लहसून (Garlic)
आयुर्वेद और रसोई दोनों के दृष्टिकोण से लहसुन एक बहुत ही महत्वपूर्ण फसल है। लहसुन में विभिन्न प्रकार के पोषक तत्त्व पाये जाते है जिसमें प्रोटीन 6.3 प्रतिशत , वसा 0.1 प्रतिशत, कार्बोज 21 प्रतिशत, खनिज पदार्थ 1 प्रतिशत, चूना 0.3 प्रतिशत लोहा 1.3 मिलीग्राम प्रति 100 ग्राम होता है। इसके अतिरिक्त विटामिन ए, बी, सी एवं सल्फ्यूरिक एसिड विशेष मात्रा में पाई जाती है। इसमें पाये जाने वाले सल्फर के यौगिक ही इसके तीखे स्वाद और गंध के लिए उत्तरदायी होते हैं। इसमें पाए जाने वाले तत्वों में एक ऐलीसिन भी है जिसे एक अच्छे बैक्टीरिया-रोधक, फफूंद-रोधक एवं एंटी-ऑक्सीडेंट के रूप में जाना जाता है। अगर लहसुन को महीन काटकर बनाया जाये तो उसके खाने से अधिक लाभ मिलता है। यदि रोज नियमित रूप से लहसुन की पाँच कलियाँ खाई जाएँ तो हृदय संबंधी रोग होने की संभावना में कमी आती है। लहसुन, सेलेनियम का भी अच्छा स्रोत होता है। गर्भवती महिलाओं को लहसुन का सेवन नियमित तौर पर करना चाहिये।

लहसून के उपयोग
- लहसुन को तिल तैल में पकाकर, छानकर, तैल को सिर में लगाने से गंजापन में लाभ होता है।
- लहसुन को पीसकर सिर पर लगाने से सिर में होने वाली दाद का शमन होता है।
- लहसुन को पीसकर मस्तक पर लगाने से आधासीसी की वेदना का शमन होता है।
- लहसुन, अदरख, सहिजन, मुरङ्गी, मूली तथा केले के रस को गुनगुना करके, कान में डालने से कान के दर्द का शमन होता है।
- लहसुन को अर्कपत्र में लपेट कर, आग में गर्म कर, फिर लहसुन का रस निकाल कर 1-2 बूंद रस को प्रातकाल कान में डालने से वात तथा पित्तजन्य कर्णस्राव में लाभ होता है।
- सरसों के तैल में लहसुन को पकाकर छानकर, 1-2 बूंद कान में डालने से कर्णशूल का शमन होता है।
- कफ संबंधित बीमारी होने पर छोटे बच्चों के गले में लहसून की माला पहनाकर है।
- लहसून की पेस्ट करके उसका लेप आमवात पर सूज होनेवाली व्याधी पर करते हैं।
- छाती में वेदना हो रही हो तो लहसून का रस की मॉलिश करना चाहिए।
- गजकर्ण जैसे खाज खुजलीवाले त्वचारोग पर लहसून का रस नियमितरूप से मॉलिश करनेपर ठीक होता है।
- किडा काटने पर वेदना और खाज, खुजली होने पर लहसून का रस मले।
- कान में वेदना हो रही हो तो कान में लहसून का रस डालकर मीठा तेल डाले व छाती पर मले तो कफ सूखी खासी ठीक होती है।
- भूख न लगना, अजीर्ण, पेट में वेदना, जंत, ऐसे समय लहसून नित्य सेवन कराये आराम मिलता है।
- चावल खाने पर पेट फुगता है तो लहसूण डालकर पकाये चावल खाने दे।
- हृदय की अतिउत्तेजना कम करके हृदय को आई सूजन लहसन कम करता है।
- लहसुन डालकर उबला दुध देनेपर पुरानी खॉसी दमा, क्षयरोग का नाश होता है।
- लहसून मन की थकान दूर करता है।
- हड्डी टूटने पर लहसन डालकर उबला दूध दिया तो हड्डी जल्दी जुड़ी है।
- लहसून में नैसर्गिक रूप से गंधक होता है। कच्चा लहसून खाया तो उसमें का गंधक उत्सर्जित होकर त्वचा से पसीने के रूप में निकल जाता है।
