मकोय (BLACK NIGHT OR NIGHT SHADE)
मकोय को काकमाची और भटकोइंया भी कहते हैं। यह एक छोटा-सा पौधा है जो भारतवर्ष में हमेशा पाया जाता हैं। मकोय में पूरे वर्ष फूल और फल देखे जा सकते हैं। मकोय का फल छोटे, चिकना गोलाकार अपरिक्व अवस्था में हरे रंग के और पकने पर नीले या बैंगनी रंग के, कभी-कभी पीले या लाल होते हैं। पकने पर फल मीठे लगते हैं। इस के पतियों मैं त्रिदोष नाशक गुण होते हैं। यह कुष्ट रोग और स्वरयंत्र के लिए लाभकारी होती है। मकोय पञ्चाङ्ग (जड़, तना, पत्ता, फूल और फल) के काढ़े का सेवन गठिया का दर्द, सूजन, खांसी, घाव, पेट फूलने, अपच, मूत्र रोग में फायदा पहुंचाता है। कान दर्द, हिचकी, जुकाम, आंखों के रोग, उलटी, और शारीरिक कमजोरी में भी लाभ होता है। इसके पत्ते एवं एवं फल का सेवन से पेट का अल्सर ठीक होता है। इसके बीज भ्रम, बार बार प्यास लगने, सूचन और त्वचा रोग में फायदेमंद है।

मकोय के उपयोग
- मकोय के बीज से तैयार तेल को 1-2 बूँद नाक में डालने से बाल काले होने लगते हैं। मकोय खाने के फायदे से बालों को लाभ मिलता है।
- मकोय के फलों को घी मिला लें। इसे पिल्ल (आंखों के चमक आना) रोगी को धूपन दें। इससे कीड़े खत्म होते हैं और पिल्ल से छुटकारा मिलता है।
- मकोय के पत्तों के रस को गर्म कर लें। इसे 2-2 बूँद कान में डालने से नाक एवं कान संबंधी रोगों में लाभ होता है।
- मकोय के 5-6 पत्तों को चबाने से मुंह के छाले की परेशानी ठीक होती है।
- मकोय के पत्ते के रस में घी या तेल को बराबर भाग में मिला लें। इसे मसूडों पर मलने से बच्चों के दांत बिना दर्द के निकल आते हैं।
- मकोय के पके फल को मधु के साथ सेवन करें। इससे टीबी की बीमारी में फायदा होता है।
- मकोय के पत्ते, फल और डालियों का सत्त् (पानी में मकोय को गर्म कर सुखा कर नीचे बचा हुआ पदार्थ) निकाल लें। इसे 2 से 8 ग्राम तक की मात्रा में दिन में 2-3 बार लें। इससे पेट में पानी भरने (जलोदर रोग) की बीमारी में लाभ होता है, हृदय रोगों में लाभ होता है।
- मकोय के 10-15 मिली रस में 125-250 मिलीग्राम सुहागा मिला लें। इसे पिलाने से उलटी बन्द हो जाती है।
- मकोय के 20-30 मिलीग्राम काढ़े में 2 ग्राम पीपल का चूर्ण डाल लें। इसे सुबह और शाम खाने के बाद पिलाने से अपच की समस्या ठीक होती है।
- 10-15 मिलीग्राम मकोय पञ्चाङ्ग (जड़, तना, पत्ता, फूल और फल) के रस को नियमित रूप से पिलाने से लिवर के बढ़ने की समस्या का उपचार होता है।
- एक मिट्टी के बर्तन में रस को निकाल लें। इसे इतना गर्म करें कि रस का रंग हरे से लाल या गुलाबी हो जाय। इसे रात को उबाल लें और ठंडा कर लें। सुबह प्रयोग में लाएं। इससे लिवर विकार में लाभ मिलता है।
- मकोय के काढ़े के 20-30 मिलीग्राम में सेंधा नमक तथा जीरा मिलाकर पीने से तिल्ली के बढ़ने की परेशानी ठीक होती है।
- 20-30 मिलीग्राम मकोय काढ़े में हल्दी का 2-5 ग्राम चूर्ण डाल कर पिलाने से पीलिया में लाभ होता है।
