अनार (Pomegranate)

     अनार एक फल हैं। अनार दुनिया के गर्म प्रदेशों में पाया जाता है। स्वास्थ्य की दृष्टि से यह एक महत्त्वपूर्ण फल है। भारत में अनार के पेड़ अधिकतर महाराष्ट्रराजस्थानउत्तर प्रदेशहरियाणाआंध्र प्रदेशकर्नाटकतमिलनाडु और गुजरात में पाए जाते हैं। अनार में प्रचुर मात्रा में लाभदायक प्रोटीनकार्बोहाइड्रेटफाइबरविटामिन और खनिज पाए जाते हैं। १०० ग्राम अनार खाने पर हमारे शरीर को लगभग ६५ किलो कैलोरी ऊर्जा मिलती है। कई आयुर्वेदिक दवाएं बनाने में भी अनार का प्रयोग किया जाता है। इसके बीजों से निकले तेल का प्रयोग औद्योगिक क्षेत्र में किया जाता है। अनार के पेड़ की लकड़ी बहुत मजबूत होती है। आमतौर पर इसकी लकड़ी का प्रयोग टहलते समय काम में लाई जाने वाली छड़ी बनाने में किया जाता है। इस पर किए गए अध्ययनों से पता चलता है कि अनार रक्तसंचार वाली बीमारियों से लड़ता है, उच्च रक्तचाप को घटाता है, सूजन और जलन में राहत पहुँचाता है, गठिया और वात रोग की संभावना घटाता और जोड़ों में दर्द कम करता है, कैंसर की रोकथाम में सहायक बनता है, शरीर के बुढ़ाने की गति धीमी करता है और महिलाओं में मातृत्व की संभावना और पुरुषों में पुंसत्व बढ़ाता है। अनार को त्वचा के कैंसर, स्तन-कैंसर, प्रोस्टेट ग्रंथि के कैंसर और पेट में अल्सर की संभावना घटाने की दृष्टि से भी विशेष उपयोगी पाया गया है। अमरीकी डॉक्टरों की एक पत्रिका ने हाल ही में लिखा कि अनार का रस वृद्धावस्था में सठिया जाने के अल्सहाइमर रोग की संभावना भी घटाता है। अनार की डाली से बनी हुई कलम पूजा-उपासना और तांत्रिक प्रयोगों में भी इस्तेमाल की जाती है। पुजारी/तांत्रिक एक स्वच्छ कागज़ पर अनार की कलम को लाल रंग की स्याही में डुबोकर रेखाओं और गणित के अक्षरों के जरिये एक यंत्र का निर्माण करते हैं, जो शरीर पर धारण करने से व्यक्ति को नकारात्मक उर्जा के प्रभाव से बचाता है।

अनार के उपयोग

  1. बच्चों को बहुत अधिक प्यास लगती हो तो, अनारदाना, जीरा, तथा नागकेशर को समान मात्रा में लेकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण में चीनी एवं मधु मिलाकर बच्चों को चटाएं। इससे प्यास मिटती है।
  2. एनीमिया, और पीलिया रोग के उपचार के लिए 250 मिली अनार के रस में, 750 ग्राम चीनी मिलाकर चाशनी बना लें। इसे दिन में 3-4 बार सेवन करें। इससे एनीमिया, और पीलिया में फायदा होता है।
  3. अनेक लोगों को थकान, और कमजोरी की शिकायत रहती है। ऐसे लोग 20 ग्राम अनार के ताजे पत्ते लेकर, 400 मिली पानी में उबाल लें। जब पानी 100 मिली शेष रह जाएं, तो इसमें गर्म दूध मिलाकर पिएं। इससे शारीरिक, और मानसिक कमजोरी ठीक होती है।
  4. एनीमिया और पीलिया रोग से ग्रस्त लोग 3-6 ग्राम अनार के पत्ते को छाया में सुखा लें। इस चूर्ण को सुबह गाय के दूध से बने छाछ के साथ पिएं। इसी तरह शाम को इसी छाछ के साथ पनीर का सेवन करें। इससे एनीमिया, और पीलिया रोग में फायदा होता है।
