अधपुष्पी (Indian Borage)
अधपुष्पी नाम से ही यह पता चल जाता है कि इसके फूल आधा दिखते हैं या आधा जैसा प्रतीत होते हैं। असल में अधपुष्पी के फूल नीचे की ओर मुँह करके लटके हुए होते हैं इसलिए इन्हें अधपुष्पी कहते हैं। आयुर्वेद में इसका प्रयोग बालों के लेकर पेट संबंधी समस्याओं और भी कई आम समस्याओं के इलाज के लिए औषधि के रूप में उपयोग किया जाता है। वैसे तो अनेक जगहों पर अर्कपुष्पी तथा अन्धाहुली को पर्यायवाची माना गया है; परन्तु वस्तुत यह दोनों पौधे एकदम भिन्न हैं। अधपुष्पी के पुष्प उल्टे लटके हुए रहते हैं। इसलिए इसको अधपुष्पी कहते हैं। इसके पौधों पर नीचे से ऊपर तक कड़ी तथा सफेद रंग की रोमावली रहती है; इसलिए इसको रोमालु भी कहते हैं।
अधपुष्पी के उपयोग
- बालों का झड़ना कम नहीं हो रहा है और गंजा हो जाने की नौबत आ गई है तो अन्धाहुली की जड़ का काढ़ा बनायें। इस काढ़े से बालों को धोने से बालों का झड़ना कम हो जाता है।
- अन्धाहुली या अधपुष्पी की जड़ के छाल को पीसकर, गोघृत (गाय का घी) में भूनकर उसमें थोड़ी भुनी हुई हींग मिलाकर सुबह एक बार गाय के घी के साथ सेवन करने से तथा इन्द्रलुप्त या गंजापन वाले स्थान पर लगाने से लाभ होता है और बालों का झड़ना कम हो जाता है।
- अगर दिन भर काम करने के बाद आँखों में दर्द हो रहा है तो अन्धाहुली-पञ्चाङ्ग को पीसकर नेत्र के बाहर चारों तरफ लगाने से दर्द से जल्दी राहत मिलती है।
- अन्धाहुली के बीजों की मींगी निकालकर और पीसकर 65 मिग्रा की गोलियां बनाकर सेवन करने से सांस संबंधी रोग में लाभ होता है।
- अन्धाहुली की जड़ को पानी के साथ पीसकर पिलाने से अतिसार के कष्ट से जल्दी राहत मिलती है।
- अन्धाहुली-पञ्चाङ्ग को पीसकर पिलाने से मूत्रदाह तथा मूत्रकृच्छ्र से राहत मिलती है।
- अंधाहुली या अधपुष्पी के फूलों में समान मात्रा में मिश्री मिलाकर गुलकंद बनाकर 1-2 ग्राम मात्रा में सेवन करने से प्रमेह में लाभ होता है।
- 2-4 मिली अन्धाहुली या अंधपुष्पी के पञ्चाङ्ग के रस का सेवन सुबह शाम कराने से मूढ़गर्भ का बाधा कम हो जाता है।
- 2 ग्राम अंधाहुली पञ्चाङ्ग के चूर्ण में समान मात्रा में मिश्री मिलाकर गाय के दूध के साथ पीने से वीर्य की पुष्टि होती है।
- अंधाहुली या अधपुष्पी के पञ्चाङ्ग को पीसकर लेप करने से संधिशोथ या जोड़ों के दर्द से आराम होता है।
- 1-2 ग्राम अंधाहुली के जड़ के चूर्ण का सेवन कराने से बच्चों के प्रवाहिका-रोग में लाभ होता है।
- अंधाहुली के जड़ को पीसकर सांप के काटे हुए स्थान पर लेप करने से तथा 1-2 ग्राम जड़ के पेस्ट का सेवन करने से दंश के कारण वेदना, सूजन, जलन और विष का प्रभाव कम होता है।

Comments
Post a Comment