकारक गुण अनगिनत है जिसके कारण आयुर्वेद में चाय को कई बीमारियों के इलाज के रुप में प्रयोग किया जाता है।


चाय के उपयोग 

  1. अक्सर काम के तनाव के कारण सिर में दर्द होने लगता है। चाय सिरदर्द से आराम दिलाने में बहुत फायदेमंद होता है।  चाय के पत्तों का काढ़ा बनाकर 5-15 मिली मात्रा में पीने से सिरदर्द से आराम मिलता है।
  2. ठंड के मौसम के जाने और गर्मी के मौसम के आने के समय लोगों को आँख आने की बीमारी होती है। आँख लाल होकर दर्द होने लगता है। आँख आने पर चाय का इस्तेमाल  इस तरह से करने पर बहुत फायदा मिलता है। चाय का काढ़ा बनाकर उसके 1-2 बूंदों को नेत्रों में डालने से 2-3 दिन में आँख आने पर जो परेशानी होती है उससे राहत मिलती है।
  3. आमाशय के कारण या गर्म खाद्द पदार्थों के ज्यादा सेवन से भी गले में घाव जैसा हो जाता है जिसके कारण दर्द होने लगता है। चाय के काढ़े से दिन में 2-3 बार गरारा करने से गले में जो घाव या सूजन होता है उससे राहत मिलती है। 
  4.   बनफ्सा, मुलेठी तथा चाय का काढ़ा (15-20 मिली) बनाकर पीने से प्रतिश्याय (नजला-जुकाम) में लाभ मिलता है। 
  5. चाय के काढ़े में पुदीना तथा अकरकरा मिलाकर पका लें, फिर 15-20 मिली मात्रा में पीने से पेट में गैस होने के कारण जो दर्द की परेशानी होती है उससे राहत मिलती है।
  6. मूत्र संबंधी बीमारियों में मूत्र में जलन होना, दर्द होना, रुक-रुक कर पेशाब होना या कम मात्रा में पेशाब होने जैसे बहुत समस्याएं होती है। चाय के पत्तों का काढ़ा बनाकर 10-15 मिली मात्रा में पीने से बुखार तथा मांसपेशियों का ढीलापन तथा मूत्र संबंधी रोगों में लाभकारी होता है।
  7.  चाय को सालम मिश्री, दालचीनी तथा दूध के साथ मिलाकर, पकाकर 15-20 मिली मात्रा में पीने से कामशक्ति बढ़ती है। 
  8. आग से, गर्म जल से, गरम तेल  आदि से यदि शरीर का कोई भी भाग झुलस गया हो तो, चाय मिश्रित उबलते हुए पानी या काढ़ा को ठंडा करके उसमें कपड़े की पट्टी भिगोकर उस स्थान पर रखने तथा बार-बार उस पर उसी काढ़ा को थोड़ा-थोड़ा डालते रहने से त्वचा में फफोले नहीं पड़ते तथा त्वचा में दाग नहीं हो पाता।
  9. अगर चोट लगने के कारण सूजन आ गई है तो चाय को पीसकर गुनगुना करके सूजन प्रभावित स्थान पर लगाने से सूजन कम हो जाती है।

स्तनपान कराने वाली स्त्रियों को चाय का ज्यादा सेवन नहीं करना चाहिए। अधिक मात्रा में चाय का प्रयोग करने से शिशुओं ज्यादा सोने लगते हैं।  इसके अत्यधिक सेवन से  दिल में जलन या एसिडिटी, अनिद्रा एवं अरुचि जैसे लक्षण उत्पन्न हो सकते हैं।

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