अनंतमूल (Black creeper)
अनंतमूल एक बेल है जो लगभग सारे भारतवर्ष में पाई जाती है। अनंतमूल को संस्कृत में सारिवा, गुजराती में उपलसरि, कावरवेल इत्यादि, हिंदी, बँगला और मराठी में अनंतमूल तथा अंग्रेजी में इंडियन सार्सापरिला कहते हैं। लता का रंग मालामिश्रित लाल तथा इसके पत्ते तीन चार अंगुल लंबे, जामुन के पत्तों के आकार के, पर श्वेत लकीरोंवाले होते हैं। इनके तोड़ने पर एक प्रकार का दूध जैसा द्रव निकलता है। फूल छोटे और श्वेत होते हैं। इनपर फलियाँ लगती हैं। इसकी जड़ गहरी लाल तथा सुगंधवाली होती है। यह सुगंध एक उड़नशील सुगंधित द्रव्य के कारण होती है, जिसपर इस औषधि के समस्त गुण अवलंबित प्रतीत होते है। औषधि के काम में जड़ ही आती है।
कृष्णसारिवा (अनंतमूल) के उपयोग
- कृष्णसारिवा के पौधे से दूध निकाल लें। इसे आंखों पर लगाएं। इससे आंखों की सूजन की समस्या ठीक होती है।
- कृष्ण सारिवा के पत्ते को पीसकर गुनगुना करके सूजन वाली स्थान पर लगाएं। इसे कीड़ों के कारण होने वाली सूजन ठीक हो जाती है।
- अनंतमूल के पत्ते को तेल में पकाकर छान लें। इसे लगाने से सिर से जुड़े विकारों में लाभ होता है।
- कृष्णसारिवा पौधे के पंचांग का काढ़ा बना लें। इससे आंखों को धोने से रतौंधी की बीमारी में लाभ होता है
- अनंतमूल पंचांग का काढ़ा बना लें। इससे गरारा करने से दांतों से होने वाला रक्तस्राव और जिह्वा की सूजन ठीक होती है।
- कृष्ण सारिवा की जड़ का काढ़ा बना लें। इसकी 10-30 मिली मात्रा में पीने से शरीर के ऐंठन (जकड़न) की बीमारी में लाभ होता है।
- 1-2 ग्राम कृष्ण सारिवा की जड़ के चूर्ण का सेवन करने से ल्यूकोरिया तथा सिफलिस रोग में लाभ होता है।
- कृष्ण सारिवा पंचांग का काढ़ा बना लें। इसे 10-30 मिली की मात्रा में सेवन करें। इससे सुजाक में लाभ होता है।
- अनंतमूल की जड़ का काढ़ा बना लें। 15-30 मिली काढ़ा में 1 ग्राम पिप्पली चूर्ण मिला लें। इसका सेवन करने से प्रसव के बाद होने वाली स्तनों से संबंधित विकार में लाभ होता है।
- कृष्णसारिवा (अनंंतमूल) पंचांग को पीसकर लेप करें। इससे कंठ के रोग जैसे कंठ की सूजन की परेशानी ठीक होती है।
- कृष्णसारिवा की जड़ के चूर्ण (1-2 ग्राम) में बराबर मात्रा में सारिवा चूर्ण मिला लें। इसका सेवन करने से अपच की समस्या ठीक होती है।
- 1-2 ग्राम कृष्ण सारिवा (अनंतमूल) की जड़ के चूर्ण का सेवन करने से भूख बढ़ती है।
- कृष्णसारिवा (अनंतमूल) पंचांग का चूर्ण बना लें। इसे 1-2 ग्राम की मात्रा में सेवन करें। इससे पेचिश में लाभ होता है।
- कृष्णसारिवा की जड़ के चूर्ण (1-2 ग्राम) का सेवन दही या छाछ के साथ करें। इससे बवासीर में लाभ होता है।
- पथरी की समस्या हो तो कृष्ण सारिवा की जड़ के चूर्ण को दूध के साथ सेवन करें। आपको अनंतमूल के चूर्ण को 1-2 ग्राम की मात्रा में सेवन करना है। इससे पथरी की समस्या ठीक होती है।
- कृष्ण सारिवा की जड़ के चूर्ण को दूध के साथ सेवन करें। इससे डायबिटीज में भी लाभ होता है।
- अनंतमूल पंचांग का काढ़ा बना लें। इसे 10-30 मिली मात्रा में सेवन करने से प्लीहावृद्धि (तिल्ली का बढ़ना), रक्तमूत्रता (पेशाब में खून आना) में लाभ होता है।
- अनंतमूल को पीसकर लेप करने से गठिया में लाभ होता है।
- अनंतमूल के पत्ते को तेल में पकाएं, और इसे अंगुली के बीच होने वाले घाव में लगाएं। इससे घाव ठीक हो जाता है।
- अनंतमूल की जड़ का काढ़ा बना लें। इसकी 10-30 मिली मात्रा में पीने से फाइलेरिया और श्लीपद में लाभ होता है।
- अनंतमूल पौधे की जड़ को पीसकर लगाने से रोम छिद्र की सूजन ठीक होती है।
- कृष्ण सारिवा पंचांग को पीसकर कीड़े-मकौड़े के काटने वाले स्थान पर लगाने से जहर का असर उतर जाता है।
- कृष्ण सारिवा (अनंतमूल) के पत्ते, डंठल सहित पत्ते और जड़ा का काढ़ा बना लें। इसकी 10-30 मिली मात्रा में सेवन करने से बुखार ठीक होता है।
- इसके पत्ते को तेल में पकाकर प्रयोग में लाने से बुखार उतर जाता है।

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