चम्पा (Magnolia)

     चम्पा के वृक्ष बड़े और बहुत ही सुन्दर होते हैं। चम्पा के फूल पीले रंग के होते हैं जो बहुत ही सुगन्धित होते हैं। यह एक जड़ी-बूटी भी है। आयुर्वेद के अनुसार, चम्पा के औषधीय गुण से सिर दर्द, कान दर्द, आंखों की बीमारियों में फायदा  ले सकते हैं। मूत्र रोग, पथरी या बुखार होने पर भी चम्पा के औषधीय गुण से लाभ मिलता है। चम्पा के वृक्ष लगभग 6 से 8 मीटर ऊँचा होते हैं। ये वृक्ष हमेशा हरा रहते हैं। वृक्ष के तने सीधे, बेलनाकार, गहरे भूरे या भूरे रंग के होत हैं। इसके पत्ते सीधे, 10-30 सेमी लम्बे, 4 से 10 सेमी चौड़े, नुकीले, चिकने और चमकीले होते हैं। चम्पा के फूल सुंदर और बहुत ही अधिक सुगन्धित होते हैं। फूल हल्के पीले रंग के होते हैं। इसके फल 7.5 से 10 सेमी लम्बे, अण्डाकार या नुकीले अण्डाकार होते हैं। फल गहरे भूरे रंग के होते हैं।

चम्पा के उपयोग

  1. चम्पा के फूल के तेल को सिर पर लगाएं। इसे लगाने से सिर दर्द मिटता है।
  2. चम्पा के कोमल पत्तों को पीस लें। इसे पानी में मिलाकर छान लें। इसे 1-2 बूंद की मात्रा में आंखों में डालने से आंखों की बीमारियों और सूजन में लाभ मिलता है। 
  3. चम्पा के फूल के रस को हल्का गुनगुना कर लें। इसे 1-2 बूंद कान में डालें। इससे कान दर्द ठीक हो जाता है।
  4. चम्पा की छाल का 1-2 ग्राम चूर्ण बना लें। इसमें शहद मिलाकर चाटने से सूखी खांसी खत्म हो जाती है।
  5. चम्पा के तेल में तिल का तेल मिला लें। इसे सफेद दाग पर लगाने से लाभ होता है।
  6. चम्पा के फलों और फूलों को पीस लें। इसे सफेद दाग में डालने से लाभ होता है।
  7. चम्पा के 5-10 फूलों को पीसकर ठंढई की तरह पिलाएं। इसे मूत्र रोग जैसे पेशाब में दर्द होना, पेशाब रुक-रुक कर होने आदि में फायदा मिलता है। इसके साथ ही गुर्दे के रोग भी खत्म होते हैं।
  8.  500 मिग्रा चम्पा की जड़ और फूल को बकरी के दूध के साथ पीस लें। इसे पीएं। इससे मूत्राशय की छोटी पथरी निकल जाती है।
  9. 5 मिली चम्पा के पत्ते के रस में मधु मिलाकर सेवन करने से पेट का दर्द ठीक होता है।
  10. चम्पा के फूलों का काढ़ा बना लें। 10-20 मिली मात्रा में काढ़ा को पिलाने से पेट दर्द ठीक होता है।
  11. चम्पा के बीजों से तेल निकाल लें। इससे पेट पर मालिश करने से पेट फूलने या गैस की समस्या में लाभ होता है।
  12. चम्पा के ताजा पत्ते को पीस कर 5-10 मिली रस निकाल लें। इसमें शहद मिलाकर पिलाने से पेट के कीड़े निकल जाते हैं।
  13. चम्पा के पत्ते, जाती फूल और मुलेठी से पेस्ट बना लें। इसे 1-2 ग्राम की मात्रा में लेकर घी में मिला लें। इसे गुनगुना करके योनि में लेप करें। इससे योनि की दुर्गन्ध (बदबू) दूर होती है।
  14. चम्पा की छाल को पीस लें। इसे गुनगुना कर बीमार अंग पर लगाएं। इससे दर्द और सूजन ठीक होती है।
  15. चम्पा के फूलों और फलों को पीस लें। इसे सिफलिश वाले घाव पर लगाएं। इससे बहुत लाभ होता है।  
  16.  चम्पा की जड़ और छाल को पीसकर घाव और सूजन वाले अंग पर लगाएं। इससे सूजन ठीक हो जाती है, और घाव जल्दी भर जाता है।
  17.  गठिया वाले अंग पर चम्पा के पत्तों को पीसकर बांधें। इससे गठिया में फायदा होता है। आप चम्पा के फूल का तेल भी लगा सकते हैं।
  18. पैरों की एड़ियां फटने (बिवाई होने) पर चम्पा के इस्तेमाल से लाभ होता है। चम्पा के तेल में तिल का तेल मिला लें। इससे बिवाई का इलाज होता है।
  19. चम्पा के फलों और फूलों को पीसकर पैरों की त्वचा या एड़ी पर लगाएं। इससे पैरों की बिवाई (एड़ी का फटना) ठीक हो जाती है।
  20. पित्त दोष के कारण होने वाले मैनिया रोग में चम्पा के इस्तेमाल से लाभ होता है। मैनिया की बीमारी के इलाज के लिए चम्पा के 4 ताजा फूलों को शहद में मिलाकर खाएं। 
  21. चम्पा की छाल का काढ़ा बना लें। इसे 10-15 मिली मात्रा में पिलाने से बुखार ठीक हो जाता है। 
  22. चम्पा के फूलों को पीस लें। इसमें 1-2 बूंद नींबू का रस मिला लें। इसे चेहरे पर लगाने से झांई मिटती है।
  23. सफेद जाति की चम्पा के फूल की कलियों को पानी के साथ घिस लें। इसे पिलाने से सांप के काटने के कारण होने वाले दर्द, सूजन जैसे दुष्प्रभावों में लाभ होता है।

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