मक्का (Maize)
मक्का एक प्रमुख खाद्य फसल हैं, जो मोटे अनाजो की श्रेणी में आता है। इसे भुट्टे की शक्ल में भी खाया जाता है। आयुर्वेद में मक्का के औषधीय गुणों के आधार पर यह विभिन्न बीमारियों के उपचार में काम करता है। मक्का बहुत ही पौष्टिक होता है। भुट्टे के कोमल बाल दर्द कम करने वाला और मूत्र को बढ़ाने वाला होता है। इसके अलावा सूजाक या गोनोरिया, सूजन और पथरी में इनका काढ़ा बनाकर पिलाया जाता है। मक्का प्रकृति से मधुर, ठंडा, रूखा, खाकर मन संतुष्ट करने वाला, पित्त का स्राव बढ़ाने वाला , मूत्र बढ़ाने वाला, पोषक, शक्ति बढ़ाने वाला, खाने की इच्छा बढ़ाने वाला, बलवर्धक, कफ और पित्त कम करने वाला होता है। कच्चा मक्का पुष्टिकारक तथा रुचिकारक होता है। मक्का हृदय की पेशियों को उत्तेजित करता है, रक्तचाप बढ़ाता है, मूत्र संबंधी बीमारियों में औषधियों की तरह काम करता है एवं पाचन तंत्र को बेहतर करता है। मक्के की रेशमी वर्तिका या बत्ती-स्तम्भक (Styptic), मूत्र कम होने पर बढ़ाने में भी मदद करता है। इसके बीज विलायक (Resolvent), शोथ या सूजन तथा दर्द को कम करने वाला व स्तम्भक होते हैं। 

मक्का के उपयोग
- डिप्थीरिया से राहत दिलाने में भुट्टा का सेवन बहुत ही फायदेमंद होता है।
- भुने मक्के का सेवन करने से खाँसी से राहत मिलती है।
- मक्के के दानों का काढ़ा बनाकर, कमर से स्नान करने से बवासीर में लाभ होता है।
- मक्के की वर्तिका (बत्ती) को पीसकर सेवन करने से यकृत् तथा पाचन संबंधी बीमारी में लाभ होता है।
- मक्के के बीजों तथा मक्के की रेशमी वर्त्तिका से बने विविध योगों का सेवन करने से गुर्दे या किडनी की सूजन, मूत्राशय में सूजन तथा मूत्र संबंधी बीमारी से जल्दी राहत मिलने में मदद मिलती है।
- मक्के की भस्म (65 मिग्रा) को (1 गिलास) जल में घोलकर सेवन करने से वृक्क (किडनी) एवं मूत्राशयगत अश्मरी (पथरी)में लाभ होता है।
- मक्के की वर्तिका (Style) का काढ़ा बनाकर 10-20 मिली मात्रा में सेवन करने से मूत्राशय संबंधी बीमारी से राहत मिलती है।
- मक्के का काढ़ा बनाकर 15-20 मिली मात्रा में सेवन करने से मूत्रदाह तथा मूत्रत्याग के समय होने वाले दर्द से राहत मिलती है।
- मक्कों के दानों से बने विविध प्रकार के भक्ष्य का सेवन करने से टी.बी. (राजयक्ष्मा) व रात को बिस्तर पर पेशाब करने की बीमारी में लाभ होता है।
- सूखे वर्तिका से बने भस्म को रक्तस्राव वाले स्थान पर रखने से रक्त रुक जाता है।
- मक्के को भूनकर या मक्के के विभिन्न भक्ष्य बनाकर सेवन करने से कमजोरी दूर होने के साथ-साथ तथा शरीर पुष्ट होता है।
- प्रोटीन की कमी से उत्पन्न सूखा रोग में प्रचुर मात्रा में मक्के का सेवन लाभकारी होता है।
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