इलायची(cardamom)
एक ग्राम बड़ी इलायची बीज चूर्ण को 10 ग्राम बेलगिरी के साथ मिलाकर सुबह और शाम सेवन करने से पेचिश में लाभ होता है।इलायची की जो दो प्रमुख प्रजातियाँ हैं,अलटेरिया, जिसे हरी या छोटी इलायची भी कहते हैं, भारत से लेकर मलेशिया तक उगाई जाती है।ऍमोमम, जिसे बड़ी इलायची, काली इलायची, भूरी इलायची, नेपाली इलायची, बंगाल इलायची या लाल इलायची भी कहते हैं, एशिया और ऑस्ट्रेलिया में उगाई जाती है।
इलायची के उपयोग (use of cardamom)
- खराश : यदि आवाज बैठी हुई है या गले में खराश है, तो सुबह उठते समय और रात को सोते समय छोटी इलायची चबा-चबाकर खाएँ तथा गुनगुना पानी पीएँ।
- सूजन : यदि गले में सूजन आ गई हो, तो मूली के पानी में छोटी इलायची पीसकर सेवन करने से लाभ होता है।
- खाँसी : सर्दी-खाँसी और छींक होने पर एक छोटी इलायची, एक टुकड़ा अदरक, लौंग तथा पाँच तुलसी के पत्ते एक साथ पान में रखकर खाएँ।
- उल्टी : बड़ी इलायची पाँच ग्राम लेकर आधा लीटर पानी में उबाल लें। जब पानी एक-चौथाई रह जाए, तो उतार लें। यह पानी पीने से उल्टियाँ बंद हो जाती हैं।
- छाले : मुँह में छाले हो जाने पर बड़ी इलायची को महीन पीसकर उसमें पिसी हुई मिश्री मिलाकर जबान पर रखें। तुरंत लाभ होगा।
- बदहजमी : यदि केले अधिक मात्रा में खा लिए हों, तो तत्काल एक इलायची खा लें। केले पच जाएँगे और आपको हल्कापन महसूस होगा।
- जी मिचलाना : बहुतों को यात्रा के दौरान बस में बैठने पर चक्कर आते हैं या जी घबराता है। इससे निजात पाने के लिए एक छोटी इलायची मुँह में रख लें।
- इलायची खाने से दाँतों और मसूड़ों का संक्रमण जल्दी ठीक होता है और दांतों के दर्द से आराम मिलता है। यह बेहतर तरीके से मुंह की देखभाल करती है।
- इलायची की सुगंध आपके मूड को तरोताजा बनाये रखती है।इसलिए स्ट्रेस या डिप्रेशन के मरीजों को स्ट्रेस भगाने के लिए रोजाना इलायची वाली चाय ज़रुर पीनी चाहिए।
- काली इलायची में ऐसे गुण होते हैं जो ह्रदय गति को नियंत्रित रखते हैं जिस वजह से ब्लड प्रेशर भी नियंत्रित रहता है। इसके अलावा ये खून के थक्के बनने से रोकती है।
- जिन लोगों को समय पर भूख ना लगने या कम लगने की समस्या है उन्हें इलायची का सेवन करना चाहिए।
- दो छोटी इलायची , 1 बड़ी इलायची तथा 1 ग्राम कपूर को पीस लें। इसे ललाट पर लगाने से दवा से भी ठीक न होने वाला सिरदर्द और तनाव आदि दूर होते हैं।
- आँखों में अँधेरा छाता हो, आँखें चौंधियाती हों या आँखों में फुंसी हो गई हो तो छोटी इलायची के चूर्ण को बारीक मलमल के कपड़े से छान लें। इसमें तीन दिन तक बकरे के मूत्र में भिगो कर छाया में सुखाएं। इस चूर्ण को आँखों में काजल की तरह लगाएं। इससे आँखों की शुद्धि होगी और उपरोक्त सभी रोग ठीक होंगे।
- रोजाना एक चम्मच मधु के साथ एक छोटी इलायची खाने से आँखों की रौशनी बढ़ती है, उसके तंत्रिका-तंत्र को बल मिलता है और आँखों के सामान्य स्वास्थ्य की रक्षा होती है।
- दाँतों या मसूड़ों में सड़न के कारण मुँह से दुर्गंध आती हो तो दालचीनी, नागरमोथा, छोटी इलायची तथा धनियाँ बराबर मात्रा में लें।
- छोटी इलायची तथा दालचीनी को पानी में उबाल लें। इसे पानी से थोड़ी देर तक मुँह में रखे रहने और उसके बाद कुल्ला करने से गले की सूजन, आवाज बैठना आदि रोगों में लाभ होता है।
- इलायची तथा काली मिर्च की बराबर मात्रा का काढ़ा बना लें। इस 10-20 मि.ली. काढ़े में खांड़ मिलाकर पीयें। इससे सूखी खाँसी तथा सांसों के फूलने की परेशानी ठीक होती है।
- छोटी इलायची चूर्ण तथा पिप्पली की जड़ के चूर्ण को बराबर मात्रा में मिला लें। इसकी 1-2 ग्राम की मात्रा को दोगुने घी में मिलाकर खाने से हृदय रोग तथा गैस के कारण होने वाले सीने में दर्द में लाभ होता है।
