गोरखमुंडी (Indian globe thistle)

     गोरखमुंडी एकवर्षा आयु वाली, प्रसर, वनस्पति धान के खेतों तथा अन्य नम स्थानों में वर्षा के बाद निकलती है। यह किंचित् लसदार, रोमश और गंधयुक्त होती है। इसके मूल, पुष्पव्यूह अथवा पंचाग का चिकित्सा में व्यवहार होता है। यह कटुतिक्त, उष्ण, दीपक, कृमिघ्न (कीड़े मारने वाली), मूत्रजनक रसायन और वात तथा रक्तविकारों में उपयोगी मानी जाती है। इसमें कालापन लिए हुए लाल रंग का तैल और कड़वा सत्व होता है। तैल त्वचा और वृक्क द्वारा नि:सारित होता है, अत: इसके सेवन से पसीने और मूत्र में एक प्रकार की गंध आने लगती है। मूत्रजनक होने और मूत्रमार्ग का शोधन करने के कारण मूत्रेंद्रिय के रोगों में इससे अच्छा लाभ होता है। अधिक दिन सेवन करने से फोड़े फुन्सी का बारंबार निकलना बंद हो जाता है। यह अपची, अपस्मार, श्लीपद और प्लीहा रोगों में भी उपयोगी मानी जाती है।

 गोरखमुण्डी का उपयोग 

  1. गोरखमुंडी चूर्ण को कांजी में मिलाकर थोड़ा-थोड़ा पिलाएं। इससे मुंह से दुर्गन्ध आना बंद होता है।
  2. आप किसी दन्तमंजन में इसके फूल के चूर्ण मिलाकर मंजन करें। इससे भी मुंह से दुर्गन्ध आना बंद होता है।
  3. गोरखमुण्डी के 3-5 मि.ली. रस में 500 मि.ग्रा. काली मिर्च का चूर्ण मिलाकर सुबह शाम पिलाने से सिर के रोगों में लाभ होता है।
  4. फूल लगने से पहले गोरखमुण्डी की जड़ या पंचांग को लेकर थोड़ा सुखा लें। इतनी ही मात्रा में भृंगराज का चूर्ण मिला लें। इसे 2-3 ग्राम तक मधु व घी से 40-80 दिन तक सेवन करें। इससे बालों के सब रोग दूर होते हैं। इससे बाल काले होने लगते हैं।
  5. गोरखमुंडी के पौधों को छाया में सुखा-पीस लें। इसमें बराबर मात्रा में मिश्री मिला लें। इसका 1 चम्मच सुबह और शाम दूध के साथ सेवन करने बाल सफेद नहीं होते हैं।
  6. हर साल चैत्र मास में 4-5 मुंडी के ताजे फल को दांतों से चबाकर पानी के साथ खाने से आँख के रोगों में लाभ होता है।
  7. 1-2 ग्राम गोरखमुुण्डी पंचांग के सूखे चूर्ण में बराबर मात्रा मिश्री में मिला लें। इसे 200 मि.ली. गाय के दूध के साथ सुबह-शाम खाने से आँखों के बहुत से रोग ठीक होते हैं।
  8. आँखों की रोशनी कम हो जाने पर गोरखमुुण्डी के फूल या पत्तों के रस को दिन में दो बार आँखों में लगाते रहने से लाभ होता है।
  9. ताजे गोरखमुुण्डी पंचांग के रस को तांबे के बर्तन में रख लें। इसे नीम के डंडे से खूब रगड़ें। जब वह काला हो जाए तो रूई को अच्छी तरह भिगोकर सुखा लें। आँखों में दर्द होने पर इस रूई को जल में भिगोकर आंखों पर रखें। इससे बहुत लाभ होता है।
  10. मंडी के फूलों को पीसकर आंखों में काजल की तरह लगाने से आंख आने की परेशानी में लाभ होता है।
  11. 1-2 ग्राम गोरखमुंडी चूर्ण का सेवन करने से शरीर की दुर्गन्ध खत्म होती है।