  5. दस्त पर रोक लगाने के लिए 2-3 ग्राम अनार के फल के छिल्के का चूर्ण बना लें। इसे सुबह-शाम ताजे पानी के साथ पिएं। इससे दस्त में लाभ होता है।
  6. 1 ग्राम अनार की छाल (फल या जड़ की छाल) के चूर्ण में, बराबर मात्रा में जायफल का चूर्ण, और 250 मिग्रा केशर को मिला लें। इसे पीसकर शहद के साथ सेवन करें। दस्त पर रोक लगती है।
  7. अनार की ताजी कलियां ले, इसे छोटी इलायची के बीज, और रुमीमस्तगी केक साथ पीस लें। इसमें चीनी मिलाकर पेस्ट जैसा तैयार कर लें। इसे चटाने से बच्चों के दस्त, और पेचिश में विशेष लाभ होता है।
  8. 50 ग्राम अनार की जड़ की छाल, पलाश बीज 6 ग्राम, और वायविडंग 10 ग्राम लें। सबको कूटकर 1.25 लीटर पानी में धीमी आग पर पकाएं। जब पानी आधा रह जाए, तो उसे उतारकर ठंडा करके छान लें। इसे 50 मिली की मात्रा में आधा-आधा घंटे के अंतर से पिलाएं। इसके प्रयोग से पेट के कीड़े खत्म हो जाते हैं।
  9. अनार के पत्तों को छाया में सुखाकर महीन पीस लें। इसे छान लें। इसे 3-6 ग्राम की मात्रा में सुबह छाछ के साथ, या ताजे पानी के साथ पिएं। इसके प्रयोग से पेट के कीड़े खत्म हो जाते हैं।
  10. पेट के कीड़े को खत्म करने के लिए 10 ग्राम अनार के पेड़ की जड़ की छाल, 6 ग्राम वायविडंग, और 6 ग्राम इद्र जौ को कूटकर काढ़ा बना लें। इसका सेवन करने से पेट में कीड़े खत्म हो जाते हैं।
  11. पेट में कीड़े से परेशान लोग ये तरीका भी आजमा सकते हैं। 20 ग्राम खट्टे अनार के छिलके, और 20 ग्राम शहतूत को 200 मिली पानी में उबाल लें। इसे पिलाने से भी पेट के कीड़े खत्म होते हैं।
  12. बालों के झड़ने, या गंजेपन की समस्या में अनार के ताजे हरे पत्तों का रस लें। इसमें 100 ग्राम अनार के पत्तों का पेस्ट, और आधा लीटर सरसों का तेल मिला लें। इस तेल को पकाकर छान लें। इससे बालों पर लगाएं। इससे बालों झड़ना रुक जाता है, गंजेपन की समस्या दूर होती है।इस तेल से मालिश करने से चेहरे की कील, झाई, और काले धब्बे ठीक होते हैं।
  13.  अनार के 25 ग्राम पत्तों को 400 मिली पानी में उबालें। जब पानी एक चौथाई बच जाए, तो उससे कुल्ला करें। इससे मुंह के छाले, और अन्य बीमारी भी ठीक हो जाती है।
  14. अनार के छाल का चूर्ण बना लें। इसे मुंह में रगड़ने, या धमासे के पानी के काढ़ा से कुल्ला करने से मुंह के छाले ठीक हो जाते हैं।
  15. 10 ग्राम अनार के पत्तों को 400 मिली पानी में उबालें, और जब पानी एक चौथाई रह जाए तो काढ़ा से कुल्ला करें। इससे मुंह के छाले ठीक हो जाते हैं।
  16. 10-12 अनार के ताजे पत्तों को पीसकर, हथेली और पांव के तलवों पर लेप करें। इससे हाथ-पांव की सूजन, तथा हाथ-पांव में पानी लगने की परेशानी ठीक होती है।
