कसौंदी (Coffeeweed)
कसौंदी (कासमर्द) को अपने घरों के आस-पास देखा होगा। यह झाड़ीनुमा होता है। बारिश के मौसम में खाली जमीन या कूड़े-करकट में कसौंदी अपने आप उग जाता है। प्रायः इसे लोग बहुत ही बेकार झाड़ी समझते हैं, लेकिन असलियत कुछ और ही है। कसौंदी के सेवन से शरीर को बहुत अधिक लाभ होता है। कसौंदी के कई सारे औषधीय गुण भी हैं। क्या आप यह जानते हैं कि कसौंदी एक जड़ी-बूटी भी है, और रक्तविकार, ह्रदय विकार, साधारण खांसी, कुकुर खांसी जैसी बीमारियों में कसौंदी के इस्तेमाल से फायदे मिलते हैं। इतना ही नहीं, सूजन, पेट के रोग, पीलिया, बवासीर आदि रोगों में भी कसौंदी के औषधीय गुण से लाभ मिलता है।कसौंदी वात-कफ शामक एवं पित्तसारक है। बाह्य प्रयोग में यह कुष्ठघ्न तथा विषघ्न है। आभ्यन्तर प्रयोग में यह दीपन, वातानुलोमन, पित्त-सारक एवं रेचक है। यह आक्षेप-शामक, वेदनास्थापक, कफघ्न, श्वासहर, मूत्रल तथा ज्वरघ्न है। कसौंदी के बीज रक्त विकार, हृदय विकार, साधारण खांसी, कुक्कुर खांसी में लाभदायक होते हैं। कसौंदी के पत्ते आमाशय की सक्रियता को बढ़ाते हैं। कसौंदी के बीज, पत्ते एवं जड़ बुखार में फायदेमंद होते हैं। कसौंदी की जड़ मूत्र रोग में मदद करती है।
कसौंदी के उपयोग
- कसौंदी के ताजे पत्ते के रस को सुबह-शाम 1-1 बूंद आंखों में डालें। इससे आंखों की सूजन, दर्द और लालिमा में लाभ होता है।
- कसौंदी के ताजे पत्ते को आंखों पर बांधने से आंखों का दर्द, लालिमा और सूजन की समस्या का इलाज होता है।
- कसौंदी के पत्तों के रस को कान में डालने से कान का दर्द दूर होता है।
- कसौंदी के पत्तों के रस में दूध में मिला लें। इसे गुनगुना करके कान में 2-4 बूंद-बूंद के रूप में डालें। इससे कान का दर्द ठीक होता है।
- 10 ग्राम कासमर्द (कसौंदी) के पत्ते में 2-4 नग काली मिर्च पीस लें। इससे लेप करने से गंडमाला के घाव ठीक होते हैं।
- 10 कसौंदी के बीज और काली मिर्च के 1-2 दानों को मिला लें। इसे पानी में पीसकर सुबह और शाम जल के साथ पिएं। इससे खूनी बवासीर में लाभ होता है।
- कासमर्द (कसौंदी), बड़ी कटेरी तथा भृंगराज का काढ़ा बना लें। इसे घी में पकाएं। 5 ग्राम की मात्रा में इसका सेवन करने से आवाज के बैठने की समस्या दूर होती है।
- कासमर्द के पत्ते, भृंगराज के पत्ते, वार्ताक तथा काली तुलसी के पत्तों को समान मात्रा में मिला लें। इसे कूटकर रस निकाल लें। इसके 5-10 मिली रस में मधु मिलाकर पीने से कफज दोष के कारण होने वाली खांसी में लाभ होता है।
- बड़ी कटेरी, छोटी कटेरी, त्रिकटु, कासमर्द, हिङ्गु लें। इनके साथ ही इङ्गुदी, दालचीनी, मैनसिल, गुडुची, काकड़ासिंगी आदि कासहर द्रव्य लें। इनकी बत्ती बनाकर धूमपान करने से खांसी में लाभ होता है।
- 10-15 मिली कसौंदी के पत्ते के रस में 2 चम्मच मधु मिलाकर सुबह-शाम सेवन करें। इससे कफज दोष के कारण होने वाली बुखार और खांसी की समस्या दूर होती है।