  12. गोरखमुण्डी के फलों के 50 ग्राम चूर्ण में 10 ग्राम सोंठ चूर्ण मिला लें। इसे शहद के साथ डेढ़ ग्राम की मात्रा में दिन में 3-4 बार चटाने से गले की खराश खत्म होती है और आवाज ठीक हो जाती है।
  13. मुण्डी पंचांग को पीसकर गले में लगाने से घेंघा रोग (थायरॉयड ग्रंथी) की सूजन में लाभ होता है।
  14. गोरखमुुण्डी की जड़ के 1-2 ग्राम चूर्ण में मधु मिला लें। इसका सेवन करने से सूखी खाँसी में लाभ होता है।
  15. मुंडी के पत्तों के 5 मिली रस को दूध के साथ उबाल लें। इसमें चीनी मिलाकर पीने से खाँसी में लाभ होता है।
  16. गोखरू, खस, मंजीठ, शतावरी तथा श्रावणी आदि द्रव्यों से बने श्रृंदष्ट्रादि घृत (5 ग्राम) का सेवन करें। इससे टीबी की बीमारी की शुरुआती अवस्था में लाभ होता है।
  17. मिश्री, मुण्डी, काकोली आदि द्रव्यों को दूध (100 मिली) में पकाएं। इसका सेवन करने से खाँसी, बुखार, जलन तथा टीबी रोग में लाभ होता है।
  18. 10-20 मिली मुण्डी जड़ के काढ़े का सेवन करने से सीने के दर्द व चुभन से छुटकारा मिलता है।
  19. गोरखमुंडी के फलों का अर्क, आँखों के रोग और हृदय की कमजोरी दूर करता है। शुरू में इसको 15 मि.ली. की मात्रा में लेना चाहिए, और बाद में मात्रा बढ़ाते रहना चाहिए। इस दौरान खट्टी और गर्म चीजें, अधिक परिश्रम व मैथुन से बचना चाहिए।
  20. एक ग्राम गोरखमुंडी चूर्ण को जल के साथ सुबह-शाम सेवन करने से पेट के कीड़े बाहर हो जाते हैं।
  21. रोज जड़ तथा बीज के 2.5-3 ग्राम चूर्ण में मधु मिलाकर सेवन करें। इससे पाचनशक्ति और अमाशय मजबूत  बनते हैैं। इससे पेट के कीड़े खत्म होते हैं।
  22. एरंड के 10 मि.ली. तेल के साथ 3 ग्राम गोरखमुंडी चूर्ण को सुबह-शाम सेवन करने से जलोदर रोग में लाभ होता है।
  23. 3 ग्राम गोरखमुंडी चूर्ण को बकरी या गाय के दूध के साथ सेवन करने से पेट की गैस की समस्या में लाभ होता है।
  24. मुंडी की जड़ के 1 ग्राम चूर्ण को मट्ठे के साथ खाने से एसीडिटी में लाभ होता है।
  25. रोज सुबह 12-12 ग्राम गोरखमुण्डी फल तथा सेंधा नमक को मिला लें। इसे 3 लीटर जल में मिलाकर काढ़ा बना लें। इसे 10-20 मि.ली. मात्रा में सेवन करने से शरीर की जलन कम होती है।
  26. इसके पत्ते एवं फूल से बने काढ़ा का सेवन करने से भी जलन कम होती है।
  27. गोरखमुण्डी की जड़ और सौंफ को बराबर मात्रा में (लगभग 2-4 ग्राम) पीस लें। इसमें मिश्री-युक्त जल से सुबह-शाम सेवन करें। इससे आँव वाली पेचिश में लाभ होता है।
  28. मुंडी की जड़ के 2 ग्राम चूर्ण में 1 ग्राम मरीच चूर्ण मिलाकर सेवन करने से भी पेचिश में लाभ होता है।
  29. मुंडी के जड़ के काढ़े का 20 मि.ली. सेवन करने से आंत की बीमारियों खत्म होती हैं।
