ककड़ी (Serpent cucumber)

     ककड़ी ज़ायद की एक प्रमुख फसल है। इसको संस्कृत में 'कर्कटी' तथा मारवाडी भाषा में वालम काकरी कहा जाता है। विश्वास किया जाता है कि ककड़ी की उत्पत्ति भारत से हुई। इसकी खेती की रीति बिलकुल तरोई के समान है, केवल उसके बोने के समय में अंतर है। यदि भूमि पूर्वी जिलों में हो, जहाँ शीत ऋतु अधिक कड़ी नहीं होती, तो अक्टूबर के मध्य में बीज बोए जा सकते हैं, नहीं तो इसे जनवरी में बोना चाहिए। ऐसे स्थानों में जहाँ सर्दी अधिक पड़ती हैं, इसे फरवरी और मार्च के महीनों में लगाना चाहिए। इसकी फसल बलुई दुमट भूमियों से अच्छी होती है। इस फसल की सिंचाई सप्ताह में दो बार करनी चाहिए। ककड़ी में सबसे अच्छी सुगंध गरम शुष्क जलवायु में आती है। इसमें दो मुख्य जातियाँ होती हैं - एक में हलके हरे रंग के फल होते हैं तथा दूसरी में गहरे हरे रंग के। इनमें पहली को ही लोग पसंद करते हैं।

ककड़ी के उपयोग

  1. ककड़ी के ताजे फलों के टुकड़ों को आंखों पर लगाएं। इसे रखने से आंखों का दर्द ठीक होता है।
  2. 2-3 ग्राम ककड़ी के बीजों को पीसकर, जल में घोल लें। इसे नमक-रहित या हल्का नमक मिलाकर सेवन करें। इससे पेशाब में दर्द होने की समस्या में लाभ होता है।
  3. ककड़ी, खीरा तथा कुसुम्भ के बीजों को पीस लें। इसे 2 ग्राम चूर्ण में 1 ग्राम वासा पत्ते का पेस्ट तथा 5 मिली अंगूर का रस मिला लें। इसे पीने से पेशाब में दर्द होने की समस्या में लाभ होता है।
  4. आप ककड़ी का ठंडा काढ़ा बनाकर पिएं। इससे पेशाब से जुड़ी सभी प्रकार की समस्याएं ठीक होती हैं।
  5. 2-5 ग्राम ककड़ी के बीज के चूर्ण में मुलेठी तथा देवदारु मिला लें। इसे चावल के धोवन के पिएं। इससे पेशाब में दर्द होने की समस्या में लाभ होता है।
  6. ककड़ी के 5-10 ग्राम पेस्ट और रस (5-10 मिली) को सुबह दूध के साथ पिएं। इससे पेशाब संबंधी रोगों में लाभ होता है।
  7. ककड़ी के बीज के चूर्ण (5-10 ग्राम) को सुबह दूध के साथ पीने से पेशाब संबंधी रोगों (मूत्र-रोग) में लाभ होता है।
  8. ककड़ी बीज, मुलेठी तथा दारुहल्दी की छाल को पीसकर पेस्ट बना लें। 5-10 ग्राम पेस्ट को चावल के धोवन के साथ पीने से पेशाब के न आने की समस्या में लाभ होता है।
  9. बराबर-बारबर मात्रा में नरसल, पाषाणभेद, दर्भ, ईख, खीरा, ककड़ी के बीज तथा विजयसार का चूर्ण लें। इसमें आठ गुना दूध तथा बत्तीस गुना जल मिला लें। इसमें दूध बचने तक पकाएं। अब दूध में चौथाई भाग घी मिलाकर पिएं। इससे पेशाब के न आने की समस्या में लाभ होता है।
  10. ककड़ी के 5 ग्राम बीजों को जल के साथ पीसकर 65 मिग्रा यवक्षार मिला लें। इसे पिलाने से पेशाब में जलन की समस्या ठीक होती है।
  11. त्रिफला, ककड़ी (खीरा) के बीज और सेंधा नमक को समान मात्रा में लें। इनका चूर्ण बना लें। इसे 1-2 ग्राम चूर्ण को गुनगुने जल के साथ पिलाने से पेशाब में दर्द होने की समस्या से आराम मिलता है।
  12. 2-5 ग्राम ककड़ी के बीज के पेस्ट में सेंधा-नमक मिला लें। इसे कांजी के साथ पीने से पेशाब संबंधी रोग जैसे पेशाब में दर्द होने पर बहुत लाभ होता है।
  13. पोई-शाक, सरसों, नीम, केला, कर्कारु तथा ककड़ी के क्षार जल में तिल के तेल को पका लें। इसमें सेंधा नमक डालकर प्रभावित स्थान पर मालिश करें। इससे कुष्ठ रोग में लाभ होता है।
  14. ककड़ी के 5 ग्राम बीजों को पीस लें। इसमें 10 ग्राम मिश्री मिलाकर 50 मिली जल में घोल लें। इसे पिलाने से पथरी टूट-टूट कर निकल जाती है।
  15. 5 ग्राम कर्कटी (ककड़ी) की जड़ को 100 मिली दूध में पका लें। इसे छानकर पीने से गर्भवती महिलाओं को होने वाले दर्द से आराम मिलता है।
  16. ककड़ी फल के रस को मुंह पर लगाएं। इससे कील-मुंहासे आदि दूर होते हैं।
  17. ककड़ी फल के रस को मुंह पर लगाएं। इसे चेहरे पर लगाने से चेहरे का रंग निखर जाता है।
  • शीत प्रधान गुण होने से ककड़ी का सेवन अत्यधिक मात्रा में नहीं करना चाहिए।  इसका अधिक सेवन करने से यह वात दोष का कारण बन सकती है।

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