इमली (tamarind)

     इमली एक आहार है, लेकिन इसका इस्तेमाल एक औषधि के रूप में भी किया जाता है। कच्ची इमली एसिडिटी, वात-पित्त रोग और खून से संबंधित विकार में फायदेमंद होती है तो पकी इमली पाचनतंत्र, कफवात विकार में लाभ पहुंचाती है। इमली के फूल से भी अनेक रोगों का उपचार किया जा सकता है। इमली  के फल लाल से भूरे रंग के होते हैं, तथा स्वाद में बहुत खट्टे होते हैं। इमली का वृक्ष समय के साथ बहुत बड़ा हो सकता है

इमली के उपयोग

  1. 10 ग्राम इमली को एक गिलास पानी में भिगो दें। इसे मसलकर छान लें। इसमें चीनी मिलाकर पीने से पित्तज विकार के कारण होने वाला सिर दर्द ठीक हो जाता है। 
  2. आंखों के नीचे या ऊपर की पुतली के लाल हो जाने को गुहेरी कहते हैं। इसमें इमली के बीज को पानी के साथ घिसकर, चंदन की तरह लगाना चाहिए। इससे आंखों की पलकों पर होने वाली पैंसी या गुहेरी (बिलनी) में तुरंत लाभ होता है।
  3. इमली के फूलों को पीसकर थोड़ा गाढ़ा घोल बना लें। इसे आंखों पर बांधने से आँखों की सूजन ठीक होती है।
  4. इमली के पत्तों का रस और दूध को कांसे के बर्तन में अच्छे से मिलाकर आंखों के आस-पास लेप करें। इससे आँख लाल होने वाली बीमारी, आंखों से पानी बहना और आंखों की जलन ठीक होती है।
  5. इमली के पत्तों के रस के साथ कालीमिर्च के दानों को घिस लें। इसमें थोड़ा घी मिलाकर आँखों में काजल की तरह लगाएं। इससे खुपानी, आंखों की जलन और तिमिर आदि नेत्र रोग ठीक होते हैं।
  6. खून के कमी में इमली का सेवन फायदेमंद हो सकता है क्योंकि इसमें आयरन पाया जाता है जो कि हीमोग्लोबिन को बढ़ा कर खून की कमी को दूर करती है। 
  7. टॉन्सिल की समस्या में इमली के पानी से गरारे करने परआराम मिल सकता है। 
  8. इमली के फल के रस अथवा जम्बीरी नीबू के रस से पकाए हुए तेल को 1-2 बूँद कान में डालने से कान का दर्द ठीक हो जाता है। 
  9. इमली के पत्ते के जूस का सेवन करने से साइनस की शुरुआती अवस्था में लाभ होता है।
  10. इमली को पानी में डालकर, अच्छी तरह मसल कर छान लें। इससे कुल्ला करने से मुंह के रोग जैसे छालों की समस्या में लाभ होता है।
  11. 10 ग्राम इमली को 1 लीटर पानी में उबाल लें। जब यह आधा रह जाए तो उसमें 10 मिली गुलाब पानी मिलाकर छान लें। इससे कुल्ला करने से गले की सूजन ठीक होती है।
  12. इमली  के फल की त्वचा 1 भाग, हल्दी 2 भाग, सर्जरस 3 भाग एवं पुनर्नवा 1 भाग तथा नौ भाग जाति  के पत्ते को पीसकर बत्ती बना लें। इसका धूमपान करने से खांसी में लाभ होता है।
  13. इमली की पत्तियों के रस में, लाल किए हुए लोहे को बुझा लें। इसे छानकर 5-10 मिली की मात्रा में दिन में 3-4 बार लें। इसे कुछ दिनों तक सेवन करने से पेचिश में लाभ होता है।
  14. 25 ग्राम इमली को 500 मिली पानी में मसलकर छान लें। इसमें 50 ग्राम मिश्री, 4 ग्राम दालचीनी, 4 ग्राम लौंग और 4 ग्राम इलायची मिलाकर 4 मिली की मात्रा में पिलाएं। इसके प्रयोग से वात विकारों का शमन होता है।
  15. सीने की जलन होने पर मिश्री के साथ इमली का शर्बत बनाकर पीने से लाभ होता है। 
  16. इमली की छाल को सेंधा नमक के साथ एक मिट्टी के बरतन में रखे। इसमें पानी मिलाकर भस्म बना लें। 125 मिग्रा भस्म में शहद मिलाकर सेवन करने से पाचनतंत्र की बीमारी और पेट दर्द ठीक होते हैं।
  17. इमली के 10-15 ग्राम पत्तों को 400 मिली पानी में पकाएं। जब काढ़ा एक चौथाई रह जाए तो इसे पिएं। इससे दस्त में लाभ होता है।
  18. इमली के पत्तों के 5-10 मिली रस को थोड़ा गर्म करके पिलाने से भी दस्त पर रोक लगती है।
  19. इमली के 15 ग्राम बीज के छिल्के, 6 ग्राम जीरा और मीठा हो जाने लायक ताड़ की चीनी लें। इन तीनों को महीन पीसकर तीन-तीन, चार-चार घण्टे के अंतर पर सेवन करें। इससे दस्त की गंभीर समस्या भी ठीक हो जाती है।
  20.  इसी तरह 3-6 ग्राम इमली बीज मज्जा चूर्ण को पानी के साथ सुबह और शाम सेवन करें। इससे दस्त में लाभ होता है।