- हिचकी तथा दमा में लहसुन तथा प्याज का रस नाक में लेने से लाभ होता है।
- लहसुन का सेवन करने से स्तन्य की वृद्धि होती है।
- 5 मिली लहसुन स्वरस को गुनगुने जल के साथ सेवन करने से दमा में लाभ होता है।
- प्रतिदिन प्रात काल लहसुन का रस (5 मिली) पीने से तथा भोजन में दूध आदि का सेवन करने से योनिरोगों का शमन होता है।
- लहसुन कल्क (1-2 ग्राम) को तैल तथा घृत के साथ सेवन करने से अर्दित (मुख का लकवा) रोग में लाभ होता है।
- लहसुन के कल्क (1-2 ग्राम) को तिल तैल तथा सेंधानमक के साथ खाने से सम्पूर्ण वातरोगों तथा विषमज्वर का शमन होता है। 7 दिन तक प्रतिदिन बढ़ाते हुए लहसुन कल्क को दूध, तैल, घी अथवा चावल आदि के साथ खाने से वातजन्य विकार, विषमज्वर, गुल्म, प्लीहा, शूल, शुक्रदोष आदि रोगों का शमन होता है। शीतकाल में अग्नि एवं बल के अनुसार लहसुन का सेवन अन्न निर्मित भोज्य पदार्थों के साथ करना चाहिए।
- उड़द की दाल को लहसुन के साथ पीसकर, सेंधानमक, अदरख कल्क तथा हींग चूर्ण मिलाकर, तिल तैल में उसका वटक छान कर खाने से गर्दन का जकड़ना में लाभ होता है।
- प्रतिदिन प्रात काल लहसुन (1-2 ग्राम) कल्क में सेंधानमक तथा तिल तैल मिलाकर खाने से हनुग्रह (गर्दन का जकड़ना) में लाभ होता है।
- लहसुन, सोंठ तथा र्निगुण्डी के क्वाथ (10-15 मिली) का सेवन करने से आम का पाचन होकर आमवात में लाभ होता है।
- जल के अनुपान से 2-4 ग्राम रसोन कल्क का सेवन करने से आमवात (लकवा) सर्वांगवात, एकांगवात, अपस्मार, मंदाग्नि, विष, उन्माद (पागलपन), भग्न, शूल (दर्द) आदि रोगों में लाभ होता है।
- रसोन स्वरस में लवण मिलाकर लेप करने से स्नायुशूल तथा मोच में लाभ होता है।
- लहसुन को तैल में पकाकर, छानकर मालिश करने से वात विकारों का शमन होता है।
- लहसुन के 5 मिली स्वरस में 5 मिली घृत मिलाकर पिलाने से आमवात में लाभ होता है।
- व्रण में कृमि पड़ गए हों तो लहसुन के सूक्ष्म कल्क को व्रण (घाव) पर लेप करने से कृमि नष्ट होते हैं।
- लहसुन को पीसकर लगाने से पिडका (फून्सी) तथा विद्रधि का शमन होता है।
- लहसुन को पीसकर व्रण, शोथ, विद्रधि तथा फून्सियों में लगाने से लाभ होता है।
- लहसुन को राई के तैल में पकाकर छानकर तैल की मालिश करने से त्वचा-विकारों का शमन होता है।
- भोजन से पूर्व लहसुन कल्क में तिल तैल मिलाकर खाने के पश्चात्, मेदवर्धक आहार का सेवन करने से विषमज्वर (मलेरिया) में लाभ होता है।
- प्रतिदिन प्रातकाल 1-2 ग्राम लहसुन कल्क में घी मिला कर सेवन करने से वातविकारों का शमन होता है।
- एक वर्ष तक प्रतिदिन 1 ग्राम लहसुन में 5 ग्राम घी तथा थोड़ा मधु मिलाकर, खाकर, अनुपान में दूध पीने से शरीर सम्पूर्ण रोगों से मुक्त होकर दीर्घायु होता है। इस अवधि में आहार में चावल तथा दूध का प्रयोग करना चाहिए।
- समभाग लहसुन कल्क एवं घी को मिलाकर, दस दिन तक रखकर सेवन करने से रसायन गुण की प्राप्ति तथा व्याधियों का शमन होता है।
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