रुद्राक्ष (Utrasum bead)

     रुद्राक्ष एक फल की गुठली है। इसका उपयोग आध्यात्मिक क्षेत्र में किया जाता है। ऐसा माना जाता है कि रुद्राक्ष की उत्पत्ति भगवान शंकर की आँखों के जलबिंदु से हुई है। इसे धारण करने से सकारात्मक ऊर्जा मिलती है। रुद्राक्ष शिव का वरदान है, जो संसार के भौतिक दु:खों को दूर करने के लिए प्रभु शंकर ने प्रकट किया है।कभी-कभी रुद्राक्ष को मूल्यवान बनाने या अधिक मूल्य पर बेचने के लिए मानवीय प्रक्रिया द्वारा अपूर्ण रुद्राक्ष को पूर्ण किया जाता है। इस तरह के कार्य को करने के लिए ब्लेड, फाइल इत्यादि उपकरण की जरुरत पड़ती है।पारंपरिक भारतीय चिकित्सा में विभिन्न बीमारियों के इलाज के लिए रुद्राक्ष का भी उपयोग किया जाता है।अगर आप ठंडे पानी से नहाते हैं और किसी केमिकल साबुन का इस्तेमाल नहीं करते हैं, तो इसके ऊपर से बहकर निकले पानी का आपके शरीर पर से बहना विशेष रूप से अच्छा है।लेकिन अगर आप किसी केमिकल साबुन और गरम पानी का इस्तेमाल कर रहे हैं, तो यह भंगुर बन जाता है और कुछ समय बाद चटक जाएगा। तो ऐसे मौकों पर इसे पहनने से बचना बेहतर होगा।

रुद्राक्ष का उपयोग

  1. शिरोरोग-रुद्राक्ष बीज चूर्ण का प्रयोग मस्तिष्क दौर्बल्य (मानसिक कमजोरी) तथा शिरोरोग की चिकित्सा में किया जाता है।
  2. कंठमाला-रुद्राक्ष को जल में घिसकर गले में लगाने से कंठमाला में लाभ होता है।
  3. रक्तभाराधिक्य-रुद्राक्ष का शरीर से स्पर्श रक्तभाराधिक्य, उत्तेजना, हृदय रोग आदि को नियत्रित रखता है।
  4. बीज चूर्ण का सेवन हृदयावसाद तथा बेचैनी में लाभप्रद है।
  5. मसूरिका-गोदुग्ध के साथ रुद्राक्ष को पीसकर, सेवन करने से मसूरिका का शमन होता है।
  6. रुद्राक्ष को पीसकर उसमें शहद मिलाकर त्वचा पर लगाने से दाद तथा स्फोट-युक्त मसूरिका का शमन होता है।
  7. पित्तज-विकार-रुद्राक्ष को दूध में घिसकर पिलाने से पित्तज विकारों में लाभ होता है।
  8. मुंहासे-रुद्राक्ष को दूध के साथ पीसकर चेहरे पर लगाने से मुंहासे नष्ट होते हैं।
  9. मानसविकार-रुद्राक्ष फल के गूदे का प्रयोग अपस्मार (मिरगी) में हितकर है।
  10. रुद्राक्ष का प्रयोग अपतंत्रक, अनिद्रा तथा आक्षेप (दौरे) की चिकित्सा में किया जाता है।
  11. दाह-रुद्राक्ष के फलों को पीसकर लगाने से दाह (जलन) का शमन होता है।

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