- लंबी यात्रा आदि में कई बार पेशाब को रोकने के कारण पेट में गैस हो जाती है। ऐसी स्थिति में आधा से एक ग्राम इलायची चूर्ण को कांजी के साथ पीने से पेट की गैस में लाभ होता है।
- सोने के पहले एक पका केला तथा एक इलायची का सेवन करने से अपच, एसिडिटी, कब्ज आदि और खून की उल्टी आदि में लाभ होता है।
- 500 मिग्रा इलायची चूर्ण में मधु तथा मिश्री मिलाकर सेवन करने से वात, पित्त और कफ में से किसी के भी कारण होने वाली उल्टी बंद होती है।
- इलायची, धान का लावा, लौंग, नागकेशर, पिप्पली, प्रियंगु, बदर मज्जा, नागरमोथा तथा सफेद चंदन को मिलाकर चूर्ण बना लें। इसकी 1-2 ग्राम में मिश्री तथा शहद मिलाकर सेवन करने से हर प्रकार की उल्टी बंद होती है।
- जीरा बीज के 10-15 मिली काढ़े में 500 मिग्रा इलायची बीज का चूर्ण मिलाकर सेवन करने से पित्त की अधिकता यानी एसिडिटी के कारण आने वाले चक्कर, उल्टी आदि समाप्त होते हैं।
- इलायची को पानी में उबालकर उस पानी को 10-15 मिली मात्रा में सेवन करने से पेचिश, लूज मोशन, तथा पेशाब की समस्या में लाभ होता है।
- आँवला का रस, केला का रस अथवा मीठे नीम के रस में मधु तथा आधा से एक ग्राम इलायची चूर्ण मिला लें। इसका सेवन करने से कफ के कारण होने वाली पेशाब की जलन में लाभ होता है।
- 1/2-1 ग्राम इलायची चूर्ण को गोमूत्र, शराब अथवा केले के रस के साथ सेवन करने से कफ के कारण होने वाली पेशाब की समस्या में लाभ होता है।
- 20-25 मिली एलादि काढ़ा में 1-2 ग्राम शिलाजीत मिलाकर पीने से पथरी के कारण होने वाली पेशाब की समस्या में लाभ होता है।
- 20-25 मिली आमलकी रस में एक ग्राम छोटी इलायची के बीजों का चूर्ण मिला लें। इसे पीने से पेशाब बंद होने अथवा पेशाब करने में जलन होने में लाभ होता है।
- इलायची, पाषाणभेद, शिलाजीत एवं पिप्पली से बने चूर्ण (1-2 ग्राम) को गुड़ तथा चावल के पानी यानी चावल को धोने से निकले पानी के साथ सेवन करें। इससे पेशाब में दर्द की समस्या ठीक होती है।
- 125 मिग्रा इलायची बीज चूर्ण को दूध में उबालकर, मधु मिला लें। इसे रोजाना सोने से पहले सेवन करने से नपुंसकता तथा शीघ्रपतन रोग में लाभ होता है।
- इलायची, कूठ, तगर आदि के बारीक चूर्ण में नमक तथा तेल मिलाकर घाव के मुख पर रगड़ देने से खून ठीक से बहने लगता है।
- रात में सोने के पहले छोटी इलायची के बीज चूर्ण को सूंघने से मिर्गी, मानसिक अवसाद तथा याद्दाश्त की कमी में लाभ होता है।
- मुँह के छालों से परेशान है तो इलायची मुँह में रखकर चूसे।
- बड़ी इलायची को पीसकर ललाट पर लेप करने से एवं बीजों को पीसकर सूंघने से सिरदर्द ठीक होता है।
- बड़ी इलायची को पीसकर शहद में मिलाकर मुँह के छालों पर लगाने से मुंह के छाले ठीक होते हैं।
- बड़ी इलायची और लौंग तेल को बराबर-बराबर मात्रा में लेें। इसे दांतों पर मलने से दांत का दर्द ठीक होता है।4-5 बड़ी इलायची के फल को 400 मिली पानी में उबाल लें। इस काढ़ा से कुल्ला करने से दांत दर्द ठीक होता है।2-3 बड़ी इलायची के छिलकों को पीसकर खाने से दांत की बीमारियों तथा मुँह के सूजन में लाभ होता है।
- बीज के काढ़े का कुल्ला एवं गरारा करने से दांत और मसूड़ों की तकलीफ ठीक होती है।
- बड़ी इलायची और सुपारी को बराबर-बराबर पीसकर मिला लें। इसे 1-2 ग्राम मात्रा में लेकर चूसते रहने से थूक कम बनता है और लार का बहना बंद हो जाता है।
- 5-10 बूंद बड़ी इलायची तेल में मिश्री मिलाकर नियमित सेवन करने से सांसों के रोग में लाभ होता है।
- एक कप पानी में दो बड़ी इलायची पीसकर उबालें। आधा बच जाने पर छानकर ठंडा होने दें। इसे पिलाने से हिचकी में तुरंत लाभ होता है।