  30. 10 ग्राम ताजे पंचांग (न मिलने पर छाया में सुखाए गए पंचांग) को जल में पीस लें। इसे पिलाने से योनि का दर्द कम होता है। इससे डायबिटीज में भी लाभ होता है।
  31. गोरखमुुण्डी के पेस्ट को एरण्ड के तेल में भूनकर ठण्डा होने दें। इसे योनि में लेप करने से भी योनि के दर्द में लाभ होता है।
  32. वात तथा पित्त के कारण होने वाले योनि के रोगों में बला, गोरखमुण्डी, शालपर्णी, क्षीरकाकोली, पीलूपर्णी, मूर्वा आदि द्रव्य लें। इनके साथ पकाए हुए बलादि यमक घी को उपयुक्त मात्रा में सेवन करने से लाभ होता है। इसे नियमित रूप से सेवन करना है।
  33. मुंडी की जड़ के तेल को गुदा में लगाने से काँच निकलना (शौच में जोर लगाने से आंत का निकलना) बंद होता है।
  34. 5-10 मिली पंचांग के रस का सेवन करने से पीलिया में लाभ होता है। 
  35. गाय के दूध के साथ 1-2 ग्राम गोरखमुंडी चूर्ण का सेवन करने से डायबिटीज (मधुमेह) में लाभ होता है। 
  36. मुण्डी और एरंड के पत्तों के 5-5 मि.ली. रस को मिलाकर पिलाएं। इसके पत्तों की लुगदी मस्सों पर बाँधें। इसके अलावा पंचांग का धुआं मस्सों पर देने से बवासीर ठीक होता है।
  37. 1-2 ग्राम गोरखमुंडी चूर्ण को छाछ या गाय के दूध के साथ सेवन करने से अर्श (बवासीर) नष्ट होता है।
  38. 1-2 ग्राम मुंडी चूर्ण को बासी पानी के साथ सेवन करने से भगन्दर में लाभ होता है।
  39. मुंडी की ताजी जड़ को पीसकर, कलईदार पीतल की कढ़ाई में रख लें। इसे चाच गुना काले तिल के तेल और सोलह गुना पानी डालकर पकाएं। केवल तेल रहने पर छान लें। इस तेल से कामेन्द्रियों पर मालिश करने तथा 10-30 बूँद तक पान में लगाकर खाने से लाभ होता है। इसे दिन में 2-3 बार खाना है।
  40. 1-2 ग्राम मुण्डी चूर्ण को 50 मिली नीम के पत्ते के रस के साथ खाने से लाभ होता है।
  41. 1-2 ग्राम मुण्डी चूर्ण को बराबर मात्रा में चीनी के साथ मिलाकर सेवन करने से वीर्य विकार खत्म होते हैं।
  42. गोरखमुुण्डी के पत्तों को जल में पीसकर लेप करें। इससे चर्म रोग ठीक होता है।
  43. गोरखमुंडी के पत्तों के रस को लगाने से अनेक चर्म रोग एवं पुराने घाव ठीक होते हैं।
  44. इसके लगातार सेवन से गीली और सूखी खुजली मिट जाती है।
  45. मुण्डी पंचांग पेस्ट में तेल मिलाकर लेप करने से खुजली ठीक होती है।
  46. दो ग्राम गोरखमुण्डी चूर्ण में 500 मिग्रा लौंग चूर्ण मिलाकर खाने से पार्किन्सन रोग में लाभ होता है।
  47. मुण्डी के 50 ग्राम चूर्ण में 100 ग्राम लौंग मिला लें। इसे 1 से 3 ग्राम की मात्रा में मधु मिलाकर सुबह और शाम सेवन करने से भी लाभ होता है।
  48. तीन ग्राम मुंडी और एक ग्राम कुटकी के चूर्ण को मधु के साथ रोज तीन बार सेवन करने से गठिया में लाभ होता है।
  49. मधु और घी के साथ 1-2 ग्राम मुण्डी चूर्ण का सेवन करें, और ऊपर से गुडूची का काढ़ा पिएं। इससे भी गठिया ठीक हो जाता है।