  17. 250 ग्राम अनार के ताजे पत्तों को, 5 लीटर पानी में उबाल कर काढ़ा बना लें। इस काढ़ा से नहाने से पित्ती संबंधित त्वचा की बीमारी ठीक होती है।
  18. अनार का इस्तेमाल त्वचा में निखार लाने के लिए भी किया जाता है। 1 किग्रा अनार के फल के छिल्के को 4 लीटर पानी में डालकर उबाल लें। जब पानी 1 लीटर रह जाए, तो उसमें 250 मिली सरसों का तेल डालकर पका लें। इस तेल की मालिश करें। कुछ ही दिनों में मांस का ढीलापन दूर हो जाता है। चेहरे की झुर्रियां मिटती हैं, तथा त्वचा में निखार आती है। इससे सिफलिश रोग में लाभ होता है। सरसों के तेल की जगह बादाम रोगन का इस्तेमाल भी कर सकते हैं।
  19. अनार के पत्ते, छिलका, फूल, कच्चे फल, तथा जड़ की छाल को बराबर-बराबर मात्रा में लें। इसे मोटा पीस लें। इसे दोगुना सिरका, तथा चार गुना गुलाब जल में भिगोएं। चार दिन बाद इसमें सरसों का तेल मिला धीमी आंच पर पकाएं। तेल जब थोड़ा सा रह जाए तो इसे छानकर बोतल में भरकर रख लें। इस तेल से रोज स्तनों पर मालिश करें। इससे स्तनों की ढीलापन दूर होता है, और स्तन सुडौल बनते हैं। इससे चेहरे की झुर्रियां भी ठीक होती हैं।
  20. अनार के पत्तों का 1 लीटर रस निकाल लें। इसमें आधा लीटर मीठा तेल (तिल तेल) मिलाकर धीमी आंच पर पकाएं। तेल थोड़ा रह जाए तो इसे छानकर बोतलों में भर कर रख लें। इसे दिन में 2-3 बार मालिश करने से स्तनों का ढीलापन दूर होता है।
  21. 20-25 ग्राम अनार की कली के रस में थोड़ा दूध मिला लें। इसे रोज पिलाने से बच्चों के सूखा रोग का उपचार होता है।
  22. 20 मिली अनार के रस में छोटी इलायची के बीज, वंशलोचन, सूखा पुदीना, जहरमोहरा खताई मिला लें। इसके साथ ही अगरु 1-1 ग्राम, तथा 500 मिग्रा पिप्पली मिलाकर बारीक चूर्ण बना लें। इसे आवश्यकतानुसार थोड़ी-थोड़ी चाटने से हिचकी ठीक हो जाती है।
  23. 20 ग्राम अनार के ताजे पत्ते लेकर, 400 मिली पानी में उबालें। जब पानी 100 मिली शेष रह जाए, तो इसमें गर्म दूध मिलाकर पिएं। इससे नींद ना आने की परेशानी खत्म होती है।
  24. अनार के फूल, धमासा, और हरड़ को बराबर-बराबर मात्रा में पीस लें। इसे नाखून पर लगाएं। इससे नाखून के भीतर की सूजन, और नाखून के दर्द ठीक हो जाते हैं।
  25. अनार के फूलों की कलियों को सुखा लें, और पीसकर भस्म बना लें। इसे चोट पर डालने से घाव शीघ्र ठीक हो जाते हैं।
  26. अनार के 50 ग्राम पत्तों को 1 लीटर पानी में काढ़ा बना लें। जब काढ़ा एक चौथाई बच जाए, तो इससे घावों को धोने से विशेष लाभ होता है। 
  27. सिर दर्द में आराम पाने के लिए अनार के आधा किलो पत्तों को छाया में सुखा लें। इसमें सूखी धनिया मिलाकर महीन चूर्ण बना लें। इसमें 250 ग्राम गेहूं का आटा मिलाएं, और गाय के घी में भून लें। जब यह ठंडा हो तो, इसमें 1 किलो खांड मिला लें। इसे 50 ग्राम की मात्रा में सुबह और शाम गर्म दूध के साथ तक सेवन करें। इससे सिर दर्द से राहत तो मिलती ही है, साथ ही सिर के चकराने की बीमारी भी दूर होती है। 