- दो ग्राम सौंफ के साथ बड़ी इलायची के 8-10 बीजों का सेवन करने से पाचन-शक्ति बढ़ती है।
- अधिक केले खाने पर यदि अजीर्ण हो जाए तो 1-2 बड़ी इलायची खाने से पाचन ठीक हो जाता है।
- बड़ी इलायची बीज के चूर्ण और सोंठ के चूर्ण को समान मात्रा में मिला लें। इसे 5 ग्राम मात्रा में सेवन करने से पाचन शक्ति बढ़ती है।
- एक ग्राम बड़ी इलायची बीज चूर्ण में 4 ग्राम मिश्री मिलाकर 1 ग्राम सुबह और शाम सेवन करने से गर्भवती स्त्री को भूख ना लगने की परेशानी में लाभ होता है।
- बड़ी इलायची के 5 ग्राम बीज चूर्ण को काले नमक के साथ सेवन करने से पेट दर्द और पेट की गैस में लाभ होता है।
- 0.5-1 ग्राम बड़ी एला चूर्ण को 15-25 मिली कांजी के सेवन करने से पेशाब बंद होने से होने वाले गैस में लाभ होता है।
- 5 ग्राम बड़ी इलायची चूर्ण को शहद के साथ मिलाकर खाने से पेट दर्द में लाभ होता है।
- 1-2 बड़ी इलायची के चूर्ण को दिन में तीन बार नियमित सेवन करने से पेट के दर्द में आराम होता है।
- बड़ी इलायची और पुदीना को बराबर-बराबर मिला लें। इसे 2-3 लीटर पानी में उबालकर थोड़ा-थोड़ा सेवन करने से उल्टी बंद होती है।
- 5 ग्राम बड़ी इलायची के बीज चूर्ण का सेवन करने से उल्टी रुकती है।
- एक ग्राम बड़ी इलायची बीज चूर्ण को 10 ग्राम बेलगिरी के साथ मिलाकर सुबह और शाम सेवन करने से पेचिश में लाभ होता है।
- 5-10 बूंद बड़ी इलायची के अर्क का सेवन करने से हैजा और पेचिश में लाभ होता है।
- पिसी हुई राई के साथ बड़ी इलायची चूर्ण मिला लें। इसे 2-3 ग्राम की मात्रा में नियमित सेवन करने से लीवर की समस्या में लाभ होता है।
- 1-2 ग्राम बड़ी इलायची चूर्ण का नियमित सेवन करने से लीवर विकार ठीक होते हैं।
- बड़ी इलायची के बीज के चूर्ण में समान भाग मिश्री मिला लें। इसे 2-3 ग्राम की मात्रा में रोज सुबह और शाम सेवन करने से पेशाब खुल कर आने लगता है।
- 10 नग छिलकों सहित बड़ी इलायची को लेकर मोटा-मोटा कूट कर 250 मि.ली. दूध और 250 मि.ली. जल के साथ पकाएं। आधा बचने पर छानकर उसमें थोड़ी मिश्री मिलाकर दिन में चार बार पिलाएं। इससे पेशाब की जलन व पेशाब ना आने की समस्या दूर होती है।
- बड़ी इलायची के बीज के चूर्ण में खरबूजों के बीज का मगज और मिश्री मिला लें। इसे 2-3 ग्राम की मात्रा में सेवन करने से पथरी टूट-टूट कर निकल जाती है।
- बड़ी इलायची के बीज के चूर्ण, सफेद मूसली और मिश्री को मिलाकर 2-3 ग्राम की मात्रा में नियमित सुबह और शाम सेवन करने से नपुंसकता में लाभ होता है।
- आँवले के 20 मि.ली. रस में एक ग्राम बड़ी इलायची के दाने और इसबगोल बराबर मात्रा में मिला लें। इसे 1-1 चम्मच सुबह-शाम सेवन करें। इसे स्वप्नदोष में लाभ होता है।
- बड़ी इलायची, चित्रक मूल, कुंदरू, अडूसा की पत्ती, निशोथ, मदार की पत्ती लें। इनमें सोंठ मिलाकर सभी का चूर्ण बना लें और इसके साथ पलाश क्षार को गोमूत्र में घोल लें। आठ दिनों तक पलाश क्षार भिगो कर छाया में सुखाते रहें।सभी का लेप बना लें। इस लेप को शरीर पर लगाकर तब तक धूप में बैठें, जब तक यह सूख न जाए। सूखने के बाद स्नान कर लें। इससे कुष्ठ रोग में लाभ होता है।
- बड़ी इलायची, जायफल तथा नीले थोथे के चूर्ण को गाय के घी में पीसकर लेप लगाने से त्वचा का फोड़ा ठीक होता है।
- बड़ी इलायची के बीज 2 भाग तथा बेल के जड़ की छाल एक भाग को मिलाकर मोटा-मोटा कूटकर चूर्ण बना लें। एक चम्मच चूर्ण को एक कप दूध और पानी में मिलाकर पकाएं। केवल दूध बच जाने पर 20 मि.ली. की मात्रा में सुबह, दोपहर तथा शाम सेवन करने से बुखार ठीक होता है।

Comments
Post a Comment