उलटकंबल (Devil’s cotton)
उलटकंबल के फूल पीले, बैंगनी अथवा गहरे लाल रंग के होते हैं। जब फूल परिपक्व हो जाते हैं, पुष्पकोष से अलग होकर फूल जब जमीन पर गिर जाते हैं, तब पुष्पकोष उलट कर आकाश की ओर मुड़ जाता है, इसलिए इसे उलट कंबल कहते हैं। उलटकंबल के फल कटे हुए आधे कमरख की तरह पांच कोश का तथा पांच खंड के होते हैं। फलकोष की प्रत्येक धार पर जाली के भीतर महीन रोम जैसी चमकदार रूई होती है, जिसको स्पर्श करने पर त्वचा में जलन-सी होती है। इस फल में रोमों के बीच दो कतारों में काले और पीले रंग के वन तुलसी या मूली के समान अनेक बीज भरे रहते हैं। जड़ की छाल भूरे रंग की होती है तथा अन्दर के भाग में सफेद गूदा भरा रहता है। जड़ों को काटने से एक गाढ़ा गोंद-सा निकलता है।
उलटकंबल के उपयोग
- उलटकंबल के पत्तों को पीसकर लगाने से दर्द से जल्दी राहत मिलती है।
- उलटकंबल जड़ के रस को पीने से गले के दर्द और फूफ्फूस के सूजन को कम करने में जल्दी काम करता है।
- उलटकंबल के पत्ते का काढ़ा पीने से मधुमेह रोग के लक्षणों को नियंत्रित कर पाने में सहायता मिलती है।
- उलटकंबल जड़ के छाल का स्वरस बनाकर 2 मिली की मात्रा में कुछ समय तक नियमित सेवन से मासिक-धर्म के समय होने वाली दर्द से राहत मिलती है।
- उलटकंबल की 1 किलो जड़ को कुट कर 4 ली जल में पकाएं, 1 ली शेष रहने पर इसमें 115 ग्राम काली मिर्च का चूर्ण और सवा किलो गुड़ मिलाकर, चीनी मिट्टी के पात्र में बन्दकर, धान्य राशि यानि चावल में कुछ दिनों के लिए दबा दें; फिर निकालकर, छानकर बोतलों में भर लें। इसको 10-25 मिली मात्रा में लेकर, समान मात्रा में जल मिलाकर मासिकधर्म के 1 सप्ताह पहले से, मासिकधर्म होने तक सुबह-शाम सेवन करें। इसके प्रयोग से मासिक-विकारों से राहत मिलती है।
- अनियमित मासिकधर्म के साथ ही जांघ और कमर में विशेष पीड़ा हो तो 5 मिली जड़ के स्वरस या 1-2 ग्राम जड़ के चूर्ण में शक्कर या शहद मिलाकर सेवन करने से दो दिन में ही लाभ हो जाता है।
- उलटकंबल की 50 ग्राम सूखी छाल को यवकुट कर 625 मिली पानी में पकाकर, काढ़ा तैयार कर, 10-20 मिली मात्रा में दिन में तीन बार देने से कुछ ही दिनों में मासिकधर्म उचित समय पर होने लग जाता है। इसको एक सप्ताह पूर्व शुरू कर ऋतुस्राव यानि पीरियड्स आरम्भ होने तक देना चाहिए।
- 4 ग्राम उलटकंबल जड़ के छाल के चूर्ण तथा 7 नग काली मिर्च को जल के साथ पीसकर मासिकधर्म के समय 7 दिन तक सेवन करने (2-4 मास तक यह प्रयोग करने) से गर्भाशय के सब दोष मिट जाते हैं, यह प्रदर और बन्धयत्व की सर्वश्रेष्ठ औषधि है। आहार यानि भोजन में केवल दूध भात लें।
- 5 मिली उलटकंबल के पत्ते एवं तने के स्वरस का सेवन करने से पूयमेह में लाभ होता है।
- उलटकंबल के पत्ते का काढ़ा बनाकर परिसिंचन तथा बफारा या भाप लेने से आमवात या अर्थराइटिस में लाभ होता है।
- उलटकंबल के जड़ को पीसकर लगाने से रोमकूप के सूजन तथा प्रमेह पिड़का यानि त्वचा में मुँहासा या दाना जैसा होने पर उस पर लगाने से जल्दी ठीक हो जाता है।

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