चंदन (Sandal)

     भारतीय चंदन का संसार में सर्वोच्च स्थान है। इसका आर्थिक महत्व भी है। चंदन एक बहुत ही फायदेमंद जड़ी-बूटी भी है, और चन्दन का प्रयोग बहुत सालों से चिकित्सा के लिए किया जा रहा है।चंदन के वृक्ष प्रायः 20 वर्ष के बाद ही बड़े होते हैं। चंदन के पेड़ की छाल लाल, या भूरे, या फिर भूरे-काले रंग की होती है। पेड़ के भीतर का हिस्सा हल्का पीला रंग का, और सुगंधित होता है।  पुराने वृक्षों की छाल दरार युक्त होती है। चंदन का वृक्ष 40-60 वर्ष की आयु के बाद उत्तम सुगन्ध वाला हो जाता है। चंदन के वृक्ष में फूल जून से सितम्बर के बीच होते हैं, और फल नवम्बर से फरवरी तक होते हैं। ऐसी अवस्था में चंदन पूरी तरह से उपयोग करने लायक हो जाता है।  तने की नरम लकड़ी तथा जड़ को कुंदा, बुरादा, तथा छिलका और छीलन में विभक्त करके बेचा जाता है। इसकी लकड़ी का उपयोग मूर्तिकला, तथा साजसज्जा के सामान बनाने में और अन्य उत्पादनों का अगरबत्ती, हवन सामग्री, तथा सौगंधिक तेज के निर्माण में होता है। आसवन द्वारा सुगंधित तेल निकाला जाता है। प्रत्येक वर्ष लगभग 3,000 मीट्रिक टन चंदन की लकड़ी से तेल निकाला जाता है। एक मीट्रिक टन लकड़ी से 47 से लेकर 50 किलोग्राम तक चंदन का तेल प्राप्त होता है। चंदन की लकड़ी महंगी होती है, इसलिए इसकी तस्करी भी की जाती है। चंदन के पेड़ की कुछ विशेषताएं ये हैंः-

  • उड़ीसा में पैदा होने वाला चंदन सबसे उत्तम होता है।
  • भारत-यूनान (यवन देश) क्षेत्र में में पैदा होने वाला चंदन गुणवत्ता में थोड़ा कम होता है।
  • पश्चिमी उत्तर प्रदेश आदि स्थानों में होने वाला चंदन सबसे कम गुणवत्ता वाला बताया गया है। 
  • गंध के हिसाब से उड़ीसा का चंदन सर्वोत्तम होता है।

आयुर्वेद के अनुसार, चंदन के पेड़ केवल एक तरह के नहीं होते। देश-विदेश में चंदन के पेड़ भिन्न-भिन्न तरह के पाये जाते हैं, जो ये हैंः-

1.सबसे अच्छे चन्दन के लक्षण

जो चंदन बहुत ही अच्छी गुणवत्ता का होता है,  वह दिखने में सफेद रंग का होता है, लेकिन जब उसके टुकड़े करते हैं, तो लाल रंग का होता है। इसे घिसने पर उससे पीला रंग जैसा पदार्थ निकलता है। इसका सुगंध थोड़ा तीखा होता है।

2.वेट्ट चन्दन

यह चंदन बहुत अधिक ठंडा होता है। इसके प्रयोग से जलन, बुखार, उल्टी, कफ आदि बीमारियां ठीक की जा सकती है।

3.पीतचन्दन

यह चंदन भी सुगंध में तीखा, और ठंडा होता है। यह कुष्ठ रोग, कफ, बुखार, जलन की परेशानी में फायदेमंद होता है। दाद, वात-विकार, विष, रक्तपित्त आदि में इस्तेमाल किया जाता है।

