सूरजमुखी (Sunflower)

     सूरजमुखी भारतवर्ष में लगभग सभी जगह पाये जाते हैं। सूरजमुखी के पौधे रोग उत्पन्न करने वाली आर्द्र तथा दुर्गन्धयुक्त वायु का शोषण करने की क्षमता रखते हैं। पृथ्वी से जो विष समान भाप उड़कर संक्रामक ज्वर के रूप से देश भर में फैलती है, उस विष रूपी भाप को सोखने की क्षमता सूरजमुखी के पौधे में है। इसके पौधे लगाने से वायु शुद्ध होती है तथा मलेरिया, संधिवात या अर्थराइटिस तथा आर्द्रता से उत्पन्न होने वाली बीमारियां नष्ट हो जाती हैं। सूरजमुखी फूल अमरीका का देशज है पर रूस, अमरीका, ब्रिटेन, मिस्र, डेनमार्क, स्वीडन और भारत आदि अनेक देशों में आज उगाया जाता है। इसका नाम सूरजमुखी इस कारण पड़ा कि यह सूर्य और ओर झुकता रहता है, हालाँकि प्राय: सभी पेड़ पौधे सूर्य प्रकाश के लिए सूर्य की ओर कुछ न कुछ झुकते हैं। सूरजमुखी का सूर्य की ओर झुकना आँखों से देखा जा सकता है। बागों में उगाए जाने वाले सूरजमुखी की उपर्युक्त प्रथम दो जातियाँ ही हैं। इसके पेड़ 1 मी. से 5 मी. तक ऊँचे होते हैं। इनके डंठल बड़े तुनुक होते हैं, हवा के झोंके से टूट जा सकते हैं। इसकी पत्तियाँ 7 सेमी से 30 सेमी लंबी होती है। कुछ सूरजमुखी एकवर्षी होते हैं और कुछ बहुवर्षी ; कुछ बड़े कद के होते हैं और कुछ छोटे कद के। सूरजमुखी का तेल सूरजमुखी के बीज से बनता है जिसके गुण अनगिनत हैं। सूरजमुखी के जड़, पत्ता, फूल,  बीज में विटामिन बी1, बी3, बी6, मैग्निशियम, फॉस्फोरस, प्रोटीन जैसे बहुत सारे पोषक तत्व हैं। इसलिए सूरजमुखी का प्रयोग आयुर्वेद में कई तरह के दवाईयों के लिए किया जाता है।

सूरजमुखी का उपयोग

  1.  सूरजमुखी के जड़ को पीसकर दांतों पर मलने से दांत का दर्द कम होता है।
  2. सूरजमुखी पत्र कल्क एवं स्वरस से सिद्ध तेल को 1-2 बूंद कान में डालने से कान का दर्द एवं पूतिकर्ण में लाभ होता है।
  3. सूरजमुखी पत्र स्वरस में थोड़ा सा त्रिकटु (सोंठ, काली मिर्च, पीपल) चूर्ण मिलाकर गुनगुनाकर, छानकर एक से दो बूंद कान में डालने से कान दर्द तथा कर्णस्राव आदि कर्ण विकारों का शमन होता है।
  4. सूरजमुखी का जड़ और लहसुन दोनों को पीसकर, गले पर लेप करने से गलगंड या घेंघा में लाभ होता है।
  5. सूरजमुखी के फूलों के रस की दस बूंदे दूध में डालकर पिलाने से पेट दर्द तथा आध्मान या अपच में लाभ होता है।
  6. सूरजमुखी के बीजों के तेल की एक बूंद नाभि में गिराने से रेचन क्रिया होकर पेट साफ हो जाता है।
  7. 1 से 3 ग्राम की मात्रा में सूरजमुखी के बीज खिलाने से पेट की कृमि निकल जाती है।
  8. 1½-3 ग्राम बीज चूर्ण में शक्कर मिलाकर दिन में दो बार दो दिन तक देते हैं और तीसरे दिन एरंड तेल का विरेचन देते हैं, पेट की कृमि निकालने में आसानी होती है।
  9. 3 ग्राम सूरजमुखी बीज चूर्ण लेकर, उसमें 3 ग्राम शक्कर मिलाकर प्रतिदिन सुबह शाम खाने से अर्श में लाभ होता है मगर आहार में घी, खिचड़ी और छाछ का ही प्रयोग करना चाहिए।
  10. 2 ग्राम सूरजमुखी के जड़ को गाय के दूध में पीसकर पिलाने से अश्मरी या पथरी टूटकर निकल जाती है।
  11. सूरजमुखी के जड़ को चावल के मांड में घिसकर योनि में लगाने से योनि यानि वैजाइना का जलन कम होता है।
  12. सूरजमुखी के पत्तों को पीसकर उपदंशज वाले घाव में लगाने से जल्दी सूख जाता है।
  13. 3 ग्राम सूरजमुखी के बीजों को 200 मिली दूध में उबालकर मिश्री मिलाकर पीने से कामशक्ति बढ़ती है।
  14.  सूरजमुखी के पत्तों को पीसकर कमर पर लगाने से कमर का दर्द कम होता है।
  15. सूरजमुखी के तेल में कपूर मिलाकर खुजली में लगाने से लाभ होता है।
  16. सूरजमुखी के पत्तों के रस में ही इसके बीजों को पीसकर मस्तक पर दो तीन दिन तक लेप करने से, सिरदर्द कम होता है।
  17. सूरजमुखी के पत्तों का काढ़ा बनाकर अल्सर के घाव को धोने से लाभ होता है।
  18. सूरजमुखी मूल का काढ़ा बनाकर 20 मिली मात्रा में सुबह-शाम पिलाने से बुखार कम होता है।
  19. इसकी जड़ को कान में बाँधने से ज्वर छूट जाता है।
  20. सूरजमुखी के पत्ते और काली मिर्च को समभाग पीसकर काली मिर्च के बराबर गोलियां बना लें। इन गोलियों में से 1-1 गोली तीन दिन तक सुबह, दोपहर तथा शाम देने से शीतज्वर में लाभ होता है।
  21. 20-30 मिली पत्ते के काढ़े को दिन में दो बार पिलाने से पैराटायफॉयड (मोतीझरा) ज्वर में लाभ होता है।
  22. सूरजमुखी पञ्चाङ्ग चूर्ण में त्रिकटु मिलाकर सेवन करने से तथा बाद में चावल तथा घी खिलाने से सांस संबंधी रोग या अस्थमा में लाभ होता है।
  23. सूरजमुखी के बीजों को अंकुरित कर खाया जा सकता है, इससे कोलेस्ट्राल की मात्रा नियंत्रित रहती है।

Comments

Popular posts from this blog

वेत्र (Common rattan)

खैर या खादिर (Black Catechu)

नींबू (Lemon)