करमी (Chinese water spinach)
कलमी शाक एक लता है जो अर्धजलीय उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में उगती है। इसको पत्तेदार सब्जी के रूप में प्रयोग किया जाता है। इसको 'करेमू', 'करमी', 'केरमुआ', 'नारी' और 'नाली' भी कहते हैं। यह लता जल के ऊपर या नम भूमि पर पैदा होकर पसरती है। इसकी लता २-३ मीटर या इससे भी बहुत बड़ी होती है। तना खोखला होता है। तथा तने में ग्रंथियाँ होती हैं जहाँ से जड़ निकलकर नया पौधा भी बनता है । इसकी लता को तोड़-तोड़कर आर्द्र भूमि में गाड़ देने से या जल में फेंक देने से नवीन पौधा तैयार हो जाता है। करेमु या कलम्बी साग मीठी और थोड़ी कड़वी, प्रकृति से ठंडे तासीर की, हजम करने में भारी होती है और संरचना में थोड़ी रुखी होती है। कलम्बी वात और कफ को कम करने वाली, ब्रेस्ट का साइज बढ़ाने में, शुक्र या स्पर्म का काउन्ट बढ़ाने में मदद करती है। कलम्बी देर से पचने वाली होती है।
करमी के उपयोग
- कलमी के पत्ते का रस आँखों के चारो ओर ओर लगाने से अभिष्यंद ठीक होता है।
- 1-2 ग्राम कलम्बी साग पञ्चाङ्ग चूर्ण का सेवन करने से सांस की तकलीफ में लाभ होता है।
- 10 मिली कलमी के पत्ते का काढ़ा दिन में दो बार सेवन करने से खांसी में फायदा मिलता है।
- 2 चम्मच करेमु के पत्ते के रस में 1 बादाम गिरी को पीसकर मिलाकर, प्रतिदिन सुबह शाम सेवन करने से अर्श या पाइल्स में लाभ होता है।
- करेमु के नये खिले हुए फूल के कलियों को पीसकर दाद के प्रभावित स्थान में लगाने से लाभ होता है।
- एक चम्मच करेमु पत्ते के रस को बादाम के साथ मिलाकर प्रतिदिन दो बार सेवन करने से गलगण्ड, श्लैष्मिक शोफ, राइटर्स क्रेम्प तथा अत्यधिक पसीना में लाभ होता है।
- 10 मिली करेमु के पत्ते के काढ़े का सेवन करने से मूत्राश्मरी टूट-टूट कर निकल जाती है।
- करेमु पञ्चाङ्ग का सेवन करने से सामान्य दुर्बलता तथा तंत्रिका कमजोरी (नर्व) में लाभ होता है।
- आयुर्वेद के अनुसार अफीम के प्रभाव को कम करने में कलम्बी के पत्तो का शाक फायदेमंद होता है।
- वामक होने से पत्ते के रस का प्रयोग अपांप्म तथा संखिया विषाक्तता की चिकित्सा में किया जाता है अथवा 2 चम्मच पत्ते के रस में दो चम्मच बैंगन पत्ते का रस मिलाकर इसका प्रयोग किया जाता है।
- करेमु पत्रों का शाक बनाकर खाने से अपांप्म का विष शान्त होता है।
- करेमु के पत्ते का रस वामक होता है यानि इसको ज्यादा खाने से दस्त होने की संभावना होती है। अत: अत्यधिक मात्रा में इसका सेवन नहीं करना चाहिए।

Comments
Post a Comment