गेहूं (Wheat)
गेहूं प्रोटीन का एक बहुत अच्छा स्रोत है इसमें 14 .70% प्रोटीन पाया जाता है जो कि शरीर के लिये आवश्यक प्रोटीन मात्रा को पूरा करने में मदद करता है। गेहूं की खेती दुनिया भर में की जाती है। विश्व भर में, भोजन के लिए उगाई जाने वाली धान्य फसलों मे मक्का के बाद गेहूं दूसरी सबसे ज्यादा उगाई जाने वाले फसल है, धान का स्थान गेहूं के ठीक बाद तीसरे स्थान पर आता है। यह घास कुल का पौधा है गेहूं के दाने और दानों को पीस कर प्राप्त हुआ आटा रोटी, डबलरोटी (ब्रेड), कुकीज, केक, दलिया, पास्ता, रस, सिवईं, नूडल्स आदि बनाने के लिए प्रयोग किया जाता है। गेहूं का किण्वन कर बियर, शराब, वोद्का और जैवईंधन बनाया जाता है। गेहूं की एक सीमित मात्रा मे पशुओं के चारे के रूप में प्रयोग किया जाता है और इसके भूसे को पशुओं के चारे या छत/छप्पर के लिए निर्माण सामग्री के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।हालांकि दुनिया भर मे आहार प्रोटीन और खाद्य आपूर्ति का अधिकांश गेहूं द्वारा पूरा किया जाता है, लेकिन गेहूं मे पाये जाने वाले एक प्रोटीन ग्लूटेन के कारण विश्व का 100 से 200 लोगों में से एक व्यक्ति पेट के रोगों से ग्रस्त है जो शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली की इस प्रोटीन के प्रति हुई प्रतिक्रिया का परिणाम है।गेंहू का उपयोग रोगों को ठीक करने के लिए भी किया जाता है।

गेंहू का उपयोग
- गेहूँ, जौ और काकोली इत्यादि गण की औषधियों के 2 से 4 ग्राम बारीक चूर्ण को दूध, शहद और घी के साथ मिलाकर सेवन करने से तमाम तरह की खांसी में लाभ होता है। खांसी चाहे पित्त असंतुलन के कारण होती हो या टीबी की बीमारी अथवा अन्य कारण से हो। हर तरह की खांसी में इससे लाभ होता है।
- गेहूं के 2 से 4 ग्राम चूर्ण को दूध के साथ लेने से भी पित्त असंतुलन के कारण हुई खांसी में काफी राहत मिलती है।
- 15-20 ग्राम गेहूं को 250 मिलीलीटर पानी में पकाएं। 1/3 भाग शेष रह जाने पर उसमें स्वादा के अनुसार सेंधा नमक मिलाकर पिलाने से भी खांसी मिटती है।
- छाती में दर्द होने पर गेहूं की चोकर को पीस लें। इसे पानी में मिलाकर हल्का गुनगुना करके छाती पर लेप करें। छाती का दर्द जल्द शांत होता है।
- गेहूं और अर्जुन की छाल की बराबर-बराबर मात्रा से चूर्ण बना लें। इसकी 2 से 4 ग्राम मात्रा को गुड़, घी तथा तेल में पकाकर खाने से हृदय के रोगों में लाभ होता है। इस योग के सेवन के बाद केवल दूध पीने से इन रोगों में लाभ होता है।
- गेहूँ तथा अर्जुन की छाल के चूर्ण को गाय के घी और बकरी के दूध में पकाएं। इसमें शहद और शक्कर के साथ मिलाकर सेवन करने से भी हृदय रोगों में लाभ होता है।
- पुराने गेहूँ के चूर्ण से बने खाद्य पदार्थों का शहद के साथ सेवन करने से पेट संबंधी दिक्कतों, पेट का
- दर्द इत्यादि में लाभ होता है।
- अपच और भूख न लगने जैसी परेशानी में इस तरह की बीमारियों का सामना कर रहे व्यक्ति को गेहूं के चोकर की रोटी बनाकर खिलाने से फायदा होता है।
- गेहूं से बने आहारों का नियमित सेवन करना डायबिटीज में सुधार करने वाला होता है। रक्त में से शर्करा को कम करने में गेंहूं के फायदे बहुत लाभदायक होते हैं।
