सुपारी (areca nut)

     सुपारी, 'अरेका कटेचु' नामक पौधे के फल का बीज है जो दक्षिणी एशिया, दक्षिण-पूर्व एशिया तथा अफ्रीका के अनेक भागों में पैदा होता है। सुपारी का वृक्ष, ताड़ एवं नारियल के समान ऊंचा होता है। इसका तना सीधा, चिकना, छल्लेदार होता है। इसके पत्ते बड़े, नारियल के पत्तों के समान लम्बे होते हैं। इसके फल चिकने, नारंगी रंग के होते हैं। पक जाने पर फल, गहरे नारंगी रंग का और अण्डाकार होता है। इसी फल के अन्दर सुपारी होती है। आयुर्वेदिक किताबों के अनुसार, सुपारी एक गुणी औषधि है। इसकी मुख्यतः दो प्रमुख प्रजातियां प्रचलित हैं - साधारण सुपारी, लाल सुपारी 

सुपारी का उपयोग

मुंह में छाले होने पर सुपारी, तथा बड़ी इलायची की भस्म बना लें। उसमें शहद मिलाकर मुंह में लगाएं। इससे मुंह के छाले की परेशानी में लाभ होता है।
सोंठ, सुपारी, अथवा मरिच, गोमूत्र, और नारियल के जल से काढ़ा बना लें। इससे गरारा करने से मुंह के रोग जैसे अधिजिह्वादि में लाभ होता है।
पेट में कीड़े होने पर 10-30 मिली सुपारी के फल का काढ़ा बना लें। इसका सेवन करने से पेट के कीड़े खत्म हो जाते हैं।
5 मिली सुपारी के फल का रस पीने से भी पेट की बीमारी ठीक होती है। पेट की गंदगी मल द्वारा बाहर निकल जाती है।
1-4 ग्राम सुपारी के चूर्ण को छाछ के साथ सेवन करें। इससे आंतों के रोग में फायदा होता है।
दांत दर्द कर रहा हो, तो बराबर-बराबर मात्रा में सुपारी, खदिर, पिप्पली, तथा मरिच का भस्म बना लें। इसे दांतों पर मलें। इससे दांतों का दर्द, मसूड़ों का दर्द, और जीभ के दर्द से राहत मिलती है।
सुपारी के चूर्ण को दांतों पर मलने से भी दांतों के विकारों ठीक होते हैं।
पांच हरे सुपारी फल को धीमी आग में पकाएं। जब अन्दर की ओर जलने लगे, तब इसे निकालकर, काटकर प्रयोग करें। इससे दस्त में लाभ होता है।
सुपारी, तथा हल्दी के चूर्ण (1-3 ग्राम) में चीनी मिलाकर सेवन करने से उल्टी बन्द हो जाती है।
सुपारी की भस्म, तथा नीम की छाल को पानी में मिला लें। इसे छानकर थोड़ा-थोड़ा पिलाने से उल्टी रुकती है।
बराबर-बराबर भाग में अपांप्म, सुपारी, और कुछ कम मात्रा में स्फटिक को मिला लें। इन्हें नींबू के रस में घोल लें। इसे रस को एक-एक बूंद आंखों में डालने से आंखों की लालिमा की परेशानी ठीक होती है।
सुपारी, तथा खदिर की छाल का काढ़ा बना लें। काढ़ा के 10-30 मिली मात्रा में शहद मिलाकर पिलाने से मूत्र रोग में लाभ होता है। 
6 ग्राम सुपारी के फूल के चूर्ण में, 3 ग्राम चीनी मिलाकर दूध के साथ सेवन करें। इससे शुक्राणु रोग में लाभ होता है।
सुपारी के चूर्ण को सिफलिस के घाव पर लगाने से घाव तुरंत ठीक हो जाता है। इस दौरान आपको रोज घाव पर सुपारी के फल के पेस्ट का लेप करना जरूरी है। इस उपाय के दौरान जौ से बने भोजन का सेवन करना है।
त्वचा रोग को ठीक करने के लिए सुपारी के फल को पीसकर लेप करें। इससे त्वचा के घाव, और त्वचा के अन्य विकार ठीक होते हैं। 
एक्जिमा में सुपारी की भस्म में थोड़ा तिल का तेल मिला लें। इसमें थोड़ा घी मिला लें, और बीमार अंग पर लगाएं। इससे एक्जिमा में लाभ होता है।
अगर त्वचा लाल हो गई हो, तो रात को सुपारी को उबलते हुए जल में भिगों दें। सुबह उस जल से त्वचा की लाली को धोएं। इससे त्वचा रोगों में लाभ होता है।
सुपारी का इस्तेमाल चेचक जैसी बीमारी में भी कर सकते हैं। 1-2 ग्राम सुपारी के चूर्ण को पानी के साथ सेवन करें।
बराबर-बराबर भाग में नीलकमल, बहेड़ा फल मज्जा, तिल, तथा अश्वगंधा लें। इसमें आदा भाग प्रिंगु फूल, तथा सुपारी की छाल मिलाकर, पीस लें। इससे लेप करने से गंजेपन की समस्या में लाभ होता है।
शल्लकी, और सुपारी का काढ़ा बना लें। इसे तेल में मिलाकर मालिश करें। इससे 21 दिनों में वात रोग से पीड़ित रोगी स्वस्थ होने लगते हैं।
सुपारी के पत्ते के रस को तेल में मिलाकर, कमर पर मालिश करने से कमर दर्द ठीक हो जाता है।
शरीर के विभिन्न अंग जैसे नाक, कान आदि से खून बहने पर सुपारी के 2 ग्राम चूर्ण लें, और इतनी ही मात्रा में चन्दन के चूर्ण को मिला लें। इसे चीनी युक्त तण्डुलोदक के साथ पिएं। इससे रक्तपित्त में लाभ  होता है।
सुपाड़ी के फूल के चूर्ण, व चंदन के तने के चूर्ण को समान मात्रा में लें। इन्हें तण्डुलोदक, तथा शहद के साथ सेवन करें। इससे रक्तस्राव पर रोक लगती है।


 


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