सौंफ(fennel seeds)

      छोटा सा दिखने वाला सौंफ बहुत ही गुणकारी होता है| सौंफ एक औषधि है, वात तथा पित्त को शांत करता है, भूख बढ़ाता है, भोजन को पचाता है, वीर्य की वृद्धि करता है। 


सौंफ के उपयोग

  1.   1-2 ग्राम सौंफ की जड़ के चूर्ण का सेवन करने से कब्ज में लाभ होता है।
  2. सौंफ के बीज का काढ़ा बना लें। इसे 5-10 मिली मात्रा में भोजन के प्रत्येक ग्रास के साथ छोटे बच्चों को पिलाने से बच्चों का कब्ज ठीक होता है
  3. सौंफ को पानी के साथ पीसकर ललाट पर लगाने से सिरदर्द से आराम मिलती है। सौंफ खाने से सिरदर्द से आराम मिलता है।
  4. सौंफ के पत्ते के रस में रूई को भिगोकर आँखों पर रखें। इससे आँखों की जलन, दर्द तथा लालिमा की परेशानी ठीक होती है।
  5. 1-2 ग्राम सौंफ चूर्ण में 65 मि.ग्रा. खसखस यानी पोस्त के दानों का चूर्ण मिला लें। इसे नियमित सेवन करने से आँखों के रोग ठीक होते हैं तथा आँखों की रोशनी बढ़ती है। सौंफ खाने से आँख के रोग में फायदा मिलता है।
  6. 2-4 ग्राम सौंफ चूर्ण में बराबर भाग खाँड मिलाकर सेवन करें। इससे मानसिक रोग तथा गाय के दूध के साथ सेवन करने से आँख के रोग ठीक होते हैं।
  7. 15-30 मिली सौंफ के काढ़ा या सौंफ का पानी पीने से जुकाम में लाभ होता है। 
  8. अंजीर के साथ सौंफ का सेवन करने से सूखी खाँसी, गले की सूजन से राहत जल्दी मिलती है।
  9.  अंजीर के साथ सौंफ का सेवन करने से सूखी खाँसी, गले की सूजन से राहत जल्दी मिलती है। 
  10. सौंफ का काढ़ा बनाकर उसमें फिटकरी मिलाकर गरारा करने से मुँह के छालों में लाभ होता है। सौंफ में बराबर मिश्री मिलाकर सेवन करने से मुँह से बदबू आने की परेशानी ठीक होती है।
  11. 15-30 मिली सौंफ काढ़ा में मिश्री तथा गाय का दूध मिलाकर पिएं। इससे हकलाना की परेशानी कम होती है।
  12. अंजीर के साथ सौंफ का सेवन करने से सूखी खाँसी, गले की सूजन तथा लंग कैंसर में लाभ होता है। 5 मिली सौंफ के पत्तों के स्वरस का सेवन करने से अस्थमा में लाभ होता है।
  13. बराबर-बराबर भाग में सौंफ बिडंग, बनायं तथा काली मिर्च का चूर्ण लें। इसे 2-5 ग्राम की मात्रा में गुनगुने जल के साथ सेवन करने से भूख बढ़ती है।
  14. 1-2 ग्राम सौंफ  की जड़ के चूर्ण का सेवन करने से कब्ज में लाभ होता है।
  15. सौंफ के बीज के काढ़ा को 5-10 मिली मात्रा में भोजन के प्रत्येक ग्रास के साथ छोटे बच्चों को पिलाने से बच्चों का कब्ज ठीक होता है।
  16. बराबर-बराबर भाग में बेल, नागरमोथा, सौंफ तथा स्थलपद्म के काढ़ा (10-30 मिली) में मिश्री मिलाएं। इसे पीने से आँवयुक्त पेचिश और खूनी पेचिश में लाभ होता है।
  17. गेहूँ के आटे में सौंफ मिलाकर उसकी बाटियाँ बनाकर अंगारों पर सेंकें। पकने के बाद उसे कूटकर मिश्री तथा घी मिलाकर सेवन करने से आँवयुक्त पेचिश के दर्द में आराम मिलता है।
  18. चार भाग सौंफ चूर्ण में एक भाग इलायची चूर्ण तथा पाँच भाग मिश्री चूर्ण मिला लें। इसे  उपयुक्त मात्रा में सेवन करने से पेचिश में शीघ्र लाभ होता है।