- कसौंदी की 8 से 10 ताजी फलियों को भूनकर खाने से खांसी ठीक होती है।
- 1-3 ग्राम कसौंदी बीज के चूर्ण को गुनगुने जल के साथरोज तीन बार सेवन करें। इससे खांसी में लाभ होता है।
- कासमर्द (कसौंदी) के पत्ते के रस में मधु मिला लें। इसे बच्चों को खिलाने से कुक्कुर खांसी में लाभ होता है।
- काली कसौंदी की 10-20 ग्राम ताजी पत्तियों को 200 मिली पानी में पकाकर काढ़ा बना लें। इस काढ़ा से घावों को धोने से सूजाक में लाभ होता है।
- कसौंदी के 10 ग्राम पत्तों या पंचांग को 400 मिली पानी में पका लें। जब यह एक चौथाई बच जाए और काढ़ा बन जाए तो 10-30 मिली काढ़ा में शहद मिलाकर सेवन करें। इससे हिक्का (हिचकी), खांसी और सांसों के रोग में लाभ होता है।
- कासमर्द के पत्तों का जूस बनाकर सेवन करने से हिक्का (हिचकी) तथा दमा रोग में लाभ होता है।
- 5 मिली कसौंदी के पत्ते के रस में मधु मिलाकर सेवन करने से खांसी में लाभ होता है।
- कसौंदी के बीजों का चूर्ण, छोटी पिप्पली तथा काला नमक को बराबर मात्रा में लें। इसे खरल करके 250 मिलीग्राम की गोलियाँ बना लें। सुबह या रात 1-2 गोली मुंह में रखकर चूसने से कफज दोष के कारण होने वाली खांसी और सांसों की बीमारियों (सांस लेने में परेशानी) में लाभ होता है।
- सर्दी-जुकाम, नाक के रोग तथा विशेष रूप से नाक बंद होने की समस्या में कसौंदी के पत्ते के रस की एक-दो बूदों को नाक में डालें। इससे लाभ मिलता है।
- सांसों से जुड़ी बीमारियों वाले रोगी के लिए कसौंदी के पत्तों की सब्जी बहुत लाभकारी होती है।
- कसौंदी के 20 ग्राम पत्तों को 400 मिली जल में पका लें। जब यह एक चौथाई रह जाए और काढ़ा बन जाए तो 10-25 मिली मात्रा में पिएं। इससे पेट के कीड़े खत्म होते हैं।
- 10 ग्राम कासमर्द की जड़ को नींबू के रस में पीस लें। इसे पेट पर लेप करने से जलोदर रोग में लाभ होता है। इसके साथ आपको 2 ग्राम जड़ के चूर्ण को मट्ठे के साथ दिन में 1-2 बार सेवन करना है।
- 5 ग्राम कासमर्दादि घी का सेवन करें। इससे गले का सूखना, बुखार, तिल्ली की वृद्धि और खांसी की समस्या ठीक होती है।
- कासमर्द पंचांग का काढ़ा बना लें। इसे 20-25 मिली मात्रा में पिलाने से पेचिश और आमशय संबंधी विकार ठीक होते हैं।
- 10-20 मिली कसौंदी पंचांग का काढ़ा बना लें। इसका सेवन करने से कब्ज की समस्या ठीक होती है।
- कसौंदी के फूल से गुलकन्द बना लें। इसे 3 से 6 ग्राम की मात्रा में सेवन करें। इससे कब्ज की बीमारी ठीक होती है।
- 10-20 मिली जड़ के काढ़ा को दिन में 2 से 3 बार पिएं। इससे पेशाब में दर्द, पेशाब का ना आना, बुखार, सूजन की समस्या में लाभ होता है।
- कसौंदी के पत्तों का रस पीने से सामान्य प्रसव में मदद मिलती है।
- कसौंदी की जड़ की छाल को पीसकर चूर्ण बना लें। 1-2 ग्राम चूर्ण में मधु मिला लें। इसे सुबह और शाम एक गिलास दूध के साथ लेने से वीर्य का पतलापन दूर होता है। वीर्य पुष्ट होता है।