  21. इमली के पुराने वृक्ष के जड़ की छाल और काली मिर्च को आधी मात्रा में लें। इसे छाछ के साथ पीसकर, मटर के आकार की गोलियां बना लें। एक से दो गोली को दिन में तीन बार देने से दस्त पर रोक लगती है।
  22.  125 ग्राम इमली के बीजों को 250 मिली दूध में भिगो दें। तीन दिन के बाद छिलके उतारकर, दूध के साथ पीस लें। सुबह-शाम 6 मिली की मात्रा में गाय के दूध या पानी के साथ सेवन करने से सुजाक में लाभ होता है।
  23. बवासीर में 5-10 मिली इमली के फूल के रस को दिन में तीन बार पिएं।
  24. 125-500 मिग्रा इमली के बीज के भस्म को दही के साथ चटाने से खूनी बवासीर में लाभ होता है।
  25. 10 ग्राम इमली के बीजों को सुबह पानी में भिगो दें। रात में छिलका उतारकर भीतरी सफेद मींगी को पीसकर गाय के दूध के साथ पिएं। इससे बार-बार पेशाब आने की परेशानी में फायदा होगा।
  26. मोच होने पर इमली की पत्तियों को पीसकर गुनगुना कर लेप के रूप में लगाएं। इससे मोच में लाभ होता है।
  27. इमली के बीजों की मींगी और बावची को बराबर मात्रा में मिलाकर पीस लें। इसे लगाने से सफेद दाग में लाभ होता है।
  28. इमली के बीज को नींबू के रस में पीसकर लगाने से फोड़ा ठीक होता है।
  29. इमली के पत्तों को पीसकर गर्मकर थोड़ा गाढ़ा काढ़ा बना लें। इसे फोड़ा पर बांधने से फोड़ा पककर शीघ्र फूट जाता है।
  30. इमली के पत्ते का काढ़ा बनाकर घावों को धोने से घाव ठीक होता है। बेहतर उपाय के लिए किसी आयुर्वेद चिकित्सक से जरूर सलाह लें।
  31. इमली के पत्तों का थोड़ा गाढ़ा काढ़ा बनाकर सूजन पर बांधें। इससे सूजन और दर्द ठीक होते हैं।
  32. बेहोशी की बीमारी या लू लगने पर इमली फल के गूदे को ठंडे पानी में पीसकर सिर पर लगाएं। 
  33. पकी हुई इमली को पानी में पीस लें। इस पानी में कपड़ा भिगोकर शरीर को कुछ देर तक पोछें। इससे लू का असर मिटता है।
  34. पुरानी इमली के एक किग्रा गूदे को दो-गुने पानी में भिगो लें। दूसरे दिन सुबह आग पर दो तीन बार उबालने के बाद मसलकर छान लें। इसमें दो किलो खांड मिलाकर चाशनी बना लें। इस गर्म चाशनी को छानकर ठंडा होने दें। इसे बोतल में भर लें। इसे तीन-तीन घण्टे के अंतर से 10 से 20 मिली तक की मात्रा में सेवन करें। इससे उल्टी, अधिक प्यास लगने की परेशानी, हैजा, खाना न पचना, शराब का नशा का न उतरना (हैंगओवर) दूर होता है।
  35. इसके साथ ही यह कफज विकारों में भी लाभदायक होता है।
  36. इमली की बीजों को पानी में कुछ दिन भिगोकर छिलका उतार दें। छिलके निकले सफेद बीजों को सुखाकर बारीक चूर्ण बनाकर रख लें। इसे एक चम्मच की मात्रा में दिन में तीन बार दूध के साथ सेवन करने से वीर्य का पतलापन दूर होता है।
  37. इमली के बीजों को भूनकर, छिलका उतार लें। इनका चूर्ण बना लें। बराबर मात्रा में मिश्री मिलाकर लगातार 15 दिन तक सुबह-शाम सेवन करने से वीर्य का पतलापन, मूत्र रोग जैसे- पेशाब में जलन होना, पेशाब का रुक-रुक कर होने जैसी परेशानी में लाभ होता है।
  38. 10 ग्राम इमली के बीजों को पानी में चार दिन तक भिगोकर छील लें। इसमें दो भाग गुड़ मिलाकर चने के समान गोलियां बनाकर रख लें। रात में सोते समय एक-दो गोली सेवन करने से वीर्य रोग ठीक होता है।
  39. 25 ग्राम इमली को रात भर एक गिलास पानी में भिगोकर सुबह छान लें। पानी में बूरा मिलाकर ईसबगोल के साथ पिलाने से पित्तज्वर ठीक होता है।
  40. इमली के कोमल पत्तों और फूलों की सब्जी बनाकर सेवन करें। इससे जलन और पित्तज विकारों का शमन होता है।
  41. 10 ग्राम इमली और 25 ग्राम छुहारों को 1 लीटर दूध में उबाल लें। इसे छानकर पिलाने से बुखार में होने वाली जलन और घबराहट ठीक होती है। 
  42. इमली का शर्बत बनाकर पिलाने से पित्तज उल्टी और बुखार ठीक होते हैं।

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