कपूर (Camphor)
कपूर (संस्कृत : कर्पूर) उड़नशील वानस्पतिक द्रव्य है। यह सफेद रंग का मोम की तरह का पदार्थ है। इसमे एक तीखी गंध होती है। आयुर्वेद के कई ग्रंथों में पक्व, अपक्व और भीमसेनी तीन तरह के कपूर का जिक्र है। मुख्य रूप से दो तरह के कपूर प्रयोग में लाये जाते हैं। एक पेड़ों से प्राप्त होता है और दूसरा कृत्रिम रूप से रासायनिक प्रक्रिया द्वारा बनाया जाता है। प्राकृतिक कपूर को भीमसेनी कपूर कहा जाता है, और यह कृत्रिम कपूर की तुलना में भारी होता है। यही कारण है कि यह जल्दी पानी में डूब जाता है। यह जल्दी उड़ता भी नहीं है।
कपूर का उपयोग
- शुण्ठी, लौंग, कर्पूर, अर्जुन की छाल और सफेद चंदन को समान मात्रा में लेकर पीस लें। इसे सिर पर लेप करने से सिरदर्द जल्दी ठीक हो जाता है।
- कपूर के चूर्ण को बरगद (वट) के दूध में पीसकर आंखों में काजल की तरह लगाने से आंखों से जुड़े रोगों में लाभ होता है।
- कपूर को नारियल तेल में मिलाकर लगाने से त्वचा का रूखापन दूर हो जाता है साथ ही चेहरे की त्वचा खिलने लगती है।
- कपूर को नारियल या किसी तेल में मिलकर लगाने से सूजन कम होती है।
- लू लगने पर कपूर और नारियल के तेल के मिश्रण को शरीर पर लगाने या मसाज करने से जलन कम होती है।
- कपूर को सरसों या तिल के तेल में डाल कर कुछ समय के लिए रख दें। फिर इस तेल से पीठ और छाती पर हल्के हाथ से मालिश करें जिससे खाँसी शांत होती है।
- कपूर के जलने से एक प्रकार की सुगन्धित गंध निकलती है, जो कि मच्छरों को दूर भगाने में सहायक होती है।
- कपूर को गर्म पानी में डालकर उससे निकलने वाली भाप को सूंघने से कफ से जुड़े रोगों और जुकाम में लाभ होता है।
- कपूर को गुलाब जल में पीसकर 1-2 बूंद नाक में डालें। जल्दी ही नाक से खून निकलने की समस्या ठीक हो जाती है।
- दांत के दर्द से परेशान हैं तो सोंठ चूर्ण में कर्पूर चूर्ण मिलाकर दांतों पर रगड़ें।
- कपूर को दांतों के बीच दर्द वाले स्थान पर रखकर कुछ देर तक दबाएँ रखें। ऐसा कुछ दिन करने से दांत के दर्द से राहत मिलती है।
- 125 मिग्रा कपूर को मिश्री के साथ पीसकर लगाने से मुंह पकने की समस्या में लाभ होता है।
- उल्टियां होने पर कपूर मिश्रित जल का सेवन करने से उल्टियां रुक जाती हैं।
- 125 मिग्रा कपूर का सेवन करने से कॉलरा में लाभ होता है।
- कर्पूर चूर्ण की वर्ती बना लें। इसे लिंग के रास्ते में रखें। इससे पेशाब न आना और पेशाब करते समय दर्द होने आदि समस्याओं में लाभ होता है।
- 125 मिग्रा कपूर की गोली बनाकर योनि में रखें। ऐसा करने से योनि में होने वाली जलन और खुजली दोनों शांत हो जाती है।
- अपांप्म व कपूर को राई के तेल में मिलाकर मालिश करें। इससे गठिया के दर्द से आराम मिलता है।
- जले हुए हिस्से को जल्दी ठीक करने के लिए सफेद चन्दन, कर्पूर और सुंगधबाला को समान मात्रा में लेकर पीस लें। जले हुए हिस्से पर इसका लेप लगाएं।
- कपूर को सिरके में पीसकर उस जगह पर लगाएं। इससे बिच्छू का विष असर जल्दी खत्म हो जाता है।
- कपूर को जलाने से वायु शुद्ध होती है। कपूर दूषित वायु से फैलने वाले रोगों से बचाने के साथ-साथ मच्छर और मक्खियों को भी आने से रोकता है।
- हर प्रकार का कपूर खाने योग्य नहीं होता है। खाने योग्य कपूर का उपयोग आयुर्वेदिक चिकित्सा में औषधि के निर्माण में किया जाता है। अतः कपूर का उपयोग सीधे न करके आयुर्वेदिक चिकित्सक से परामर्श लेकर आयुर्वेदिक औषधि के रूप में ही प्रयोग करना उचित होता है।

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