  28. अनार की छाल को पीसकर लेप करने से भी सिर दर्द, या आधासीसी में लाभ होता है।
  29. दांतों के दर्द में अनार, तथा गुलाब के सूखे फूल को पीस लें। इससे मंजन करें। इससे मसूड़ों से पानी आना बन्द हो जाता है।
  30. केवल अनार की कलियों के चूर्ण का मंजन करें। इससे मसूड़ों से खून आना तो बंद होता ही है, साथ ही दांत का दर्द खत्म हो जाता है। 
  31. दांत हिलते हैं तो मीठे अनार के 8-10 पत्तों को छाया में सुखाकर पीस लें। इस चूर्ण का मंजन करने से दांतों के हिलने की परेशानी में लाभ होता है। 
  32. मसूड़ों से खून आने की परेशानी है तो अनार की छाल का काढ़ा बनाकर कुल्ला करें।
  33. मीठे अनार के 8-10 पत्तों को छाया में सुखाकर पीस लें। इस चूर्ण का मंजन करने से मसूड़ों से खून, और पीव का आना बन्द हो जाता है। इससे सूजन भी कम हो जाती है।
  34. नाक, या कान में घाव हो गया हो, या उसमें दर्द रहता हो तो 2-2 बूंद अनार की छाल का काढ़ा बना लें। इसका प्रयोग करने से नाक-कान के दर्द में लाभ मिलता है। 
  35. नाक से खून आने पर अनार के फूलों का 1-2 बूंद रस नाक से डालें। इससे नाक से खून बहना बन्द हो जाता है। 
  36. अनार के छिलके को छुहारे की पानी के साथ पीस लें। इसे नाक से लें। इससे भी नाक से खून बहना रुक जाता है। इसका लेप सूजन में भी लाभ पहुंचाता है।
  37. अनार के पत्तों का काढ़ा (10-30 मिली), या पत्ते के रस (10 मिली) पिएं। इसे पीसकर सिर पर लेप करने से नाक से खून आने की बीमारी में फायदा होता है।
  38. कान दर्द में अनार के ताजे पत्तों का 100 मिली रस, 400 मिली गोमूत्र, और 100 मिली तिल के तेल को मिलाकर धीमी आंच पर पकाएं। जब तेल थोड़ा सा रह जााए, तो छानकर रख लें। इसे थोड़ा गर्म करके कुछ बूंदें सुबह और शाम कान में डालें। इससे कान के दर्द, कान में आवाज के गूंजने, और बहरेपन की समस्या में लाभ होता है।
  39. कंठ के रोग में अनार के ताजे पत्तों का 1 लीटर रस लें। इसमें मिश्री मिलाकर शर्बत बना लें। इसे 20-20 मिली दिन में 2-3 बार पिएं। इससे आवाज के भारीपन, खांसी, तथा कण्ठ के अन्य रोग में लाभ होता है।
  40. अनार के पत्तों को छाया में सुखाकर, पीस लें। इसका चूर्ण बना लें। इस चूर्ण में शहद, या गुड़ मिलाकर झड़बेरी जैसी गोलियां (0.5-1 ग्राम) बना लें। इसे छाया में सुखा लें। इन गोलियों को मुंह में रख कर चूसने से कण्ठ के रोग ठीक होते हैं।
  41. खांसी से परेशान हैं तो अनार का अर्क 2-2 चम्मच दिन में तीन-चार बार पिलाएं।
  42. आंख के रोग को ठीक करने के लिए अनार के 5-6 पत्तों को पानी में पीसकर दिन में 2 बार लेप करें।
  43. अनार के पत्तों को पानी में भिगोकर पोटली बना लें। इसे आंखों पर रखने से भी आंख के रोग ठीक होते हैं।
  44. इसी तरह, अनार के पत्तों के रस को आंखों पर लगाने से आंखों का दर्द, और आंखों के अन्य रोग में लाभ होता है।
