गुलाब (Rose)
गुलाब का फूल कोमलता और सुंदरता के लिये प्रसिद्ध है। गुलाब की कलम ही लगाई जाती है। इसके फूल कई रंगों के होते हैं, लाल (कई मेल के हलके गहरे) पीले, सफेद इत्यादि। सफेद फूल के गुलाब को सेवती कहते हैं। कहीं कहीं हरे और काले रंग के भी फूल होते हैं। ऋतु के अनुसार गुलाब के दो भेद भारतबर्ष में माने जाने हैं सदागुलाब और चैती। सदागुलाब प्रत्येक ऋतु में फूलता और चैती गुलाब केवल बसंत ऋतु में। चैती गुलाब में विशेष सुगंध होती है और वही इत्र और दवा के काम का समझ जाता है। इसका आँख, कान, तरह-तरह के चर्म रोग, बुखार के इलाज में आम तौर पर इस्तेमाल किया हाता है। गुलाब देखने में सुंदर होने के बावजूद, विशेष रूप से बिच्छु और साँप के विष के प्रभाव को कम करने में असरदार तरीके से काम करता है।

गुलाब के उपयोग
- गुलाब के फूलों का हिम बनाकर गरारा करने से मुँह के सूजन, सांस की बदबू, तथा गले के दर्द के इलाज में मदद मिलती है। इसके अलावा गुलाब के पत्तों को चबाने से भी मुँह और होंठों की सूजन कम होती है।
- गुलाब के पत्तों को पीसकर लेप करने से सिर में होने वाले घाव, नेत्राभिष्यन्द या केटेरेक्ट (मोतियाबिंद) , दंतरोग तथा अर्श या पाइल्स में लाभ पहुँचाता है।
- गुलाब के फूलों को पीसकर लगाने से पलकों की सूजन कम होने लगती है। इसके अलावा दांत पर मलने से दांत संबंधी रोगों से निजात पाने में मदद मिलती है।
- गुलाब के अर्क को 2-2 बूंद आंखों में डालने से आँखों के बीमारी से राहत दिलाने में बहुत फायदेमंद होता है।
- 2-4 ग्राम गुलाब फूल के चूर्ण को शहद के साथ सेवन करने से कब्ज, उदावर्त तथा अतिसार या दस्त में लाभ होता है।
- गुलाब के फूलों के तेल में पकाकर, छानकर, तेल को गुदा पर लगाने से गुदा की सूजन कम हो जाती है।
- गुलाब के फूलों को पीसकर योनि में लगाने से प्रदर में लाभ होता है तथा फूल और जड़ो को पीसकर व्रण या घाव पर लगाने से घाव जल्दी भर जाता है।
- सफेद गुलाब के पुष्पों को पीसकर लगाने से कुष्ठ तथा अन्य पित्तज विकार नष्ट होते हैं।
- गुलाब के फूलों को सुखाकर चूर्ण या पाउडर की तरह बनाकर चेचक से पीड़ित व्यक्ति के बिस्तर पर डालने से चेचक के व्रण या घाव जल्दी सूख जाते हैं।
- गुलाब के फलों को पीसकर घाव के ऊपर डालने से घाव से बहता हुआ खून कम होने लगता है और घाव जल्दी सूखने लगता है।
- अगर बुखार कम होने का नाम नहीं ले रहा है तो गुलाब से बने गुलकन्द का सेवन करने से पित्त ज्वर में लाभ होता है।
- 15-25 ग्राम गुलकन्द में 2 ग्राम सौंफ चूर्ण तथा 10 मिली सिरका मिलाकर सुबह शाम दो बार खिलाने से शीतपित्त में लाभ होता है।
- लाल गुलाब के फूलों को पीसकर दंश स्थान पर लगाने से वृश्चिक दंश जन्य वेदना तथा सूजन से राहत मिलती है।
- गुलाब की जड़ को पीसकर सर्पदंश स्थान पर लगाने से दंश के कारण होने वाली वेदना (पीड़ा), दाह (जलन) तथा शोथ (सूजन) में लाभ होता है।
- गुलाब की पत्तियों को पीसकर इसके रस को शहद में मिलाकर होंठों पर लगाने से होंठ गुलाबी होते हैं।
- गुलाब की पत्तियों को दूध में भिगोकर रखें। एक घण्टे बाद इसका पेस्ट बना लें। इस पेस्ट को दिन में 2-3 बार होंठों पर लगाएं।
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