खेसारी (Chickling pea)
लतरी या खेसारी एक वनस्पति है जिससे दाल प्राप्त होती है। दुनिया के अनेक राष्ट्रों में इसकी खेती एवं इसका उपयोग प्राचीनकाल से किया जाता रहा है। खेसारी दाल में ODAP जहरीला तत्व है खेसारी दाल कम कीमत पर मिलने वाली दाल है इसका उपयोग स्वास्थ्य के लिए हानिकारक यदि ज्यादा मात्रा में खाया जाए ।इसके उपयोग से पक्ष घात व गठिया रोग होता है इसे कच्चा खाने से तिरुपुट नामक रोग उत्पन्न होता है। खेसारी का साग खाने में रुचि बढ़ाने वाला और पित्त कफ दूर करने वाला होता है। खेसारी के बीज पौष्टिक, थोड़े कड़वे, प्रकृति से ठंडे तथा कमजोरी दूर करने वाले होते हैं। खेसारी के बीज का तेल विरेचक गुण वाले यानि पेट से मल या अवांछित पदार्थ निकालने में सहायक होते हैं।
खेसारी के उपयोग
- खेसारी के पत्तों को उबालकर साग के रुप में सेवन करने से आँख की बीमारी दूर होती है।
- खेसारी के ताजे फल के रस को लगाने से आँखों का सूजन और जलन कम होता है।
- भुने हुए खेसारी बीज को कलाय सूप के साथ सेवन करने से जीर्ण परिणामशूल यानि पेप्टिक अल्सर में लाभ होता है।
- खेसारी के बीजों को पीसकर पोटली की तरह बनाकर गांठ में बांधने से गांठ पककर फूट जाता है तथा पीब निकल जाता है।
- त्वचा रूखी हो रही है तो खेसारी के बीज के चूर्ण का प्रयोग करने से त्वचा का रूखापन कम होता है।
खेसारी के बीज पोषक होते हैं, परन्तु विषाक्त होने के कारण अत्यधिक मात्रा में, अत्यधिक दिनों तक इनका प्रयोग करने से पशुओं तथा मनुष्यों में कलायखञ्ज नामक बीमारी होने की संभावना बढ़ जाती है।

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