लोहबान (Frankincense)

     लोहबान या लोबान एक पेड़ का सम्ख़ (गोंद या लासा) है जो सुगंधित होता है। इसका उपयोग अगरबत्ती और इत्र आदि में होता है। लोहबान का रंग पीला और भूरा होता है। खांसी या अन्य रोग को ठीक करने के लिए लोबान के धूप का काफी उपयोग करते हैं। पूजा-पाठ आदि में भी लोहबान को जलाया जाता है। लोहबान का वृक्ष विशाल अथवा मध्यमाकार होता है। इसके फूल सफेद रंग के, रोमयुक्त होते हैं। फूल का रंग हल्का बैंगनी और लाल होता है। इस वृक्ष की छाल में चीरा लगाने से जो दूध प्राप्त होता है। उसे लोहबान कहते हैं। लोहबान में दूसरे वस्तुओं की मिलावट भी की जाती है। उत्तम लोहबान बादाम के रंग का चौकोर टिकियों में होता है।

लोहबान का उपयोग

  1.  त्वचा रोग होने पर लोहबान को पीस लें। इसे बीमार त्वचा पर लगाएं। इससे लाभ होता है।
  2. पुरानी खांसी, दमा, टीबी की बीमारी हो या फिर साधारण जुकाम। सभी में लोहबान का धूप फायदेमंद होता है। रोगी को लोहबान का धुआं सूंघना चाहिए। इससे लाभ होता है।
  3. मिट्टी के बर्तन में पानी रखें। लोहबान को जलाकर इसके धूप से पानी को गुनगुना कर लीजिए। इसे पीने से उल्टी रुक जाती है।
  4. 12 ग्राम लोहबान में 4 ग्राम सर्जररस मिलाकर, चंदन के तेल से पीस लें। इसकी 1-1 ग्राम की वटी बना लें। 1-1 वटी को अनार रस के साथ सेवन करने से सिफलिस रोग में लाभ होता है। औषधि का सेवन करने के दौरान तेल, खट्टा, नकम, दूध, बैंगन, गुड़ आदि का सेवन नहीं करना चाहिए।
  5. लोहबान से एक बत्ती (पेस्ट जैसा) बना लें। इसे योनि में रखें। इससे प्रसव के बाद गर्भाशय से होने वाले रक्तस्राव की परेशानी ठीक में मदद मिलती है।
  6. लोहबान को पीसकर गठिया वाले स्थान पर लेप करें। इससे गठिया में लाभ मिलता है।
  7. लोहबान को पीस लें। अब लोहबान को तेल में पका लें। इसे ठंडा करके छान लें। इससे मालिश करने से वातविकार ठीक होता है।
  8. लोबान की सुगंध  मानसिक थकावट को दूर कर डिप्रेशन के लक्षणों को कम करती है।
  9. लोबान की सुगंध दिमाग को शांत करने में मदद करती है। 
  10. 6-6 ग्राम शुण्ठी, सेमल निर्यास, 3-3 ग्राम अस्थि शृंखला तथा अकरकरा, 12 ग्राम लोहबान के साथ 48 ग्राम तिल लें। इन सबके बराबर मिश्री मिला लें। इसे पीस कर चूर्ण बना लें। इसे 2-3 ग्राम की मात्रा में मिश्री युक्त दूध के साथ सेवन करें। इससे शारीरिक कमजोरी दूर होती है, और वीर्य की वृद्धि होती है।
  11. बराबर मात्रा में शाल्मली निर्यास तथा लोहबान के चूर्ण (750 मिग्रा) को मिश्री युक्त दुग्ध के साथ पीने से शरीर की शक्ति बढ़ती है।

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