  45.  मोतियाबिंद के उपचार के लिए अनार के वृक्ष की छाल को, पके हुए अनार के फल के रस में घिस लें। इसमें 1 या 2 लाल गुंजा का छिलका भी घिस लें। इसे आंखों की फूली पर दिन में 3 बार लगाने से लाभ होता है।
  46. भूख ना लगने की परेशानी के लिए अनार के पत्ते को छाया में सूखा लें। इसमें सेंधा नमक मिलाकर महीन चूर्ण बना लें। इसे 4-4 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम, खाने से पहले ले। इसे पानी के साथ सेवन करें। इससे भूख बढ़ती है, और खाना ठीक से पचता है।
  47. अपच की समस्या के लिए अनार के 10 मिली रस में भुना हुआ 2 ग्राम जीरा, और 5 ग्राम गुड़ मिला लें। इसे दिन में 2 या 3 बार प्रयोग करें। इससे सभी प्रकार की अपच की परेशानी ठीक होती है।
  48. 20 मिली अनार का रस, 20 मिली शहद, और 10 मिली तिल के तेल में 6 ग्राम जीरा का चूर्ण, और 6 ग्राम खांड मिला लें। इसे मुंह में लेकर थोड़ी देर मुंह को चलाते रहें। ऐसा करने से अपच में लाभ होता है।
  49. पाचनतंत्र को सही रखने के लिए 100 ग्राम सूखा अनारदाना, सोंठ, काली मिर्च, पीपल, दालचीनी लें। इसके साथ ही तेजपात, तथा इलायची 50-50 ग्राम मिला लें। इसका चूर्ण बना लें। इसमें इतनी ही मात्रा में खांड मिला लें। इसे मधु के साथ दिन में दो बार लें। इसे 500 मिग्रा से 1 ग्राम की मात्रा में सेवन करना है। इससे पाचनतंत्र सही रहता है। इससे खांसी, सांसों का फूलना, हृदय की बीमारियां, और जुकाम में आराम मिलता है।
  50. हैजा के उपचार के लिए 6 ग्राम अनार के हरे पत्तों को, 20 मिली पानी के साथ पीस लें। इसे छान लें। इसमें 20 मिली चीनी का शरबत मिलाकर, 1-1 घंटे बाद पिलाएं। इसे तब तक पिलाना है, जब तक बीमारी ठीक ना हो जाए।  
  51. इसी तरह 10-15 मिली खट्टे अनार-रस का नियमित रूप से सेवन भी हैजा में लाभ होता है। यह उल्टी को भी बन्द करता है।
  52.  केवल अनार के फल के छिलके को मुंह में रखकर चूसने से भी खांसी में लाभ होता है।
  53. 80 ग्राम गुड़ की चाशनी बना लें। इसमें 40 ग्राम अनार का छिलका, 6-6 ग्राम पीपल, और जवाखार (यवक्षार) का महीन चूर्ण मिला लें। इसकी 500-500 मिग्रा की गोली बनाकर रख लें। 2-2 गोली दिन में 3 बार गुनगुने पानी से सेवन करें। इसके प्रयोग से खांसी में लाभ होता है। इसमें 10 ग्राम काली मिर्च मिला लेने से कफ में विशेष लाभ होता है।
  54. जिन गर्भवती महिलाओं को गर्भपात की परेशानी रहती है, वे गर्भधारण के पांचवें महीने में अनार के पत्ते के चूर्ण, और चन्दन के चूर्ण में दही, और मधु मिलाकर सेवन करें। इससे लाभ होगा।
  55. अनार के ताजे पत्ते (20 ग्राम) को, 100 मिली पानी में पीसकर छान लें। इसे पीने से गर्भपात की रोकथाम होती है।
  56. इसके साथ ही, अनार के पत्ते के पेस्ट को, पेट के नीचे वाले भाग पर लेप करने से गर्भस्राव पर रोक लगती है।
