कर्चूर, सफेद हल्दी (White turmeric)
कचूर, हल्दी के समान एक क्षुप है, पूर्वोत्तर भारत तथा दक्षिण समुद्रतटवर्ती प्रदेशों में यह स्वत: उगता है और भारत, चीन तथा लंका में इसकी खेती भी की जाती है। इसके लिए कर्चूर, षटकचोरा आदि कचूर से मिलते-जुलते नाम भी प्रचलित हैं।कर्चूर या सफेद हल्दी बहुत दुर्लभ जड़ी-बूटी है लेकिन हल्दी से भी ज्यादा इसके औषधीय गुण है जिसके कारण आयुर्वेद में कई बीमारियों के लिए उपचार के लिए प्रयोग किया जाता है।
कर्चूर के उपयोग
- कर्चूर प्रकन्द को पीसकर गले में लेप करने से गले की क्षयज ग्रंथि (गांठ) कम होती है और सूजन कम होने से दर्द भी कम होता है।
- कर्चूर प्रकन्द (भूमिगत तना) का काढ़ा बनाकर गरारा या कुल्ला करने से मुँह का दुर्गंध कम होता है और निकलने के कारण से भी मुक्ति मिलती है।
- सफेद हल्दी के पौधे की गांठों के टुकड़ों को दांतों के बीच दबाकर रखने से दाँतों का दर्द तथा सूजन आदि दंत की बीमारी को कम करने में मदद मिलती है।
- कर्चूर प्रकन्द को पीसकर छाती में लेप करने से फेफड़ों की सूजन तथा सांसों की समस्या कम होती है।
- कर्चूर, पिप्पली तथा दालचीनी का काढ़ा बनाकर, 10-20 मिली काढ़ा में शहद मिलाकर पीने से प्रतिश्याय (जुकाम) में लाभ होता है।
- कर्चूर की गांठ के 1-2 टुकड़ों को मुंह में रखकर चूसने से खांसी में लाभ होता है।
- कर्चूर प्रकन्द के 20-25 मिली काढ़े में 500 मिग्रा काली मिर्च, 1 ग्राम मुलेठी चूर्ण तथा 5 ग्राम मिश्री मिलाकर पिलाने से श्वास-नली का विकार कम होता है।
- 500 मिग्रा कर्चूर प्रकन्द चूर्ण का सेवन करने से भूख खुलकर लगती है तथा पेट का दर्द कम होता है।
- 2-5 मिली कर्चूर पत्ते के रस का सेवन करने से जलशोफ में लाभ होता है।
- कर्चूर प्रकन्द को पीसकर मस्सों में लगाने से बवासीर में लाभ होता है। इससे मस्सों से खून आना और दर्द से राहत मिलती है।
- 500 मिग्रा कर्चूर प्रकन्द चूर्ण का सेवन करने से प्लीहा वृद्धि में लाभ होता है।
- कचूर प्रकन्द का काढ़ा बनाकर, उपदंशज के घावों को धोने से वह ठीक होते हैं।
- कर्चूर प्रकन्द को पीसकर, हल्का गुनगुना करके अण्डकोष पर लेप करने से अण्डकोष की सूजन कम होती है।
- कर्चूर प्रकन्द को पीसकर उसमें फिटकरी मिलाकर जोड़ों में लगाने से जोड़ो का दर्द कम होता है।
- कर्चूर प्रकन्द का रस तथा सिन्दूर के कल्क में पकाए हुए सरसों के तेल को लगाने से साइनस, दुष्टव्रण, विसर्प तथा कण्डु आदि रोगों में लाभ होता है।
- कर्चूर के पत्तों अथवा प्रकन्द को पीसकर लेप करने से लसिका-वाहिनी-शोथ, रोमकूप-शोथ, ग्रन्थिशोथ (गांठ), कुष्ठ, व्रण एवं अर्बुद में लाभ होता है।
- कर्चूर प्रकन्द का काढ़ा बनाकर, 10-15 मिली मात्रा में पिलाने से विसूचिका या हैजा के लक्षणों से राहत मिलती है।
- कर्चूर प्रकन्द को पीसकर मुंह पर लगाने से मुँहासे मिटते हैं। इससे मुँहासो का आना कम होता है और निकलना भी कम हो जाता है।
- कर्चूर प्रकन्द चूर्ण (500 मिग्रा) में शहद मिलाकर सेवन करने से अपस्मार या मिर्गी में लाभ होता है। सफेद हल्दी के उपयोग मिर्गी रोग में बहुत काम आता है।
- कर्चूर की गांठों को पीसकर लेप करने से मोच में लाभ होता है। इससे मोच का दर्द और सूजन दोनों से आराम मिलता है।
- कर्चूर प्रकन्द को पीसकर लेप करने से शिशुओं में होने वाला आक्षेप रोग दूर होता है।

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