चना (Gram)
चना एक प्रमुख दलहनी फसल है। चना के आटे को बेसन कहते हैं। और इसे भिगोकर खाया जाता है इससे हमारे शरीर में विटामिन A मिलता है। चना का सबसे ज्यादा उत्पादन भारत में होता है।आयुर्वेद में भी चना के पौष्टिकता के आधार पर इसको बीमारियों के लिए औषधि के रुप में प्रयोग किया जाता है। चना कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को शरीर में बढ़ने नहीं देता है।अगर आपको अपने दैनिक कार्यों के दौरान सुस्ती या थकान महसूस होती है तो काले चने का सेवन आपके लिए फायदेमंद हो सकता है। चने में आयरन की प्रचुर मात्रा पायी जाती है जो कि हीमोग्लोबिन को बढ़ाने में मदद करती है। यह पाचन शक्ति बढ़ाने में मदद करता है।

चना का उपयोग
- चनों को भूनकर, पोटली बनाकर, सूंघने से सिर का दर्द कम हो जाता है।
- रात को सोते समय थोड़ा भुना चना और गुड़ खा लें; इससे खांसी में लाभ होता है। इसके अलावा रात में सोते समय थोड़ा भूना चना गर्म दूध के साथ पीने से श्वासनली के संबंधी रोगों से छुटकारा मिलता है।
- चने की भूसी को हुक्के में रखकर उसकी धूम का सेवन करने से हिचकी बंद होती है।
- चने को छह गुने जल में भिगोकर दूसरे दिन सुबह उसका पानी छानकर 10-20 मिली मात्रा में पीने से पैत्तिक-छर्दि (उल्टी) से राहत मिलती है।
- चने को आग में भून कर खाने से क्रूरकोष्ठ (जिनको कठिनता से मल निकलता है) से छुटकारा मिलता है जिससे पेट दर्द कम होता है।
- परवल के पत्तों से बने जूस के साथ, चने से बने सत्तू का सेवन करने से अन्नद्रवशूल या पेप्टिक अल्सर में लाभ होता है।
- 2-4 ग्राम चने के पत्ते के चूर्ण को खाने से मधुमेह में लाभ होता है।
- चने का शीत-कषाय बनाकर 20-30 मिली मात्रा में पिलाने से मूत्र मार्ग की पथरी के कारण जो दर्द होता है उससे आराम दिलाता है।
- चने के पत्तों को उबालकर पीसकर जोड़ों में लगाने से जोड़ों का दर्द कम होता है।
- चने के आटे की रोटी बनाकर उसमें घी लगाकर खाने से जोड़ों का दर्द का कम होता है।
- 2-4 ग्राम सूक्ष्म चूर्ण में 1 ग्राम बाकुची तथा 500 मिग्रा नीम चूर्ण मिलाकर सेवन करने से सफेद दाग में लाभ हाता है।
- चने के आटे का उबटन बनाकर चेहरे पर लगाने से चेहरे की कांति बढ़ती है तथा मुंहासे व झाँई मिटती हैं।
- 20-40 मिली चने के जूस का सेवन करने से बुखार में होने वाली जलन से राहत मिलती है। समान मात्रा में भांग, भुने चने तथा गुड़ के चूर्ण को मिलाकर सेवन करने से शीतज्वर (ठंड लगकर आने वाला) से छुटकारा मिलता है।
- चनों को पानी में भिगोकर रातभर छोड़कर सुबह पानी को छानकर 15-20 मिली मात्रा में पिलाने से शारीरिक बल बढ़ता है। भूने चने तथा छीली हुई बादाम की गिरी दोनों को बराबर मात्रा में मिलाकर खाने से शारीरिक बल की वृद्धि होती है तथा वीर्य पुष्ट होता है।
चने से बने बेसन का प्रयोग शीतपित्त (Urticaria), श्वित्र (leucoderma), मोटापा एवं अर्श (पाइल्स) में लेना वर्जित होता है। इसके बीजों का प्रयोग जॉन्डिस में लाभकारी होता है।
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