  57. अनार के फल के छिलके के काढ़ा में थोड़ी हल्दी चूर्ण मिला लें। इससे योनि को धोएं। इससे ल्यूकोरिया में तुरंत लाभ होता है। इसे योनि में डालने से भी ल्यूकोरिया में फायदा होता है।
  58. सुजाक को ठीक करने के लिए 25 ग्राम अनार की छाल में, इतना ही खाड मिला लें। इसे 200 मिली पानी में पका लें। इसे रोज सुबह-सुबह पिएं। इससे तीन दिन में ही सुजाक में लाभ होने लगता है।
  59. गर्भाशय भ्रंश का मतलब होता है गर्भाशय का अपने स्थान से खिसक जाना। आमतौर पर महिलाओं में ऐसा मेनोपॉज के बाद ही होता है। इसमें भी अनार का उपयोग लाभ पहुंचाता है। अनार की एक-दो ताजे कली को पानी में पीसकर पिलाएं। इससे गर्भधारण क्षमता बढ़ती है, और गर्भाश्य भ्रंश में फायदा होता है।
  60. यदि गर्भवती का हृदय कमजोर है, तो मीठे अनार के दानों का सेवन कराएं। 
  61. हिस्टीरिया को ठीक करने के लिए, 10 ग्राम अनार के पत्ते, और 5 ग्राम गुलाब के ताजे, या सूखे फूल लें। इन्हें आधा लीटर पानी में पकाएं। जब पानी 250 मिली रह जाए, तो उसमें 10 ग्राम गाय का घी, और खांड मिलाकर सुबह-शाम पिलाएं। इससे हिस्टीरिया में लाभ होता है।
  62. रोज अनार के पत्ते के पेस्ट बनाकर लेप करें, और 5-10 ग्राम पत्ते के चूर्ण का सेवन करने से सिफलिश में लाभ होता है।
  63. टाइफाइड के उपचार के लिए अनार के पत्ते के काढ़ा में सेंधा नमक मिलाकर सेवन करें।
  64. अनार के रस में, छोटी इलायची के बीज, और सोंठ का चूर्ण मिलाकर पिएं। इससे मूत्र विकार में लाभ होता है।
  65. इसी तरह, 10 ग्राम अनार के पत्ते, और 10 ग्राम हरा गोखरू को 150 मिली पानी में पीस लें। और इसे छानकर पीने से पेशाब संबंधी बीमारी में लाभ होता है। 
  66. बवासीर के रोगी 5-10 मिली अनार के पत्ते के रस का सेवन करें। इससे बवासीर में लाभ होता है।
  67. अनार के 8-10 पत्तों को पीसकर टिकिया बना लें। इसे गाय के घी में भून कर सेवन करने से भी बवासीर में लाभ होता है।
  68. खूनी बवासीर के इलाज के लिए अनार की जड़ की छाल से 100 मिली काढ़ा बनाएं। इसमें 5 ग्राम सोंठ के चूर्ण को मिला लें। इसे दिन में 2-3 बार पिएं। 
  69. इसी तरह 250 ग्राम अनार के ताजे पत्तों को 1 लीटर पानी में पका लें। जब पानी आधा रह जाए, तो इसे छान लें। इस पानी से दिन में 2-3 बार गुदा को धोएं। इससे खूनी बवासीर, और गुदा संबंधी अन्य बीमारी जैसे- मस्सा का बाहर आना आदि में लाभ होता है।
  70. इसके अलावा, अनार की जड़ के 100 मिली काढ़ा में, 5 ग्राम सोंठ चूर्ण मिला लें। इसे दिन में दो-तीन बार पीने से भी खूनी बवासीर में लाभ होता है।
  71. खूनी बवासीर के इलाज के लिए 20 ग्राम अनार-फल की छाल, और 20 ग्राम कड़वे इन्द्र जौ को कूट लें। इसे 640 मिली पानी में मिलाकर काढ़ा बना लें। जब काढ़ा एक चौथाई हो जाए, तो इसे दिन में 3 बार पिलाएं।
