दमनक (Indian wormwood)

     दमनक झाड़ीनूमा पौधा होता है। आयुर्वेद में इसके औषधीय गुण अनगिनत होने के कारण सदियों से इसका प्रयोग विभिन्न प्रकार के रोगों के लिए किया जाता है। दमनक का सुगंधित पौधा दर्दनिवारक की तरह काम करता है। दमनक की झाड़ी 1.8-2.4 मी ऊंचा, सुगन्धित, झाड़ी जैसा बहुवर्षायु शाकीय पौधा होता है। इसकी शाखाएं अंगुलियों के समान मोटी, गुच्छेदार, सफेद  रोमवाली अथवा घना रोमिल जैसा होती है। इसके पत्ते बड़े, अण्डाकार, 1-2 भागों में विभाजित, ऊपर-पीछे की ओर स्पष्ट रोमश, अधपृष्ठ-सफेद रंग के घने रोमवाली; ऊपर की ओर छोटे, 3 भागों में विभाजित अथवा पूर्ण, रेखित भालाकार होते हैं। इसके फूल ऊपर की ओर 3-4 मिमी लम्बे, अण्डाकार अथवा लगभग गोलाकार, एकल अथवा 2 अथवा 1-3 साथ में, वृंतहीन अथवा छोटे पुष्पवृंत वाले होते हैं। इसके फल दीर्घायु-नुकीले अण्डाकार, छोटा, अल्परेखित होते हैं। इसका पुष्पकाल एवं फलकाल अगस्त से फरवरी तक होता है। इसकी जड़ बलकारक एवं पूयरोधी यानि एंटीसेप्टिक होती है।

दमनक के उपयोग

  1. दमनक पत्ते के रस के 1-2 बूंद को कान में डालने से कान दर्द से राहत मिलती है।
  2. 5-10 मिली दमनक के पत्ते का काढ़ा पिलाने से बच्चे की खांसी दूर होने में मदद मिलती है।
  3.  5-10 मिली दमनक पत्ते के रस  का सेवन करने से जलशोफ में लाभ होता है, लेकिन सेवन का तरीका सही होना लाजमी होता है।
  4. दमनक का काढ़ा बनाकर 10-15 मिली मात्रा में पीने से पेट की कृमियों तथा पेट दर्द से राहत पाने में मदद मिलती है।
  5. दमनक के पत्ते के काढ़े में 1 ग्राम दालचीनी चूर्ण डालकर पिलाने से पेट दर्द दूर होता है।
  6. पौधे से बने काढ़े में 10-20 मिली मात्रा में पिलाने से पेट संबंधी समस्या में लाभ मिलता है।
  7. पत्तों का काढ़ा बनाकर 10-15 मिली मात्रा में पिलाने से जठराग्नि बढ़ती है।
  8. 10-20 मिली दमनक पत्ते के काढ़े में 65 मिग्रा हींग चूर्ण डालकर पिलाने से आंतों के कृमि मर जाते हैं। इससे कृमि होने की समस्या धीरे-धीरे नष्ट होने लगती है।
  9. दमनक के तेल में शर्करा मिलाकर प्रयोग करने से पीलिया तथा अन्य यकृत्-विकारों में लाभ होता है।
  10. पत्तों को पीसकर पेट पर लगाने से यकृत्विकार का शमन होता है तथा पत्रों का काढ़ा बनाकर बफारा देने से भी यकृत् के विकारों का शमन होता है।
  11. दमनक के वायवीय-भागों से बने चूर्ण (1 ग्राम) में सूखे आर्दक चूर्ण मिलाकर, काढ़ा बनाकर प्रयोग करने से गर्भाशय के दर्द से राहत पाने में लाभ होता है।
  12. फूल के आगे के भाग एवं पत्ते से बने फाण्ट (10-20 मिली) का सेवन करने से मासिक धर्म संबंधी बीमारियों तथा रजोनिवृत्तिजन्य (मेनोपॉज)-विकारों में लाभ होता है।
  13. पत्तों को पीसकर लेप करने से रक्त का स्तम्भक और घाव जल्दी भरता है।
  14. किसी बीमारी के कारण एलर्जी से परेशान हैं तो पौधे को पीसकर लेप करने से अनूर्जता में लाभ होता है।
  15. दमनक का अर्क कंपवात के असर को धीरे-धीरे कम करने में लाभदायक होता है। इसको बच्चों के सिर पर लगाने से राहत मिलती है।
  16. दमनक के पत्तों का काढ़ा बनाकर 10-20 मिली मात्रा में पिलाने से ज्वर से राहत मिलने में आसानी होती है।10 ग्राम पत्तो में 10 ग्राम शतावरी जड़ को मिलाकर उसका काढ़ा बनाएं और इस काढ़े को 10-20 मिली मात्रा में पिलाने से शारीरिक बल बढ़ता है।

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