अरारोट (Arrowroot)
आयुर्वेद के अनुसार अरारोट सही पोषणकर्ता, शान्तिदायक, सुपाच्य, स्नेहजनक, सौम्य, विबन्ध (कब्ज) नाशक, दस्तावर होता है। पित्तजन्य रोग, आंखों के रोग, जलन, सिरदर्द, खूनी बवासीर और रक्तपिक्त आदि रोगों मे सेवन किया जाता है। कमजोर रोगियों और बालकों के लिए यह काफी लाभदायक है यह आंत्र और मूत्राशय सम्बन्धी रोगों के बाद की कमजोरी में यह आराम पहुंचाता है।
अरारूट निकालने की विधि :
कंदिल जड़ों को निकालकर अच्छी तरह धोने के पश्चात् उनका छिलका निकाल दिया जाता है। फिर उन्हें अच्छी तरह पीसकर दूधिया लुगदी बना ली जाती है। तब लुगदी को अच्छी तरह धोया जाता है, जिससे जड़ का रेशेदार भाग अलग हो जाता है। यह फेंक दिया जाता है। बचे हुए दूधिया भाग को, जिसमें मुख्यतया स्टार्च रहता है, महीन चलनी या मोटे कपड़े पर डालकर उसमें का पानी निकाल दिया जाता है। बचा हुआ सफेद भाग स्टार्च होता है जिसे पानी से फिर भली-भाँति धो तथा सुखाकर अंत में पीस लिया जाता है। इसी रूप में अरारूट बाजार में बिकता है।

अरारोट के औषधीय गुण
- 1-2 ग्राम अरारोट के चूर्ण में 200 मिली जल मिलाकर पकाएं। इसमें 250 मिली दूध और 50 ग्राम मिश्री डालकर फिर पकाएं। जब केवल दूध बाकी रह जाए तो उतार लें। इसे गुनगुना होने पर सेवन करें। इससे सिर दर्द, खूनी बवासीर से आराम मिलता है।
- अरारोट के महीन चूर्ण को गुलाबजल में मिलाकर खुजली वाले जगह पर लगाएं। इससे खुजली की बीमारी ठीक होती है।
- 1 चम्मच अरारोट प्रकंद के चूर्ण में दो चम्मच दूध मिला लें। इसे 500 मिली जल के साथ पकाएं। इसमें 250 मिली दूध और थोड़ी शक्कर डालकर फिर पकाएं। आधा पानी जल जाने पर उतारकर ठंडा करके 125 मिग्रा जायफल का चूर्ण मिला लें। इसका सेवन करने से दस्त पर रोक लगता है।
- 1-2 ग्राम अरारोट के चूर्ण को 200 मिली पानी में पकाकर ठंडा कर लें। इसमें मिश्री मिलाकर पीने से पेशाब में जलन, और पेशाब रुक-रुक कर आने की समस्या में लाभ होता है।
- अरारोट प्रकंद को पीसकर त्वचा में लगाने से विसर्प रोग में लाभ होता है।
- अरारोट को थोड़े से जल में घोलकर गुनगुना कर लें। इसे घाव पर लेप के रूप में लगाएं। इससे पस वाले घाव और दुर्गन्ध वाले घाव ठीक होते हैं।
- अरारोट के महीन चूर्ण को गुलाबजल में मिलाकर चेहरे पर लगाएं। इससे चेहरे की झाई और फोड़े-फुन्सी ठीक होते हैं।
- 1 चम्मच अरारोट प्रकंद के चूर्ण में दो चम्मच दूध मिला लें। इसे 500 मिली जल के साथ पकाएं। इसमें 250 मिली दूध और थोड़ी शक्कर डालकर फिर से पकाएं। जब आधा पानी जल जाए तो उतारकर ठंडा कर लें। इसमें 125 मिग्रा जायफल का चूर्ण मिलाकर सेवन करने से पेचिश रोग, बदहजमी आदि पेट के रोगों में लाभ होता है।
- 1-2 ग्राम अरारोट के चूर्ण में 200 मिली जल मिलाकर पकाएं। इसके बाद इसमें 250 मिली दूध और 50 ग्राम मिश्री डालें, और फिर से पकाएं। केवल दूध रहने पर गुनगुना ही सेवन करें। इससे पित्तज-विकार, शरीर की जलन में लाभ होता है।
- 1-2 ग्राम प्रकंद के चूर्ण को शहद के साथ सेवन करें। इससे शारीरिक कमजोरी दूर होती है। इसके सेवन से शरीर स्वस्थ होता है।
- अरारोट के चूर्ण से मालिश करने से अधिक पसीने की समस्या में लाभ होता है।
- 1-2 ग्राम अरारोट के चूर्ण में 200 मिली जल मिलाकर पकाएं। इसमें 250 मिली दूध और 50 ग्राम मिश्री डालकर पकाएं। दूध केवल शेष रहने पर गुनगुना अवस्था में सेवन करें। इससे आंखों के रोग में लाभ होता है।
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