मयूरशिखा (Peacock’s tail)

     मयूरशिखा एक पौधा है जिसका फूल मोर (या मुर्गे) के शिखा जैसा दिखता है। इसलिए हिन्दी में इसे 'मुर्गे का फूल' या 'लाल मुर्गा' भी कहते हैं। यह पौधा घर के अन्दर और बाहर समान रूप से उगाया जा सकता है। इस पौधे का उपयोग प्रायः सजाने के लिए किया जाता है। इसकी पत्तियाँ और फूल सब्जी के रूप में भी प्रयुक्त होते हैं। भारत, पश्चिमी अफ्रीका, दक्षिणी अफ्रीका में सब्जी के रूप में इनकी खेती होती है।

मयूरशिखा का उपयोग

  1. कण्ठजलन-पर्णांगपत्रों को चबाकर खाने से कण्ठदाह (गले की जलन) का शमन होता है।
  2. राजयक्ष्मा-(500 मिग्रा) शुष्क पर्णांगपत्रों का सेवन करने से (राजयक्ष्मा) में लाभ होता है।
  3. अतिसार-मयूरशिखा का क्वाथ बनाकर 10-20 मिली मात्रा में पिलाने से अतिसार का शमन होता है।
  4. शर्कराश्मरी-मयूरशिखा मूल चूर्ण (1 ग्राम) या कल्क (1 ग्राम) का सेवन चावल के धोवन के साथ करने से तथा इस अवधि में केवल दूध का सेवन करने से अश्मरी के कारण होने वाली वेदना का शमन होता है।
  5. सूतिकाशोथ-मयूरशिखा मूल तथा हरीतकी से निर्मित क्वाथ (10-15 मिली) का सेवन करने से सूतिकाशोथ तथा वेदना में लाभ होता है।
  6. पर्णांग पत्र का क्वाथ बनाकर 15-20 मिली मात्रा में पीने से त्रीरोगों में लाभ होता है।
  7. त्वक् विकार-पर्णांगपत्र को पीसकर लेप करने से दाह, खुजली, तप्तद्रवदग्ध तथा व्रण में लाभ होता है।
  8. रक्तस्राव-मयूरशिखा को पीसकर लेप करने से क्षत जन्य रक्तस्राव का स्तम्भन होता है।

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