चक्रफूल (Star anise)
चक्रफूल, वियतनाम तथा दक्षिणी चीन में उगने वाला पौधा है इसका आकर तारे के जैसा होता है। इसके बीज प्रत्येक पुटक में एक, छोटे, चमकीले भूरे वर्ण के होते हैं। जिसके फल को चाय तथा पकवानों में मसाले की तरह प्रयोग में लाते हैं और इसका स्वाद सौंफ से कुछ मिलता जुलता है लेकिन दोनों का आपस में कोई सम्बन्ध नहीं है।इसका प्रयोग मसालों में किया जाता है।

चक्रफूल का उपयोग
प्रतिश्याय- 7 चक्रफूल का फाण्ट बनाकर पिलाने से प्रतिश्याय का शमन होता है।कर्णशूल- 1-2 बूँद चक्रफूल तैल को कान में डालने से कर्णशूल का शमन होता है।
दंतशूल- 1-2 बूंद चक्रफूल बीज तैल को दांतों में लगाने (स्थानिक प्रयोग) से दंतशूल का शमन होता है।
कास- चक्रफूल बीज तैल (1-2 बूंद) को छाती पर लगाने से कास में लाभ होता है।
1 ग्राम चक्रफूल में 2 ग्राम मुलेठी मिलाकर काढ़ा बनाकर पीने से कास तथा श्वास में लाभ होता है।
चक्रफूल के फल को पीसकर काली मिर्च मिलाकर शहद के साथ सेवन करने से शुष्क कास में अत्यन्त लाभ होता है।
आंत्रशूल- चक्रफूल फल का फाण्ट बनाकर पिलाने से आध्मान, प्रवाहिका, ऐंठन-युक्त आंत्रशूल तथा उदरशूल में लाभ होता है।
उदरशूल- चक्रफूल के तैल को बालकों के उदर पर मालिश करने से उदरशूल का शमन होता है।
चक्रफूल, सोंठ तथा जीरा का क्वाथ बनाकर पीने से उदरशूल तथा अजीर्ण में लाभ होता है।
सोंठ, चक्रफूल, दालचीनी तथा बड़ी इलायची को चूर्ण कर दूध में डालकर पीने से यह दूध का पाचन करता है तथा जठराग्नि को प्रदीप्त करता है।
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