वच (Sweet Calamus)

     वच की गंध तेज होती है। यह स्वाद में कड़वा होता है। वच का पौधा मूल रूप से यूरोपीय वनस्पति है। इसमें कई तरह के औषधीय गुण होते हैं। औषधि के रूप में इसकी जड़ से बने चूर्ण का इस्तेमाल किया जाता है। सैकड़ों साल पहले इसका प्रयोग मिस्र और ग्रीस में होता था। लंबे समय से भारत में भी इसका इस्तेमाल दवाओं के लिए किया जा रहा है।
वच की कई प्रजातियां औषधि के रूप में उपयोग की जाती हैं। वच का सुखाए गए जड़ वाला हिस्सा बाजारों में घोड़ा वच के नाम से बिकता है। इसकी इसमें बाल वच या पारसीक वच प्रमुख है। दवाओं के लिए वच की छह प्रजातियों का उपयोग किया जाता है। जो ये हैंः-
  1. वच (Acorus calamus Linn)
  2. बाल वच (Iris versicolor Linn। (Blue flag))
  3. कापत्रिका वचा (Iris ensata Thunb.)
  4. लघुपत्र वचा (Acorus gramineus Sol.)
  5. हेमवती वच (Iris germanica Linn.) तथा
  6. श्वेत वच (Paris polyphylla Sm.)
लघुपत्र वच इसके प्रंकद का प्रयोग पेट की बीमारियों और पथरी का इलाज किया जाता है। इसकी जड़ का गुण ताकत बढ़ाने, रोगाणु को पनपने से रोकने के लिए किया जाता है। मांसपेंशियों के खिंचाव की समस्या में वचा की जड़ लाभ पहुंचाती है। खोई हुई याददाश्त वापस लाने में भी वचा सहायता पहुंचाती है। इसके प्रंकद का काढ़ा बनाकर पीने से पेट संबंधी गड़बड़ियां ठीक हो जाती हैं।
कापत्रिका वच - इसकी पपड़ी का प्रयोग खून साफ करने में किया जाता है। इस पपड़ी का काढ़ा बनाकर योनि को धोने से योनि संबंधी समस्याएं दूर होती हैं। इस काढ़ा का सेवन करने से लिवर और त्वचा के रोग भी दूर होते हैं।