  72. खूनी बवासीर के उपचार के लिए 80 ग्राम कुटज को कूटकर, 640 मिली पानी में पकाएं। जब पानी एक चौथाई रह जाए, तो उसे उतार कर छान लें। अब इसमें 160 मिली अनार का रस मिलाकर दोबारा पकाएं। जब यह गाढ़ा हो जाए तो उतार कर रख लें। इसे 20 मिली छाछ के साथ सेवन करें। इससे पेचिश, या खूनी बवासीर में फायदा मिलता है।
  73. अनार-फल के छिलके के चूर्ण, सोंठ, तथा चंदन को समान मात्रा में लेकर काढ़ा बनायें। 10-20 मिली काढ़ा में गाय का घी मिलाकर पीने से खूनी बवासीर में लाभ होता है।
  74. केवल अनार की छाल का काढ़ा बनाकर पीने से भी खूनी बवासीर का उपचार होता है।
  75. खूनी बवासीर के रोगी 100 मिली अनार के रस में, 10 ग्राम गाय का घी, तथा 65 मिग्रा यवक्षार मिलाकर पिएं। इससे बवासीर के दर्द और रक्तस्राव ठीक होते हैं।
  76. छोटे बच्चों का शरीर बहुत की कोमल होता है। कभी-कभी छोटे बच्चों को कब्ज होने पर वे जोर लगाकर मल त्यागते हैं। इससे गुदा के अंदर का मुलयाम मांस बाहर निकल आता है। इसे गुदाभ्रंश कहते हैं। इसमें अनार के फल के छिलके का चूर्ण, या पेस्ट लगाने से आराम मिलता है।
  77. अनार के ताजे पत्ते से काढ़ा बनाकर गुदा पर लगाने से भी गुदभ्रंश में लाभ होता है।
  78. उल्टी की परेशानी में 10 मिली अनार के गुनगुने रस में 5 ग्राम चीनी मिलाकर पिएं। इससे उल्टी ठीक होती है।
  79. अनार के फल को छिलके सहित कूट कर रस निचोड़ लें। इसे 30-50 मिली की मात्रा में पिलाएं। इसमें चीनी मिलाकर पिलाने से पित्त रोग के कारण होने वाली उल्टी, खुपानी, और थकान आदि समस्या ठीक होती है।
  80. रोगी 5-10 मिली अनार के पत्ते का रस दिन में दो बार पिएं। इससे खून की उल्टी को रोकने में मदद मिलती है। इससे खूनी बवासीर में भी फायदा होता है।
  81. फेफड़ों के विकार से परेशान लोग, दिन में 2-3 बार 10-20 मिली अनार के पत्ते का काढ़ा पिएं। इससे आराम मिलता है।
  82. टीबी एक जानलेवा रोग है। टीबी के उपचार के लिए आपको यह करना है। अनार के 200 मिली स्वादिष्ट रस में 40-40 ग्राम पीपल, सफेद जीरा, सोंठ, और दालचीनी का चूर्ण मिला लें। इसमें 1-2 ग्राम बढ़िया वाला केशर, और 200 ग्राम पुराना गुड़ मिलाकर धीमी आग पर पकाएं। यह काढ़ा जब गोली बनने योग्य हो जाए, तो 10 ग्राम छोटी इलायची का चूर्ण डालकर, 1-2 ग्राम की गोलियां बना लें। सुबह-शाम 1-1 गोली को बकरी के दूध के साथ सेवन करें। टीबी में फायदा होता है।
  83. ह्रदय की बीमारी में 10 ग्राम अनार के ताजे पत्तों को, 100 मिली पानी में पीस छान लें। इसे सुबह और शाम पीने से हृदय के विकारों में लाभ होता है।
  84. इसी तरह 20-25 मिली अनार का शर्बत पीने से हृदय रोग में लाभ होता है।

  • जिन लोगों का शरीर शीत प्रकृति वाला (ठंडा रहता हो) हो, उन्हें अनार का सेवन नहीं करना चाहिए।
  • अनारदाना :  इसका दर्पनाशक जीरा है।

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