- कासमर्द के 5 ग्राम पत्तों को 2-4 नग काली मिर्च के साथ पीसकर छाल लें। इसे सुबह और शाम पीने से पीलिया रोग में लाभ होता है।
- 10 ग्राम कसौंदी की जड़ का पेस्ट बना लें। पेस्ट को बराबर मात्रा में गाय के घी के साथ सेवन करें। इससे श्लीपद या फाइलेरिया (हाथी पांव रोग) में लाभ होता है।
- कसौंदी के पत्ते का पेस्ट बना लें। इसमें प्याज और नमक मिला लेंं। इसे पीसकर बीमार अंग पर बांधने से नारु (बाला) रोग में लाभ होता है।
- 10-20 मिली कसौंदी पंचांग का काढ़ा बना लें। काढ़ा को दिन में 3-4 बार पिलाने से मिर्गी, हिस्टीरिया और शरीर के कंपन की बीमारी में लाभ होता है।
- 20-30 मिली कसौंदी पंचांग का काढ़ा बना लें। इसे सुबह-शाम पीने से रक्त विकार में लाभ होता है। इससे चर्म रोगों में भी लाभ होता है।
- कसौंदी पंचांग के काढ़ा को जल में मिलाकर स्नान करें। इससे खुजली, विसर्प, दाद-खाज-खुजली, संक्रमण की समस्या ठीक होती है।
- कसौंदी पंचांग के काढ़ा से बीमार अंग को धोएं। इससे खुजली, विसर्प, दाद-खाज-खुजली, संक्रमण की समस्या ठीक होती है।
- कासमर्द के बीजों को पीस लें। इसे छाछ के साथ मिलाकर लगाने से दाद-खाज और खुजली आदि त्वचा विकार ठीक होते हैं।
- कसौंदी की जड़ को सिरके या नींबू रस में पीसकर दाद पर लेप करें। इससे भी दाद-खाज-खुजली में लाभ होता है।कसौंदी और जड़ी के बीजों को बराबर मात्रा में लें। इससे दुगुनी मात्रा में गंधक लें। सभी को पीस लें। इसका लेप करने से सफेद दाग की बीमारी ठीक होती है।
- कसौंदी के ताजे पत्तों को पीस लें। इसे चोट लगे अंगों पर लेप करें। इससे आराम मिलता है। इससे शरीर की जलन आदि त्वचा के विकारों में भी लाभ मिलता है।
- कसौंदी के फूलों को मसलकर रोगी को सुघांएं। इससे मानसिक विकार में लाभ होता है।
- कसौंदी के सूखे फूलों का काढ़ा बना लें। इसे 20 मिली मात्रा में दिन में तीन बार पिलाने से मानसिक विकारों में लाभ होता है।
- 10-20 मिली कसौंदी की जड़ का काढ़ा बना लें। इसे सुबह-शाम पिलाने से मलेरिया और गंभीर बुखार में लाभ होता है। इससे टायफाइड में भी बहुत फायदा होता है।
- 20 मिली कासमर्द की जड़ का काढ़ा बना लें। इसे सुबह-शाम पिलाने से शारीरिक दुर्बलता व कमजोरी दूर होती है।
- कासमर्द के पत्ते एवं जड़ का पेस्ट बना लें। इसका लेप करके गुनगुने जल से स्नान करें। शरीर के किसी भी अंग की सूजन इससे दूर होती है।
- मकड़ी, बर्रे (भिड़), ततैया आदि विषैले कीटों के काटने पर कसौंदी के पत्तों के रस को लगाएं। इससे कीड़ों के काटने से होने वाला दर्द ठीक होता है।
- कीड़ों के काटने पर कसौंदी के पेस्ट को काटने वाले स्थान पर लगाएं। इससे दर्द ठीक हो जाता है।
- बिच्छू के काटने पर कासमर्द की जड़ को पीस लें। इसे बिच्छू के डंक वाले स्थान पर लगाएं। इससे दर्द होता है। इससे बिच्छू के काटने से होने वाले दुष्प्रभाव भी खत्म होते हैं।

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