तेज पत्ता(Bay Leaf)

     तेज पत्ता हर भारतीय रसोई में आपको आसानी से मिल जाएगा।  जिसका इस्तेमाल व्यंजनों में जायका और खुशबू बढ़ाने के लिए किया जाता है।इसके इस्तेमाल से कई शारीरिक बीमारियों से बचा सकता है। आयुर्वेद में इस औषधीय पत्ते के प्रयोग के कई लाभ बताए गए हैं।तेजपत्ता के जड़ और तने की छाल, पत्ता एवं तेल का इस्तेमाल औषधि के रुप में सबसे ज्यादा किया जाता है।तेज पत्ता का उपयोग इसके सूखने के बाद ही होता है।

तेज पत्ता के फायदे – Benefits of Bay Leaf

  1. तेज पत्ते का एसेंशियल ऑयल मुंह में पाए जाने वाले स्टैफिलोकॉकस ऑरियस नामक बैक्टीरिया के खिलाफ लड़ सकता है
  2.  तेज पत्ते के एसेंशियल ऑयल का इस्तेमाल त्वचा संम्बधित फंगल संक्रमण मे किया जा सकता है .
  3.  10 ग्राम तेजपत्ता के पत्तों को जल में पीसकर, कपाल पर लेप करने से ठंड या गर्मी से उत्पन्न सिरदर्द से आराम मिलता है।
  4.  तेजपत्ता के 5-6 पत्तों को एक गिलास पानी में इतना उबालें कि पानी आधा रह जाय। इस पानी से रोजाना सिर की  मालिश करने के बाद नहाएं। इससे सिर में जुंए नहीं होते हैं।
  5.  तेजपत्ता को पीसकर आंख में लगाने से आँख संबंधी बीमारी से राहत मिलती है।
  6.  यदि किसी कारण दांतों का चमक चला गया है तो तेजपत्ता के बारीक चूर्ण को सुबह-शाम दांतों पर मलने से दांतों में चमक आ जाती है।
  7.  तेजपत्ता के डंठल को चबाते रहने से मसूड़ों से खून का आना बन्द हो जाता है।
  8.  तेजपत्ता के पत्तों को नियमित रूप से चूसते रहने से हकलाहट में लाभ होता है।
  9.  तेजपत्ता और पीपल को 2-2 ग्राम की मात्रा में अदरक के मुरब्बे की चाशनी में बुरक कर चटाने से दमा के बीमारी में लाभ मिलता है। इसके अलावा सूखे तेजपत्ता के चूर्ण को एक चम्मच की मात्रा में एक कप गर्म दूध के साथ सुबह-शाम नियमित सेवन करने से सांस संबंधी समस्या में लाभ होता है।
  10.  तेजपत्ता का रायता सुबह-शाम पीने से भूख ना लगने की समस्या दूर होती है।
  11. 1-3 ग्राम पत्ते के चूर्ण में मिश्री तथा शहद मिलाकर सेवन करने से अतिसार तथा पेट दर्द कम होता है।
  12.  समान मात्रा में तेजपत्ता, लहसुन, काली मरिच, लौंग तथा हल्दी के चूर्ण का काढ़ा बनाकर 10-20 मिली मात्रा में पीने से लीवर संबंधी रोगों में लाभ होता है।
  13.  इसके पत्तों की धूनी (योनि में) देने से बच्चा सुख से उत्पन्न हो जाता है।
  14.  1-3 ग्राम तेजपात के पत्ते के चूर्ण को सुबह शाम सेवन करने से गर्भाशय का शोधन होता है। तेजपात के काढ़े में बैठने से गर्भाशय की पीड़ा कम होती है। 40-60 मिली तेजपात के पत्तों का काढ़ा प्रसूता यानि जिसकी डिलीवरी हुई है उसको सुबह शाम पिलाने से दूषित रक्त तथा मल आदि निकल कर गर्भाशय शुद्ध हो जाता है।
  15.  तेजपत्ता के पत्तों को पीसकर जोड़ों पर लेप करने से सन्धिवात में लाभ होता है।
  16.  शरीर के किसी भी अंग से रक्तस्राव या ब्लीडिंग होने पर एक चम्मच तेजपात चूर्ण को एक कप पानी के साथ 2-3 बार सेवन करने से लाभ होता है।
  17.  समान मात्रा में तेजपत्ता, सुंधबाला, अगरु, हरीतकी एवं चंदन को पीसकर शरीर पर लगाने से पसीने से उत्पन्न होने वाली शरीर का दुर्गंध कम होता है।
  18.  अगर मकड़ी ने चाट लिया है तो समान मात्रा में मंजिष्ठा, नागकेसर, तेजपत्ता तथा हल्दी को पीसकर चाटे हुए स्थान पर लेप करने से मकड़ी के विष का प्रभाव कम हो जाता है।


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