मजीठ (Rubia Cordifolia)
मजीठ एक पुष्पित होने वाला औषधीय पादप है। इसकी जड़ों से लाग रंजक निकाला जाता है। यह भारत के पर्वतीय क्षेत्रों में पायी जाती है। इसकी जड़ें जमीन में दूर-दूर तक फैलीं होतीं हैं। इसका प्रयोग कपड़ो को रंगने के काम में किया जाता है, इसलिए इसे वस्त्ररंजिनी भी कहते हैं।
मंजिष्ठा का उपयोग
- मंजिष्ठा की जड़ का काढ़ा बनाकर, उससे बालों को धोने से बालों का झड़ना तथा पकना कम होने लगता है।
- मंजिष्ठा जड़ से बने काढ़े से आंखों को धोने से आँख का जलन और पलकों के रोगों से छुटकारा मिलता है।
- मंजिष्ठा जड़ से बने काढ़ा से गरारा करने से मुँह और दांत संबंधी समस्याओं से राहत मिलती है।
- 1-2 ग्राम मंजिष्ठा के सूखे जड़ तथा भूमिगत तने के चूर्ण का चीनी के साथ उपयोग करने से खाँसी, सांस के नली में सूजन तथा गले के दर्द से राहत मिलती है।
- मंजिष्ठा के जड़ को पीसकर छाती में लेप करने से तथा मंजिष्ठा की जड़ का काढ़ा बनाकर 10-20 मिली मात्रा में पीने से छाती की सूजन आदि रोगों में लाभ होता है।
- 10-20 मिली मंजिष्ठा की जड़ के काढ़े का उपयोग करने से पेट के घाव, अल्सर तथा पेट के दर्द में से छुटकारा दिलाने में मदद करती है।
- मंजीठ के पत्ते एवं तने के काढ़े (10-20 मिली) का सेवन करने से पेट के कीड़ा कम होता है।
- मंजीठ, शिग्रु आदि के काढ़े से घी को पकाकर 5 ग्राम की मात्रा में सेवन करने से रक्तार्श या खूनी बवासीर ठीक होता है।
- 1-2 ग्राम मंजीठ की जड़ का चूर्ण में मधु मिलाकर सेवन करने से पीलिया में लाभ होता है।
- 10-20 मिली मंजीठ के काढ़े का सेवन करने से गुर्दे की पथरी, किडनी में पथरी तथा अन्य मूत्र संबंधी रोगों से राहत मिलती है। इसके अलावा मंजिष्ठा की जड़ का काढ़ा बनाकर 10-20 मिली मात्रा में पीने से मूत्र रोगों से राहत मिलती है व स्पर्म काउन्ट बढ़ता है।
- मंजीठ तथा मुलेठी को अम्ल पदार्थ के साथ पीसकर भग्न स्थान या फ्रैक्चर के स्थान पर लेप करने से उस जगह का घाव और फ्रैक्चर जल्दी ठीक हो जाता है।
- हड्डी टूटने की स्थिति में उस जगह पर अत्यंत पीड़ा का अनुभव होता है एवं कभी कभी सूजन भी महसूस होती है। ऐसे में मंजिष्ठा के उष्ण गुण होने के कारण यह वह पर पीड़ा यानी दर्द में आराम देता है।
- मंजीठ को पीसकर लगाने से आमवातजन्य संधिशूल या जोड़ों में दर्द तथा सूजन कम होता है।
- मंजीठ, मुलेठी, रास्ना, हिंस्रा तथा पुनर्नवा को समान मात्रा में लेकर काञ्जी के साथ पीसकर लेप करने से हाथी पाँव में लाभ होता है।
- मंजिष्ठा को मधु के साथ पीसकर लेप करने से कुष्ठ व त्वचा के दाग धब्बों में लाभ होता है।
- प्रतिदिन मुख पर मंजिष्ठादि तेल की मालिश करने से चेहरे की कांति बढ़ती है।
- मंजीठ के पत्ते तथा जड़ को पीसकर क्षत तथा व्रण पर लेप करने से तथा काढ़े से धोने पर शीघ्र व्रण या घाव ठीक हो जाता है।
- मंजिष्ठा जड़ को पीसकर सूजन वाले स्थान पर लेप करने से सूजन कम होती है।
- मंजीठ की जड़ एवं भौमिक तने का काढ़ा बनाकर 10-20 मिली मात्रा में सेवन करने से (अपस्मार) मिरगी, मानसिक अस्थिरता, अनिद्रा आदि मानसिक विकारों में लाभ होता है।
- आर्द्रक एवं दूध के साथ 1-2 ग्राम मंजीठ की जड़ के चूर्ण का सेवन करने से बीमारी के कारण जो कमजोरी होती है वह कम होती है।
- मंजीठ की जड़ के चूर्ण या काढ़ा आदि का सेवन करने से उच्च-रक्तचाप या हाई ब्लड प्रेशर को नियंत्रण करने में लाभ होता है।


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