चंदन के उपयोग 

  1. चंदन, तथा धनिया की पत्ती को पीस लें। इसे सूंघने से छींक आनी बन्द हो जाती हैं।
  2. हिचकी से परेशान रहते हैं, तो मसूर, पलाण्डु, अथवा गृंजनक, और श्वेत चंदन लें। इसे गाय के दूध के साथ घिस लें। इसे1-2 बूंद नाक में डालें। हिचकी बंद हो जाती है।
  3. चंदन की लकड़ी को जल में घिसकर, तथा तने की छाल को पीसकर शरीर पर लगाएं। इससे सूजन ठीक होती है।
  4. चंदन को जल के साथ घिसकर त्वचा पर लगाएं। इससे खुजली ठीक होती है।
  5. चंदन के तेल में नींबू का रस, तथा कपूर मिला लें। इसे लगाने से खुजली ठीक हो जाती है।
  6. चंदन की लकड़ी को घिस लें। इसे मुंह में लगाएं। इससे मुंहासे, और चेहरे की झाई आदि समस्या ठीक होती है।
  7. आंखों के रोग में 10 ग्राम सफेद चंदन के पेस्ट को, 100 मिली दूध में पका लें। इसे ठंडा कर लें। इसे आंखों पर लगाने से आंखों की बीमारी में लाभ होता है।
  8. मंजिष्ठा, और चन्दन के चूर्ण को बराबर मात्रा में मिला लें। 2-4 ग्राम चूर्ण का लगातार सेवन करने से यौन रोगों में लाभ होता है।
  9. शुक्राणु विकार को ठीक करने के लिए अर्जुन की छाल, और चन्दन को समान मात्रा में लेकर काढ़ा बना लें। इसे 20-40 मिली की मात्रा में सेवन करने से शुक्राणु संबंधी रोगों में लाभ होता है।
  10. चंदन की लकड़ी को जल में घिसकर लेप करने से त्वचा के अनेक विकार ठीक होते हैं।
  11. त्वचा पर चकत्ते हो जाने पर 2-4 ग्राम चंदन के चूर्ण को गुडूची-के रस में मिला लें। इसका सेवन करने से लाभ होता है।
  12. कुुछ लोगों को हमेशा प्यास लगी रहती है। वास्तव में यह एक समस्या है। ऐसे में 20-40 मिली नारियल जल में, 2-4 ग्राम चंदन के चूर्ण को मिला लें। इसे पीने से प्यास खत्म हो जाती है।
  13. चन्दन के चूर्ण को गुलाब जल के साथ पीसकर लगाएं। इससे पसीने से बदबू आने की परेशानी में फायदा होता है।
  14. आयुर्वेद तरीके से सिर दर्द से आराम पाना चाहते है, तो चंदन को घिसकर मस्तक पर लगाना चाहिए। इससे सिर दर्द से राहत मिलती है।
  15. पित्त के कारण होने वाली पेट की गड़बड़ी में भी चंदन का फायदा मिल सकता है। इसमें चन्दनादि घी (5-10 ग्राम) के सेवन से आराम मिलता है।
  16. नाभि में दर्द होने पर 20-40 मिली नारियल जल में, 2-4 ग्राम चंदन के चूर्ण को नाभि पर रखें। इससे आराम मिलता है।
  17. सफेद, या लाल चंदन का काढ़ा 20-30 मिली मात्रा में पीने से ल्यूकोरिया में लाभ होता है।
  18. 2-4 ग्राम चंदन के चूर्ण को दूध, तथा घी में पका लें। इसे ठंडा करके मधु, और चीनी मिला लें। इसे पीने से ल्यूकोरिया में तुरंत फायदा होता है।
  19. 10-20 मिली चावल के धुले हुए पानी में, 2-4 ग्राम बारीक चंदन के चूर्ण, और चीनी को मिला लें। इसे पिएं। इसके साथ ही उबालकर दूध को ठंडा कर लें, और इसके साथ, अन्न का सेवन करें। इससे मूत्र रोग, जैसे- पेशाब का रुक-रुक आने आदि परेशानी में लाभ होता है।
  20. पेशाब में जलन की बीमारी से परेशान हैं, तो 50-100 मिली गाय के दूध में 2-4 ग्राम चंदन के चूर्ण को मिला लें। इसे पिने से आराम मिलता है।
  21. मल त्याग करते समय जलन होती हो, या मल से बहुत अधिक दुर्गंध आता हो, तो 2-4 ग्राम चंदन के चूर्ण में मधु, तथा मिश्री मिला लें। इसे चावल के धुले हुए पानी के साथ पिएं। इससे गुदा की बीमारी में फायदा होता है।
  22. बार-बार दस्त हो रहा है, या मल में खून में आ रहा है, तो घिसे हुए सफेद चंदन में मधु, और मिश्री मिला लें। इसे चावल के धुले हुए पानी के साथ सेवन करें। इससे पेचिश में लाभ होता है।
  23. शरीर के भिन्न-भिन्न अंग, जैसे- नाक, गुदा, या योनि से अगर खून आता हो तो बराबर-बराबर भाग में चन्दन, मुलेठी, तथा लोध्र के चूर्ण (2-4 ग्राम) में मधु मिला लें। इसे चावल के धुले हुए पानी के साथ तीन दिनों तक पिएं। इससे रक्तपित्त में लाभ होता है।
  24. चंदन के बारीक चूर्ण को नाक के रास्ते लेने से नाक से खून आना बंद हो जाता है।
  25. चंदन की लकड़ी को जल में घिस लें। या इसके तने की छाल को पीसकर शरीर पर लगाने से बुखार ठीक हो जाता है।
  26. यदि खाने के बाद सिर, एवं हृदय में दर्द होता है, या आंखों की परेशानी रहती है, तो शिरीष, हल्दी, तथा चंदन के लेप को हृदय में लगाएं। इससे लाभ होता है।
  27. शरीर में जलन होने पर चंदन की लकड़ी को जल में घिस लें, और तने की छाल को पीसकर शरीर पर लगाएं। इससे जलन ठीक हो जाती है।
  28. 500 मिग्रा सफेद चंदन को घिस लें। इसे 10 मिली आंवला के रस में घोल लें। इसमें मधु मिलाकर पीने से उल्टी में लाभ होता है।
  29. इसी तरह चंदन के 5-10 ग्राम बारीक चूर्ण को, चार गुना आंवला के रस में घोल लें। इसमें मधु मिलाकर पीने से उल्टी रुक जाती है।
  30. इसके अलावा 10-30 मिली आंवले के रस में, 1-2 ग्राम चन्दन के पेस्ट को मिला लें। इसका सेवन करने से उल्टी पर रोक लगती है।
  31. चेचक की शुरुआती अवस्था में सफेद चंदन के पेस्ट को हिलमोचिका के रस में घोलकर पिएं। इससे चेचक में लाभ होता है।
  32. गठिया की बीमारी वाले लोग 20-40 मिली चन्दनादि कषाय में, चीनी, तथा मधु मिलाकर सेवन करें। इससे गठिया में आराम होता है।
  33. कुष्ठ रोग को ठीक करने के लिए सफेद चंदन, तथा कर्पूर को बराबर मात्रा में लें। इन्हें एक साथ मिलाकर पीस लें। इससे लेप करें। इससे कुष्ठ रोग में लाभ होता है।
  • आर्द्रावस्था में कटा हुआ चन्दन पित्त रोग को ठीक करता है।
  • सूखे अवस्था में कटा चन्दन वात रोग को ठीक करता है।
  • मध्यमावस्था में कटा चन्दन, कफ को ठीक करता है।




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