मिर्च (Chilli)

     मिर्च कैप्सिकम वंश के एक पादप का फल है। वनस्पति विज्ञान में इस पौधे को एक बेरी की झाड़ी समझा जाता है। स्वाद, तीखापन और गूदे की मात्रा, के अनुसार इनका उपयोग एक सब्जी (शिमला मिर्च) या एक मसाले (लाल मिर्च) के रूप में किया जाता है। मिर्च प्राप्त करने के लिए इसकी खेती की जाती है।भारतीय उपमहाद्वीप में मिर्च का उपयोग अचार के रूप में बहुतायत में किया जाता है। मिर्च का जन्म स्थान दक्षिण अमेरिका है जहाँ से यह पूरे विश्व में फैली। अब इनकी विभिन्न किस्में पूरे विश्व में उगायी जा रही हैं। मिर्च का प्रयोग एक औषधि के रूप में भी होता है। मिर्ची का तीखापन केप्सेसिन के कारण होता है। मिर्ची का लाल रंग केप्सेन्थिन के कारण होता है। मिर्च खाने से विटामिन ए प्राप्त होता है। इसके तीखे प्रकृति के कारण यह लार निकलने में मदद करता है और खाने को हजम करने में मदद करता है। 

मिर्च के उपयोग 

  1. शक्कर और बादाम के साथ थोड़ी-सी लाल मिर्च को मिलाकर 125 मिग्रा की गोली बनाकर सेवन करने से स्वरभंग में लाभ होता है।
  2. 1 लीटर पानी में 10 ग्राम पिसी हुई मिर्च (मिर्च ज्यादा तेज हो तो 5 ग्राम या आवश्यकतानुसार कम ज्यादा करें) डालकर काढ़ा या हिमफाण्ट बना लें, इस पानी का कुल्ला करने से मुखपाक (मुँह में घाव और सूजन) तथा गले में दर्द  से जल्दी राहत मिलती है। (मिर्च का अधिक सेवन पित्त-प्रकृति वाले व्यक्तियों के लिए हानिकारक है।
  3. 100 ग्राम गुड़ में 1 ग्राम लाल मिर्च चूर्ण मिलाकर 1-2 ग्राम की गोली बना के सेवन करने से उदरशूल या पेट दर्द से राहत मिलती है।
  4. आधा ग्राम लाल मिर्च चूर्ण को 2 ग्राम शुंठी चूर्ण के साथ मिलाकर सेवन करने से खाने की इच्छा बढ़ने के साथ , पेट के दर्द और आध्मान (Flatulance) में लाभ होता है।
  5. पित्त प्रकोप के कारण जिसको भोजन के प्रति अरुचि उत्पन्न हो गई हो, भूख न लगती हो तो आवश्कतानुसार मिर्च बीज तेल की 5-10 बूंद को बतासे में भरकर या शक्कर के साथ खाने से अत्यन्त लाभ होता है।
  6. लाल मिर्च के बीज अलगकर छिल्कों को महीन पीसकर कपड़े से छान कर थोड़ा कपूर और हींग मिला लें (हींग और कूपर के अभाव में केवल मिर्च ही ले लें)। इन तीनों को शहद में घोटकर 125-250 मिग्रा की गोलियाँ बना लें। सुबह शाम 1-1 गोली सेवन करने से विसूचिका या हैजा में लाभ होता है।
  7. विसूचिका में प्रत्येक उल्टी और दस्त के बाद, रोगी को 1/2 चम्मच मिर्च तेल पिलाने से 2-3 बार में ही रोगी को आराम हो जाता है।
  8. लाल मिर्ची को बारीक पीसकर, बेर जैसी गोलियाँ बनाकर रख लें। विसूचिका के रोगी को 1-1 घन्टे के अन्तर से 1-1 गोली व लौंग सात नग देने से विसूचिका की प्रत्येक दशा में आराम हो जाता है।
  9. पाँच लाल मिर्च चूर्ण तथा सात बताशे के चूर्ण को जल में घोल कर, शर्बत बनाकर थोड़ी-थोड़ी देर पर सेवन करने से विसूचिका में लाभ होता है।
  10. पुरानी अपांप्म, हींग, मरिच, कर्पूर तथा लाल मिर्च बीज चूर्ण को मिलाकर 125 मिग्रा की वटी बनाकर 1-1 वटी का सेवन करने से विसूचिका एवं अतिसार या दस्त से जल्दी आराम मिलती है।
  11. भोजन के साथ मिर्च का सेवन करने से अजीर्ण (अपच), आध्मान (पेट फूलना) तथा विसूचिका (हैजा) में लाभ होता है।
  12. मिर्च बीजों के एक बूँद तेल को बतासे में डालकर, लस्सी के साथ खाने से प्रमेह में बहुत लाभ होता है।
  13. ईसबगोल की 3 ग्राम भूसी पर इसके तेल की 5-10 बूंदें मिलाकर जल के साथ देने से पित्तज-मूत्रकृच्छ्र में लाभ होता है।
  14. बरसात के मौसम में होने वाले फोड़े-फुन्सियां और खुजली इत्यादि इसके तेल के सेवन से फौरन ठीक हो जाते हैं।
  15. गर्मी के मौसम में शरीर पर जो फुन्सियां हो जाती हैं, उन पर लाल मिर्च के बीजों का तेल लगाने से शीघ्र आराम हो जाता है।
  16. 500 मिग्रा लाल मिर्च के बीजों के महीन चूर्ण को 50 मिली गुनगुने पानी के साथ दिन में 2-3 बार देने से शराब पीने के कारण जो सन्निपातज ज्वर होता है उसमें लाल मिर्च का सेवन फायदेमंद होता है। 
  17. शूल या दर्द, कटिशूल या कमरदर्द , पार्श्वशूल और गृध्रसी (Sciatica) में मिर्च तेल की मालिश करने से अथवा जले हुए फलों का लेप लगाने से लाभ होता है।
  18. डिप्थीरिया तथा कंठ शालूक में भी इसका लेप करते हैं।
  19. लाल मिर्च बीज के तेल को खाज खुजली एवं ततैया के काटने पर उस स्थान पर लगाने से आराम मिलता है।
  20. लाल मिर्च के तेल से मालिश करने से आराम मिलता है। लाल मिर्च के बीज के तेल की मालिश आमवात में भी लाभदायक होता है।
  21. बुखार में यदि बच्चे को हवा लगकर पैरों में लकवे की आशंका हो तो मिर्च के महीन सूखे चूर्ण में तेल मिलाकर मालिश करने से लाभ होता है।
  22. कुत्ते के काटे हुए स्थान पर मिर्ची को जल में पीसकर लेप करने से दर्द कम होता है।
लाल मिर्च का तेल बनाने की विधि-125 ग्राम सूखी लाल मिर्चों को आधा लीटर तिल तेल में पकाएं, जब मिर्च काली पड़ जाए तो तेल छानकर शीशी में भर लें।

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