- मूत्राशय की छोटी पथरी का इलाज करने के लिए गेहूं का प्रयोग किया जा सकता है। गेहूं और चने का काढ़ा बना लें। इसे 15-20 मिलीलीटर मात्रा में पिलाने से किडनी और मूत्राशय की छोटी पथरी गलकर निकल जाती है।
- अंडकोष बढ़ने के कारण दर्द हो रहा हो तो, इसके निदान के लिए भेड़ का दूध लें। इसमें गेहूं और कुन्दरु के चूर्ण को गर्म करें। इसे अंडकोष पर लेप करने से दर्द शीघ्र शांत हो जाता है।
- योनि में होने वाली खुजली, गांठ आदि की स्थिति में गेहूं का आटा और रेवतिका के घोल का प्रयोग करना चाहिए। इस घोल को गुनगुना कर योनि पर इसका लेप कर सेंकने से इन समस्याओं में लाभ होता है।
- गेहूं के चूर्ण को बकरी का दूध और घी में मिलाकर गठिया या जोड़ों के दर्द वाले स्थान पर लेप के रूप में लगाएं। इससे गठिया में लाभ होता है।
- जिनकी हड्डी टूटी हो, वे, अस्थि शृंखला (हड़जोड़), लाख, गेहूं और अर्जुन की छाल को बराबर-बराबर मात्रा में मिला लें। इससे तैयार चूर्ण की 5 से 10 ग्राम मात्रा में घी मिलाकर या पकाकर सेवन करने के बाद दूध पीने से लाभ होता है। हड्डियों के टूटने और इनके अपने स्थान से खिसकने की स्थिति में भी इस योग से लाभ होता है।
- घाव भरने में मटर, कलाय, मसूर, गेहूं और निर्गुण्डी के बीज का मिश्रण सहायक होता है। इस मिश्रण को पीसकर घाव पर लगाने से घाव का दर्द जल्द दूर होता है और इसका मवाद खत्म हो जाता है।
- चोकर का क्वाथ (काढ़ा) बनाकर, उसे ठंडा करके स्नान योग्य जल में मिला लें। इस जल से स्नान करने से चर्म रोगों में लाभ होता है।इससे त्वचा की दुर्गंध मिटती है।
- दाद, खाज या खुजली में प्रभावित अंगों पर गेहूँ के आटे का लेप करने से खुजली धीरे धीरे खत्म हो जाती है।
- गेहूं के आटे का सेवन करने से उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करने में मदद मिलती है, इसलिए यदि आप उच्च रक्तचाप से पीड़ित है तो गेहूं के आटे की रोटी का उपयोग आपके लिए फ़ायदेमंद हो सकता है।
- डायबिटीज की समस्या होने पर गेहूं के चोकर युक्त रोटी या अंकुरित गेहूं का प्रयोग फ़ायदेमंद होता है, क्योंकि ये शर्करा की मात्रा को रक्त में नियंत्रित करने में करने में मदद करता है।
- प्रोटीन की कमी से परेशान है तो अंकुरित गेहूं का सेवन आपके लिए बहुत फ़ायदेमंद होगा।
- आग से जले हुए स्थान पर गेहूं के आटे का लेप करने से जलने से होने वाली पीड़ा, सूजन तथा दाह खत्म होती है।
- केवांच के बीज और गेहूं को दूध में पकाएं। इसे ठंडा कर उसमें घी मिलाकर पीने से काम शक्ति बढ़ती है और बच्चे पैदा करने की संभावना बढ़ जाती है।
- गेहूं के ज्वारे (ताजी पत्तियां) का सेवन रक्त साफ करने में किया जाता है।
- शारीरिक कमजोरी को दूर करने में गेहूं के ज्वारे का रस एक अच्छा उपाय है।
- गेहूं के पांच–छह पत्तों वाले अंकुरण (ज्वारे) का रस बहुत ही गुणकारी होटा है। यह अनेक रोगों में काम आता है। खासकर, कैंसर, डायबिटीज और बुखार में यह अधिक प्रभावी है। ज्वारे का रस निकालकर इसके 10 से 15 मिलीलीटर रस में 15 मिलीलीटर गिलोय का रस, 5 मिलीलीटर नीम पत्ती का रस और 5 मिलीलीटर तुलसी पत्ती का रस मिलाएं। इसे पिलाने से इन रोगों बहुत ही में तेजी से लाभ होता है।
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