शिकाकाई ( Soap pod)

     शिकाकाई एशिया का देशज है और भारत के मध्य तथा दक्षिणी गरम मैदानों में आसानी से उगती है। इस झाड़ी पर पैण्टोपोरिया होर्डोनिया नामक तितली के लारवा को पोषण मिलता है। इसके फलों में एल्केलऑयड की अच्छी मात्रा होती हैं।आयुर्वेद में बताया गया है कि शिकाकाई का पेड़ एक ऐसी जड़ी-बूटी है जो न सिर्फ बाल और त्वचा के लिए लाभकारी होता है बल्कि कई रोगों के लिए औषधि के रूप में भी इस्तेमाल भी किया जाता है।  आयुर्वेद के अनुसार शिकाकाई का पेड़ कड़वा, ठंडा प्रकृति वाला, कफ और पित्त को कम करने वाला, वात को हरने वाला, दिल के लिए उपयोगी और भूख बढ़ाने वाला होता है। शिकाकाई शीघ्र बढ़ने वाला, छोटे-छोटे कांटों से भरा तना होता है। इसकी फली मांसल, पट्टी के आकार की, सीधी, 7.5-10 सेमी लम्बी तथा 1.8 सेमी चौड़ी होती है। कच्ची अवस्था में यह हरी तथा सूखे अवस्था में झुर्रीदार होती है। बीज संख्या में 6-10 होते हैं।

शिकाकाई का उपयोग

  1. शिकाकाई की फलियों का काढ़ा बनाकर, इस काढ़े से बालों को धोने से केश की वृद्धि होती है। 
  2. शिकाकाई  तैलीय त्वचा से होने वाली रुसी लाभदायक होता है, इसकी फली के क्वाथ से बालों को धोने से रूसी से छुटकारा मिल जाता है | 
  3. शिकाकाई की फलियों का फाण्ट बनाकर 15-30 मिली फाण्ट का सेवन करने से श्वास तथा कास में लाभ होता है।
  4. 1-2 ग्राम शिकाकाई पाउडर का सेवन करने से सूखी खाँसी से जल्दी आराम मिलता है।
  5. शिकाकाई के पत्तों को पीसकर गुनगुना करके पेट में लगाने से आध्मान यानि पेट का गैस निकल जाता है और आराम मिलती है।
  6. शिकाकाई फलियों का काढ़ा बनाकर 10-30 मिली काढ़ा का सेवन कराने से उल्टी होना कम होता है साथ ही  बुखार और पीलिया यानि कामला में लाभ मिलता है।
  7. शिकाकाई के कोमल पत्तों का काढ़ा बनाकर 10-30 मिली मात्रा में पिलाने से यकृत्प्लीहा  में लाभ होता है।
  8. शिकाकाई के फल को पीसकर त्वचा पर लगाने से आराम मिलता है।

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