- 10-15 मिलीग्राम मकोय अर्क को रोज पिलाने से किडनी में सूजन, किडनी के दर्द आदि बीमारी में लाभ मिलता है।
- काली मकोय की 20-30 ग्राम पत्तियों को पीसकर लेप लगाने से कुष्ठ रोग में लाभ होता है।
- मकोय के पत्ते, शिरीष के फूल तथा सम्भालू के पत्ते का पेस्ट बना लें। इसमें थोड़ा घी मिलाकर लेप करने से एक्जिमा में लाभ होता है।
- मकोय के पत्ते के रस को लेप के रूप में लगाएें। इससे सोयरासिस, दाद, खाज तथा जीवाणु से पैदा होने वाले घावों में लाभ होता है।
- मकोय के हरे फल को पीसकर लगाने से दाद में लाभ होता है।
- मकोय के अर्क की थोड़ी मात्रा देने से लाल चकत्ते खत्म हो जाते हैं। अगर आप बहुत दिनों से लाल चकत्ते की परेशानी से ग्रस्त हैं तो इस उपाय को आजमाएं।
- मकोय के रस में सोंठ को पीसकर लेप के रूप में लगाएं या लाल बकवृक्ष में सोंठ को पीसकर लेप करें। इससे कोठ रोग, पित्ति रोग व चकत्तों की बीमारी ठीक होती है।
- मकोय के पत्ते, पान का पत्ते तथा हल्दी से पेस्ट बना लें। इसका लेप करने से पुराने घाव, चोट लगने से होने वाले घाव, रोम छिद्र की सूजन, मवाद वाले घाव, दाद, खाज (Herpes), एन्थैक्स आदि में लाभ होता है।
- मकोय पञ्चाङ्ग का पेस्ट लेप करने से घाव की सूजन में फायदा होता है।
- काकमाची की जड़ों से बने 10-20 मिली क्वाथ में थोड़ा गुड़ मिलाकर पिलाने से अनिद्रा में लाभ होता है।
- मकोय के फलों एवं फूल से काढ़ा बना लें। इसका सेवन करने से अधिक प्यास लगने की समस्या से राहत मिलती है।
- मकोय फलों को पीसकर सुखा लें। इसे गर्म करके लेप के रूप में लगाएं। इससे शरीर के सभी अंगों में होने वाले सूजन में लाभ होता है।
- पौधे के ताजे रस का सेवन करने या कोमल पत्तों और शाखाओं को उबालकर सेवन करें। इससे पेशाब सही से होता है और जलशोफ में लाभ होता है।
- सरस फलों का प्रयोग बुखार में लाभ पहुंचाता है। पञ्चाङ्ग चूर्ण तथा फाण्ट (काढ़ा) का सेवन से बुखार में लाभ मिलता है।
- चर्म रोग में मकोय का सेवन फायदेमंद होता है, क्योंकि मकोय में रक्तशोधक का गुण पाया जाता है जो कि रक्त को शुद्ध कर चर्म रोग के लक्षणों को कम करने में मदद करती है।
- खूनी बवासीर होने पर मकोय का सेवन आपको फायदा दे सकता है, क्योंकि मकोय में भेदन का गुण पाया जाता है जो कि मल मुलायम कर कब्ज को दूर करने में सहायक होता है। जिससे बवासीर में खून आने की संभावना कम हो जाती है।
- काकादनी तथा मकोय के रस से पकाए हुए घी का सेवन करें। इसे चूहे के काटने वाले स्थान पर लगाएं। इससे विष का प्रभाव ठीक हो जाता है।
- मकोय पञ्चाङ्ग के काढ़े (10-30 मिलीग्राम) को गुड़, पिप्पली या मरिच के साथ सेवन करें। इसके अलावा आप मकोय के रस से पकाए हुए घी का भी सेवन कर सकते हैं। इससे शरीर में ताकत आती है, याददाश्त तेज होती है।
- वस्ति रोगों में मकोय को उपयोग में नहीं लाना चाहिए।
- मकोय की बासी साग नहीं खानी चाहिए।
Comments
Post a Comment