तिल (sesame)
तिल प्रति वर्ष बोया जानेवाला लगभग एक मीटर ऊँचा एक पौधा जिसकी खेती संसार के प्रायः सभी गरम देशों में तेल के लिये होती है। तिल का तेल त्वचा के लिए लाभकारी है। प्रतिदिन तिल तेल की मालिश करने से मनुष्य कभी भी बीमार नहीं होता। तिल तेल की मालिश से रक्त विकार, कमर दर्द, मसाज, गठिया का दर्द जैसे रोगों में लाभ होता है। तिल को पीसकर जले हुए स्थान पर लेप करने से जलन तथा दर्द कम होता है।
बाल झड़ना, असमय सफेद बाल में तिल के तेल के फायदे (Til Benefits in Hair loss, Grey Hair)
- तिल की जड़ और पत्ते का काढ़ा बनाकर काढ़े से बाल धोने से बाल सफेद नहीं होते।
- काले तिल के तेल को शुद्ध अवस्था में बालों में लगाने से बाल असमय सफेद नहीं होते। प्रतिदिन सिर में तेल की मालिश करने से बाल सदैव मुलायम, काले और घने रहते हैं।
- तिल के फूल तथा गोक्षुर को बराबर लेकर घी तथा मधु में पीसकर सिर पर लेप करने से बालो का झड़ना तथा रूसी दूर होती है।
- समान मात्रा में आँवला, काला तिल, कमल केसर तथा मुलेठी के चूर्ण में मधु मिलाकर सिर पर लेप करने से बाल लम्बे तथा काले होते हैं।
सूर्यावर्त में तिल के फायदे (Til Beneficial in Trigeminal neuralgia)
- इसके लिए दूध से तिल को पीसकर, वेदनायुक्त स्थान का स्वेदन करने से या मस्तक पर लगाने से सूर्यावर्त नामक सिरदर्द में लाभ होता है।
- तिल के पत्तों को सिरके या पानी में पीसकर मस्तक पर लेप करने से सिरदर्द कम होता है।
आँख संबंधी बीमारी में तिल के फायदे (Til Benefits for Eye Diseases)
- तिल फूलों पर शरद्-ऋतु में पड़ी ओस की बूंदों को मलमल के कपड़े या किसी और प्रकार से उठाकर शीशी में भरकर रख लें। इन ओस कणों को आंख में डालने से लाभ होता है।
- काले तिलों का काढ़ा बनाकर आँखों को धोने से नेत्र संबंधी रोगों से राहत मिलती है।
- 80 तिल के फूल, 60 पिप्पली, 50 चमेली के फूल तथा 16 काली मिर्च को जल से पीसकर, बत्ती जैसा बनाकर, घिसकर काजल जैसा लगाने से मोतियाबिंद आदि आँख संबंधी रोगों में लाभ मिलता है।
- तिल तेल, बहेड़ा तेल, भृंगराज रस तथा विजयसार काढ़ा को मिलाकर लोहे की कड़ाही में तेल पकाने के बाद प्रतिदिन 1-2 बूंद नाक से लेने से देखने की शक्ति बढ़ती है।
दंत रोग में तिल के फायदे (Til Benefits for Dental disease)
- प्रतिदिन 25 ग्राम तिलों को चबा-चबा कर खाने से दांत मजबूत होते हैं।
- मुंह में तिल को भरकर 5-10 मिनट रखने से पायरिया में लाभ होता है तथा दांत मजबूत हो जाते हैं।
खांसी में तिल के फायदे (Til Treats Cough )
- तिल के 30-40 मिली काढ़े में 2 चम्मच शक्कर डालकर पीने से खांसी में लाभ होता है।
- तिल और मिश्री को उबालकर पिलाने से सूखी खांसी मिटती है।
रक्तातिसार (दस्त से खून आना) में तिल के फायदे (Til Beneficial in Blood Dysentery)
- तिलों के 5 ग्राम चूर्ण में समान मात्रा में मिश्री मिलाकर बकरी के चार गुने दूध के साथ सेवन करने से रक्तातिसार में लाभ होता है।
आमातिसार या पेचिश में तिल के फायदे (Benefits of Til in Dysentery)
- तिल के पत्तों को पानी में भिगोने से पानी में लुआब आ जाता है, यह लुआब को पिलाने से विसूचिका या हैजा, अतिसार या दस्त, आमातिसार या पेचिश, प्रतिश्याय (Coryza) और मूत्र संबंधी रोगों में लाभ होता है।
अर्श या पाइल्स में तिल के फायदे (Til Treats Piles)
- तिल को जल के साथ पीसकर मक्खन के साथ दिन में तीन बार भोजन से 1 घण्टा पहले खाने से अर्श में लाभ होता है तथा रक्त का निकलना बंद हो जाता है।
- तिल को पीसकर गर्मकर पोटली जैसा बांधने से अर्श में लाभ होता है।
- तिल के तेल की बस्ति (एनिमा) देने से अर्श में लाभ होता है।
पथरी में तिल के फायदे (Benefits of Til in Kidney Stone)
- तिल की छाया-सूखे कोमल कोपलों (125-250 मिग्रा) को प्रतिदिन खाने से पथरी गलकर निकल जाती है।
- तिल फूलोंके 1-2 ग्राम क्षार में 2 चम्मच मधु और 250 मिली दूध मिला कर पिलाने से पथरी गल जाती है।
