मखाना (Fox Nut)

     तालाबझील, दलदली क्षेत्र के शांत पानी में उगने वाला मखाना पोषक तत्वों से भरपूर एक जलीय उत्पाद है। मखाने के बीज को भूनकर इसका उपयोग मिठाई, नमकीन, खीर आदि बनाने में होता है। मखाने में 9.7% आसानी से पचनेवाला प्रोटीन, 76% कार्बोहाईड्रेट, 12.8% नमी, 0.1% वसा, 0.5% खनिज लवण, 0.9% फॉस्फोरस एवं प्रति १०० ग्राम 1.4 मिलीग्राम लौह पदार्थ मौजूद होता है। इसमें औषधीय गुण भी होता है।बिहार के दरभंगामधुबनीसमस्तीपुरसहरसासुपौलसीतामढ़ीपूर्णियाकटिहार आदि जिलों में मखाना का सार्वाधिक उत्पादन होता है। मखाना के कुल उत्पादन का ८८% बिहार में होता है।

मखाने का उपयोग

  1. मखाने की शर्करा रहित खीर बनाएं। इसमें सालम मिश्री का चूर्ण डालकर खिलाएं। इससे डायबिटीज में लाभ मिलता है।
  2. मखाना के पत्तों को 10-15 मिली पानी में डालकर काढ़ा बना लें। इसे पीने से प्रसव के बाद होने वाले दर्द से राहत मिलती है।
  3. मखाना के बीजों को पानी में उबालकर काढ़ा जैसा बना लें। इस काढ़ा को एक या दो बूंद कान में डालें। इससे कान दर्द कम होता है।
  4. मखाना पेड़ के पत्तों को पीसकर दर्द वाले जगह पर लगाएं। इससे आराम मिलता है।
  5. मखाने को दूध में मिलाकर पीने से शरीर के भिन्न-भिन्न अंगों, जैसे- पैर या पैर के तलवे आदि में जलन की परेशानी में आराम मिलता है।
  6. मखाना के बीजों का सेवन करने से शारीरिक कमजोरी दूर होती है।
  7. नींद न आने का कारण शरीर में वात दोष का प्रकुपित होना है।मखाना अपने गुण और वातशामक स्वभाव के कारण नींद लाने में सहयोग करते हैं।
  8. मखानों में शीत गुण होता है जो कि शरीर की गर्मी को शांत कर राहत दिलाता है।
  9. मखानों का प्रयोग मसूढ़ों से होने वाली ब्लीडिंग और सूजन को दूर करने में कर सकते है क्योंकि मखानों में कषाय और शीत का गुण पाया जाता है जो कि खून को आने से रोकता है।


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