गेंदा (Marigold)
गेंदा बहुत ही उपयोगी एवं आसानी से उगाया जाने वाला फूलों का पौधा है। यह मुख्य रूप से सजावटी फसल है। यह जितना खूबसूरत होता है उतना ही यह आपके शरीर के लिए फायदेमंद भी होता है। आयुर्वेद के अनुसार, गेंदा के कई सारे औषधीय गुण हैं, और यह एक जड़ी-बूटी भी है। आप मोच आने पर, सूजन की समस्या और घाव में गेंदा के इस्तेमाल से फायदे मिलते हैं। इसके अलावा आप, डायबिटीज, सुजाक और मूत्र रोग में भी गेंदा के औषधीय गुण से लाभ मिलता है। इतना ही नहीं आंखों की बीमारी, नाक से खून बहने पर और कान दर्द सहित सांसों से संबंधित बीमारियों में गेंदा के औषधीय गुण के फायदा मिलता है। खांसी, हाथों-पैरों की त्वचा का फटने और चोट आने पर भी गेंदा से लाभ ले सकते हैं।

गेंदा के पौधे के उपयोग
- गेंदे के फूल की कली को पीस लें। इसे आंखों के बाहर चारों तरफ लगाएं। इससे आंखों की बीमारी जैसे आंखों के फूलने आदि में लाभ होता है।
- गेंदा के पत्ते के रस को आंखों के बाहर चारों तरफ लगाने से भी आंखों के रोग में लाभ होता है।
- 1 से 2 बूंद गेंदा के पत्ते के रस को नाक में डालें। इससे नाक से खून बहना बंद हो जाता है।
- गेंदा के पौधे से बने 15-20 मिली शीत-कषाय (ठंडे पानी में रात भर रखा गया रस) का सेवन करने से श्वसन नलि में सूजन होने में लाभ होता है।
- 2-2 बूंद गेंदा के पत्ते के रस को कान में डालने से कान का दर्द ठीक होता है।
- । गेंदे के फूल के बीजों की घुंडी (पुष्पधार Receptacle) का चूर्ण बना लें। 2-5 ग्राम चूर्ण में, 10 ग्राम शक्कर और एक चम्मच दही मिलाकर दिन में 3 बार सेवन करें। इससे खांसी और सांसों के रोग में लाभ होता है।
- महिलाएं स्तनों की सूजन की समस्या में गेंदा का उपयोग कर सकते हैं। गेंदे के पत्तों को पीसकर स्तनों पर लगाएं। इसके साथ ही इससे सिकाई करने से स्तनों की सूजन कम होती है।
- 10 ग्राम गेंदे के पत्ते और 2 ग्राम काली मिर्च को एक साथ पीस लें। इसे पीने से बवासीर में लाभ होता है।
- 5-10 ग्राम गेंदा के फूल को घी में भूनकर दिन में तीन बार लें। इससे बवासीर में होने वाले रक्तस्राव या खूनी बवासीर में फायदा मिलता है।
- गेंदे के पत्तों का अर्क निकालकर पिएं। इससे बवासीर में बहने वाला रक्त तुरन्त बंद हो जाता है। आप अर्क निकालने के लिए 250 ग्राम गेंदे के पत्ते और केले की दो किलो जड़ लें। इनको रात में पानी में भिगो दें और सुबह अर्क निकाल लें। इस अर्क को 15-20 मिली की मात्रा में सेवन करें।
- 5-10 ग्राम गेंदा के फूल के रस को दिन में दो तीन बार सेवन करने से खूनी बवासीर में लाभ होता है।
- 10 ग्राम गेंदे के पत्ते और 2 ग्राम काली मिर्च लें। दोनों को एक साथ पीसकर पिएं। इससे सूजाक में लाभ होता है।
- गेंदे के पंचांग का रस निकालकर चोट-मोच और सूजन वाले स्थान पर लगाने से आराम मिलता है।
- गेंदे के पत्ते के रस को लगाने से घाव और घाव से होने वाला रक्तस्राव बंद हो जाता है।
- गेंदे के पत्तों का रस वैसलीन में मिलाकर हाथों-पैरों पर मलें। इससे बिवाई और हाथों-पैरों की खुश्की दूर होती है।
- गेंदे के पत्तों को पीसकर फोड़े-फून्सी और घाव पर लगाने से आराम होता है। बवासीर के मस्सों पर भी लगाने से आराम मिलता है।
- गेंदा के पत्ते को पीसकर गुनगुना करके लेप करें। इससे फोड़े-फुन्सी या डायबिटीज की अवस्था में होने वाले फोड़े-फुन्सी में लाभ होता है।
- गेंदे के 10 ग्राम पत्तों के रस में मिश्री मिलाकर दिन में तीन बार पिएँ। ने से रुका हुआ पेशाब खुलकर आ जाता है।
- 5-10 ग्राम गेंदा के फूल को घी में भूनकर दिन में तीन बार दें। इससे मासिक धर्म में अधिक रक्तस्राव या बवासीर के दौरान रक्तस्राव की समस्या में फायदा होता है।
- गेंदा के पत्ते को पीसकर ततैया के डंक वाले स्थान पर लगाएं। इससे डंक के कारण होने वाला दर्द आदि दुष्प्रभाव कम हो जाता है।
- 20-30 मिली गेंदा के पत्ते के काढ़ा को दिन में दो बार कुछ दिनों तक सेवन करें। इससे पथरी गलकर निकल जाती है। इस काढ़ा से कुल्ला करने से दांतों के दर्द में तुरंत आराम मिलता है।
- इसका अत्यधिक प्रयोग हानिकारक है। यह कामशक्ति को घटाता है।
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