- 125-250 मिग्रा तिल पञ्चाङ्ग भस्म को सिरके के साथ प्रात सायं भोजन से पहले सेवन करने से पथरी गलकर निकल जाती है।
गर्भाशय विकार में तिल के फायदे (Til for Ovary Inflammation)
- तिल को दिन में 3-4 बार सेवन करने से गर्भाशय संबंधी रोगों में लाभ होता है।
- 30-40 मिली तिल काढ़े का सेवन करने से पीरियड्स के समस्याओं में लाभ होता है।
- तिल के 100 मिली काढ़ा में 2 ग्राम सोंठ, 2 ग्राम काली मिर्च और 2 ग्राम पीपल का चूर्ण बुरककर दिन में तीन बार पिलाने से पीरियड्स या मासिक धर्म में लाभ होता है।
- रूई के फाहे को तिल के तेल में भिगोकर योनि में रखने से श्वेतप्रदर या सफेद पानी में लाभ होता है। तिल के तेल के फायदे सफेद पानी यानि ल्यूकोरिया में होता है।
- 1-2 ग्राम तिल चूर्ण को दिन में 3-4 बार जल के साथ लेने से ऋतुस्राव यानि पीरियड्स नियमित हो जाता है।
- तिल का काढ़ा बनाकर लगभग 30-40 मिली काढे को सुबह शाम पीने से मासिक-धर्म नियमित हो जाता है।
वीर्य या अंदरूनी शक्ति में कमी संबंधी समस्या में तिल के फायदे (Til Beneficial in Semen related Diseases)
- 5 ग्राम तिल तथा 1 ग्राम गोखरू चूर्ण को 200 मिली बकरी के दूध में पका कर ठंडा करके उसमें शहद मिलाकर पिलाने से वीर्य की पुष्टि होती है।
मूत्रदाह यानि मूत्रजलन में तिल के फायदे (Til Treats Urinary Diseases)
- तिल के ताजे पत्तों को 12 घण्टे तक पानी में भिगोकर उस पानी को पिलाने से अथवा तिल के 1-2 ग्राम क्षार को दूध या शहद के साथ देने से पूयमेह में लाभ होता है तथा मूत्रदाह में भी लाभ होता है।
संधिवात या जोड़ो के दर्द में फायदेमंद तिल (Til Benefits to Get Relief from Arthritis)
- तिल तथा सोंठ चूर्ण को समान मात्रा में मिलाकर प्रतिदिन 5-5 ग्राम की मात्रा तीन से चार बार सेवन करने से संधिवात में लाभ होता है।
पुरुषत्व में तिल के फायदे (Benefits of Til in Virility)
- तिल और अलसी का काढ़ा बनाकर 30-40 मिली मात्रा में लेकर सुबह शाम भोजन से पहले पिलाने से पुरुषत्व की वृद्धि होती है।
रसायन वाजीकरण में तिल के फायदे (Til Beneficial in Aphrodisiac)
- काले तिल को पीसकर नासूर या अल्सर पर लगाने से तथा कम्पिल्लक को पानी में घिसकर लेप करने से नासूर में लाभ होता है।
विष में तिल का प्रयोग (Uses of Til for Poision)
- तिल और हल्दी को पानी में पीसकर मकड़ी के काटे हुए स्थान पर लेप करने से मकड़ी का विष उतर जाता है।
- तिल को पानी में पीसकर काटे हुए स्थान पर लेप करने से बिल्ली का विष उतर जाता है।
- तिल को सिरके में पीसकर काटे हुए स्थान पर मलने से भिड़ (बर्रैं) का विष उतर जाता है।
- तिल की खली (पिण्याक) को पीसकर काटे हुए स्थान पर लगाने से बिच्छु के काटने से जो दर्द होता है उससे आराम मिलता है।
- वात प्रधान कीट के काटने पर तिल की खली (पिण्याक) का लेप करके तिल का तेल पतंजलि से मालिश करने से लाभ होता है।
बुखार में तिल के फायदे (Benefits of Til in Fever)
- तिल की लुगदी को घी के साथ लेने से विषमज्वर में लाभ होता है।
तिल का अन्य उपयोग (other use of Til)
- तिल और सिरस की छाल को सिरके के साथ पीसकर मुंह पर लगाने से मुहांसे ठीक हो जाते हैं।
- चोट और मोच पर तिल की खली को पानी के साथ पीसकर गर्म करके बांधने से लाभ होता है।
- तिल और अरंडी को अलग-अलग कूटकर दोनों को तिल तेल में मिलाकर लेप करने से चोट की पीड़ा मिटती है।
- तिलों की पोटली जैसा बनाकर घाव पर बांधने से घाव जल्दी भर जाते हैं।
- सब प्रकार के व्रणों या अल्सर पर तिल का तेल पतंजलि लगाना अच्छा होता है।
- यदि शरीर में किसी भी अंग में नागफनी या थूहर का कांटा घुस जाय और निकालने में दिक्कत हो तो उस जगह तिल का तेल बार-बार लगाने से कुछ समय में वह कांटा बिना परिश्रम के निकल जाता है।
- रात्रि में जो बच्चे बिस्तर गीला कर देते हैं, उनके लिए तिल का लम्बे समय तक सेवन बहुत लाभकारी है।

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