  19. सौंफ बीज काढ़ा 25-50 मिली में मधु मिलाकर नियमित भोजनोपरांत सेवन करें। इससे अपच, एसिडिटी, गैस, कब्ज, प्यास, बुखार तथा पेशाब की कमी आदि रोग ठीक होते हैं।
  20. 3-6 ग्राम बीजों को चबाने से या बीज चूर्ण का सेवन करने से पेट में मरोड़, उल्टी, पेट के कीड़े की परेशानी आदि में लाभ होता है।
  21. 2 ग्राम भुनी हुई सौंफ में 2 ग्राम बिना भुनी सौंफ तथा 4 ग्राम मिश्री मिलाकर सेवन करने से पेचिश ठीक होता है।
  22. 5-10 मिली सौंफ के पत्तों के रस का सेवन करने से पेचिश में लाभ होता है।
  23. सौंफ के पत्तों का रस 5 मिली का सेवन करने से मूत्राशय की सूजन ठीक होती है।
  24. सौंफ के फलों को पीसकर शर्बत बनाकर पीने से पेशाब की जलन शांत होती है।
  25. सौंफ के बीज के 10-20 मिली काढ़ा में मधु मिलाएं। इसे नियमित सेवन करने से मासिक धर्म विकार जैसे- समय पर मासिक धर्म का ना आना, मासिक धर्म के समय दर्द होना और बांझपन आदि में लाभ होता है।
  26. सौंफ के पत्तों के 5 मिली रस को 100 मिली दूध में मिलाकर पीने से स्तनपान कराने वाली महिलाओं में दूध की वृद्धि होती है।
  27. सौंफ वच, सहिजन, गोक्षुर, वरुण, सहदेवी, वर्षाभू, शटी, गंधप्रसारिणी, अग्निमंथ फल तथा हींग की बराबर मात्रा लें। इसे कांजी से पीसकर, थोड़ा गरम करके लेप करें। इससे गठिया रोग में दर्द और सूजन दोनों ही ठीक होते हैं।
  28. सौंफ को पीसकर मुंह पर लगाने से मुँहासे ठीक होते हैं, चेहरे की चमक बढ़ती है और रंग निखरता है। सौंफ त्वचा के लिए बहुत फायदेमंद होता है।
  29. 15-30 मिली सौंफ काढ़ा में मिश्री मिलाकर पीने से पागलपन या मैनिया रोग में लाभ होता है।
  30. 5-10 ग्राम सौंफ को पीसकर उसमें इतना ही खाँड मिला लें। इसे पिलाने से पित्त के कारण होने वाले मैनिया रोग में लाभ होता है।
  31. सौंफ, वच, कूठ, देवदारु, रेणुका, धनिया, खस तथा नागरमोथा को बराबर मात्रा में लेकर उसका काढ़ा बना लें। इसमें मधु तथा मिश्री मिला लें। इसे 25-50 मिली की मात्रा में सुबह और शाम पीने से वात दोष के कारण होने वाला बुखार ठीक हो जाता है।
  32. 5-10 मिली सौंफ पत्तों के रस को पीने से पूरे शरीर का दर्द ठीक होता है।
  33. 10-30 मिली सौंफ काढ़ा में नमक मिलाकर पीने से अधिक नींद आने की परेशानी ठीक होती है।
  34. 10-30 मिली सौंफ के काढ़ा में 100 मिली गाय का दूध तथा घी मिलाकर पिलाने से नींद अच्छी आती है।
  35. 6-12 ग्राम शतपुष्पादि घी को गुनगुने दूध अथवा जल के साथ सेवन करें। इससे वात, पित्त, मेद, मूत्र रोग में फायदा होता है। इसके साथ ही मोटापा, फाइलेरिया (हाथीपाँव) तथा लीवर और तिल्ली की वृद्धि जैसी बीमारी में लाभ होता है।
  36. शतपुष्पादि काढ़ा में काला नमक मिलाकर बालकों को पिलाने से बाल रोगों में लाभ होता है।
  37. सौंफ में बल्य गुण पाया जाता है जो शरीर, मस्तिष्क एवं मस्तिष्क की नसों को बल प्रदान करता है जो कि याददाश्त को बढ़ाने में भी मदद करता है।
  38. सौंफ पाचन को स्वस्थ करती है साथ ही कोलेस्ट्रॉल को काम करने में भी सहयोग देती है।   
  39. सौंफ की चाय ह्रदय को स्वस्थ रखने में सहयोगी होती है।  

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