वच के उपयोग

  1.  वच के पत्ते को पीसकर मस्तक और दर्द वाली जगह पर लेप करें। इससे तेज सिर दर्द में शीघ्र लाभ होता है।
  2.  वच और पिप्पली के चूर्ण को मिलाकर सूंघें। इसे नाक में भी दे सकते हैं। इससे माइग्रेन या अधकपारी के दर्द से राहत मिलती है।
  3. वच मनुष्य की स्मरण शक्ति बढ़ाने में बेहद मददगार है। वच के तने के 200 मिलीग्राम चूर्ण को घी, दूध या पानी के साथ सेवन करें। इससे स्मरणशक्ति में सुधार होता है। इस योग का दिन में दो बार करने से फायदा मिलता है। बेहतर परिणाम के लिए एक साल तक या कम से कम एक महीना तक इसका सेवन करना चाहिए।
  4. वच  के 10 ग्राम चूर्ण को 250 ग्राम बूरे के साथ गर्म कर लें। इसे रोज शाम को 10 ग्राम की मात्रा में खाएं। इससे भी स्मरण शक्ति की वृद्धि होती है।
  5. 25 ग्राम वच को 400 मिलीलीटर पानी में उबाल लें। जब पानी एक चौथाई रह जाए तो इसका तीन भाग बना लें। दिन में तीन बार इसकी खुराक दें। इससे गैस की परेशानी से आराम मिलता है।
  6. कफ की समस्या के कारण यदि गले में दर्द हो रहा हो तो वच के 500 मिलीग्राम चूर्ण को हल्के गर्म दूध में डालकर पिलाएं। इसका सेवन करने से अन्दर जमा हुआ कफ ढीला पड़कर बाहर निकल जाता है। इससे गले का दर्द जल्द ही दूर हो जाता है।
  7. घेघा रोग के उपचार में वच लाभदायक है। इसके चूर्ण और पिप्पली के चूर्ण को शहद के साथ, या नीम के तेल के साथ सूंघे। इससे घेघा रोग दूर होता है।
  8. मां के दूध के साथ वच को घिसकर पिलाने से बच्चों की खांसी दूर होती है।
  9. 125 मिलीग्राम वच को पानी में घिसकर दिन में तीन बार पिलाने से भी बच्चों की खांसी में लाभ होता है।
  10. 25 ग्राम वच को 400 मिलीलीटर पानी में उबाल लें। जब पानी चौथाई रह जाए तो इसका तीन भाग बना लें। दिन में तीन बार इसकी खुराक देने से सूखी खांसी में आराम मिलता है।
  11. दमा के रोगी को 2 ग्राम की मात्रा में पहले वच की खुराक देनी चाहिए। इसके बाद हर तीन घंटे बाद 625 मिलीग्राम की मात्रा का सेवन करना चाहिए। इससे दमा में लाभ होता है।
  12. वच, अश्वगंधा, तिल, अपामार्ग के बीज और सरसों के बीज का चूर्ण बना लें। इसे 1 से 2 ग्राम चूर्ण मात्रा को शहद के साथ सेवन करने से लाभ होता है।
  13. वच के चूर्ण को कपड़े में रखकर सूंघें। इससे सर्दी के कारण नाक में होने वाली जलन दूर होने लगती है।
  14. वच के 2 ग्राम चूर्ण को 125 मिलीग्राम भुनी हुई हींग के साथ मिला लें। इसे खिलाने से पेट के कीड़े मर जाते हैं।
  15. बवासीर से राहत पाने के लिए वच, भांग और अजवायन को बराबर–बराबर मात्रा में लेकर जलाएं। इन्हें जलाने से उठने वाली धूनी से बवासीर के घाव को सेकें। इससे बवासीर के दर्द से राहत मिलती है। 
  16. वच चर्म रोगों की कारगर औषधि है। इलायची, कूठ, विडंग, शतावर, चित्रक, वच, दन्ती और रसौत को पीस लें। इसका लेप करने से कुष्ठ और अन्य चर्म रोग भी दूर हो जाते हैं।
  17. कुष्ठ रोग में राहत के लिए वच, वासा, पटोल, नीम, प्रियंगु और दालचीनी का काढ़ा बना लें। इसके बाद इसमें 10 से 20 मिलीलीटर की मात्रा में 1 ग्राम मदनफल चूर्ण मिला लें। इस मिश्रण के प्रयोग से कुष्ठ रोग में फायदा मिलता है।
  18. पेचिश और खून की उल्टी से परेशान रोगियों को वच, धनिया और जीरा का काढ़ा पिलाने से लाभ होता है। इसके लिए तीनों पदार्थों को समान मात्रा में (10-10 ग्राम) लेकर 100 मिलीलीटर जल में उबालें। जल 20 मिलीलीटर रहने पर छानकर सुबह-शाम पिएं।
  19. वच की जड़ को कूटकर काढ़ा बना लें। इसे 25 या 35 मिलीलीटर मात्रा में पिलाने से पेचिश में लाभ होता है।
  20. पेट में दर्द की स्थिति में वच को पानी में घिसकर पेट पर लेप करें। इससे गैस की समस्या या पेट की सूजन आदि में लाभ होता है।
  21. बच्चों को दर्द के साथ पेचिश हो तो वच को जला लें। इसके कोयले को अरंडी के तेल या नारियल के तेल में पीस लें। इससे बच्चे के पेट पर लेप करें। इससे राहत मिलती है।
  22. वच की 125 मिग्रा राख (भस्म) को पानी में घोलकर पिलाने से भी बच्चों को पेचिश में लाभ होता है।
  23. 25 ग्राम वच को 400 मिलीलीटर पानी में उबाल लें। जब पानी एक चौथाई रह जाए तो इसका तीन भाग बना लें। दिन में तीन बार इसकी खुराक देने से पेचिश में आराम मिलता है।
  24.  वच को पानी में घिसें। इसमें अंरडी का तेल मिलाकर गर्भवती महिला के नाभि पर लेप करें। इससे बच्चे को जन्म लेने में आसानी हो जाती है।
  25. प्रसव के बाद आने वाली कमजोरी को दूर करने के लिए वच के काढ़ा को 20 से 30 मिलीलीटर की मात्रा में रोज सुबह-शाम पिलान चाहिए।
  26. 500 मिलीग्राम वच  के चूर्ण को शहद के साथ सेवन करें। इससे मिर्गी जैसी बीमारियों में लाभ मिलता है। उपाय के दौरान केवल दूध और चावल का ही प्रयोग करें।
  27. इसके अलावा, सुबह 1-1 ग्राम वच के चूर्ण को शहद या घी के साथ तीन दिन तक सेवन करें। इससे मिर्गी में फायदा मिलता है।
  28. 2 ग्राम वच के चूर्ण में शहद मिला कर 1 महीने तक सेवन करने से भी मिरगी में लाभ होता है। इसके सेवन के दौरान भोजन में दूध और चावल लिया जाना चाहिए।
  29. लोध्र, धनिया और वच को समान मात्रा में लें। तीनों को पीसकर लेप करने से मुँहासे आदि खत्म हो जाते हैं।
  30. कासीस, सेंधा नमक, सुराबीज, वच, दोनों हल्दी (हल्दी व जंगली हल्दी) और अन्य शोधन पदार्थों से तैयार चूर्ण का इस्तेमाल करें। इससे अल्सर ठीक हो जाता है।
  31. मुंह के लकवा से पीड़ित व्यक्ति वच के 625 मिलीग्राम चूर्ण तथा 625 मिलीग्राम शुंठी के चूर्ण को शहद में मिला ले। इसे दिन में दो से तीन बार चाटने से लाभ होता है। इसके सेवन के समय पानी में शहद मिलाकर पीना चाहिए।
  32. हकलाने की बीमारी ठीक करने के लिए रोगी को वच के ताजे तने का 1 ग्राम का टुकड़ा सुब- शाम चूसना चाहिए। लगातार 3 महीने तक इस्तेमाल करने से हकलाने की बीमारी में आश्चर्यजनक रूप से लाभ मिलता है।
  33. वच को पानी में पीसकर नाक पर लेप करें। इससे जुकाम, खांसी और इसके कारण होने वाला तेज बुखार में लाभ होता है।
  34. छोटे बच्चों के बुखार में वच की जड़ को पानी में घिसकर हाथों और पैरों पर लगाने से लाभ होता है।
  35. इसके अलावा, एक हिस्सा वच और 2 हिस्सा चिरायता को मिलाकर काढ़ा बना लें। इसे 10 से 20 मिलीलीटर की मात्रा में पिलाने से बुखार में लाभ होता है।
  36. वच के 1 ग्राम भस्म को पानी में घोलकर पिलाएं। इससे जमाल गोटे के विष का असर खत्म हो जाता है। विष के दुष्प्रभाव से होने वाली परेशानियां धीरे धीरे दूर हो जाती हैं।

  • गर्म प्रकृति वाले लोगों के लिए हानिकारक होता है। ऐसे लोग वच का सेवन करेंगे तो उन्हें उनमें सिर दर्द होने लगता है।





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