  50. गोरखमुण्डी चूर्ण के 1-2 ग्राम का सेवन गुनगुने पानी के साथ करने से जोड़ों के दर्द में लाभ होता है।
  51. मुण्डीफल के साथ बराबर मात्रा में सोंठ चूर्ण को मिला लें। इसे गुनगुने जल से दोनों समय 3 ग्राम की मात्रा में सेवन करें। इससे गठिया में फायदा होता है।
  52. गोरखमुंडी के फलों को महीन पीसकर दर्द वाले स्थान पर लेप करें। इससे जोड़ों के दर्द और सूजन में लाभ होता है।
  53. श्रावणी, क्षीरकाकोली, जीवक, ऋषभक तथा मुलेठी आदि द्रव्यों का पेस्ट बना लें। इसे गाय के दूध के साथ घी में पकाएं। इस घी को 5 ग्राम की मात्रा में सेवन करने से गठिया में लाभ होता है।
  54. मुण्डी के पत्ते के रस के साथ अड़ूसे के पत्ते का रस मिला लें। इसका एक चम्मच दिन में तीन बार सेवन करने से खून की गर्मी शांत होती है।
  55. 15-20 मिली पंचांग काढ़ा का सेवन करने से रक्त शुद्ध होता है।
  56. गोरखमुंडी के पौधों को छाया में सुखा-पीस लें। बराबर मात्रा में मिश्री मिला लें। इसका 1 चम्मच सुबह और शाम दूध के साथ सेवन करने से शारीरिक कमजोरी दूर होती है। इससे शारीरिक ताकत मिलती है।
  57. गोरखमुंडी के बीजों को पीस लें। इनमें बराबर मात्रा में चीनी मिलाकर 2-3 ग्राम मात्रा में खाने से बल और आयु में वृद्धि होती है।
  58. इसके 1-2 ग्राम चूर्ण को घी के साथ चाटने से शारीरिक शक्ति बढ़ती है।
  59. गोरखमुंडी के पौधो के छाया में सूखाकर चूर्ण बना लें। इसके 1-2 ग्राम में दोगुना शहद मिलाकर 40 दिन तक गर्म दूध के साथ सुबह-शाम सेवन करने से शारीरिक बल की वृद्धि होती है।
  60. जीवक, ऋषभक, मेदा, जीवन्ती, मुंडी तथा महाश्रावणी आदि द्रव्य लें। इसे विधिपूर्वक पका कर वृष्य घी बना लें। इसे 5 ग्राम की मात्रा में नियमित सेवन करें। इससे बल मिलता है और चेहरे पर निखार आता है।
  61. श्रावणी, महाश्रावणी, मेदा, मुंडी आदि द्रव्य लें। 5 ग्राम की मात्रा 6 माह तक दूध के साथ सेवन करें। इससे याद्दाश्त, शारीरिक ताकत बढ़ती है, और चेहरे पर निखार आता है।
  62. गोरखमुण्डी फल तथा सेंधा नमक को मिला लें। इसे 3 लीटर जल में काढ़ा बना लें। काढ़ा का 10-20 मि.ली. मात्रा में सेवन करने से जलन तथा सूजन कम होती है।
  63. इसके पत्ते एवं फूले से बने काढ़ा का सेवन करने से जलन कम होती है।
  64. 1-2 ग्राम गोरखमुण्डी चूर्ण में 500 मि.ग्रा. काली मिर्च का चूर्ण मिलाकर खाने से बुखार कम होता है।
  65. 2 ग्राम मुंडी चूर्ण में 500 मिग्रा काली मिर्च का चूर्ण मिला लें। इसे शहद या दूध के साथ लेने से बुखार के कारण होने वाली जलन ख़त्म होती है।
  66. मुण्डी के पंचांग चूर्ण को गाय के मूत्र के साथ लेप करें। इससे कुत्ते के काटने के कारण होने वाले रोगों ठीक होते हैं।

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