कमल (lotus)

     कमल वनस्पति जगत का एक पौधा है जिसमें बड़े और सुन्दर फूल खिलते हैं। यह भारत का राष्ट्रीय पुष्प है। कमल का पौधा पानी में ही उत्पन्न होता है और भारत के सभी उष्ण भागों में तथा ईरान से लेकर आस्ट्रेलिया तक पाया जाता है। कमल का फूल सफेद या गुलाबी रंग का होता है और पत्ते लगभग गोल, ढाल जैसे, होते हैं। पत्तों की लंबी डंडियों और नसों से एक तरह का रेशा निकाला जाता है जिससे मंदिरों के दीपों की बत्तियाँ बनाई जाती हैं। कहते हैं, इस रेशे से तैयार किया हुआ कपड़ा पहनने से अनेक रोग दूर हो जाते हैं। कमल के तने लंबे, सीधे और खोखले होते हैं तथा पानी के नीचे कीचड़ में चारों ओर फैलते हैं। तनों की गाँठों पर से जड़ें निकलती हैं। कमल के फूलों का विशेष उपयोग पूजा और शृंगार में होता है। इसके पत्तों को पत्तल के स्थान पर काम में लाया जाता है। बीजों का उपयोग अनेक औषधियों में होता है और उन्हें भूनकर मखाने बनाए जाते हैं। तनों से अत्यंत स्वादिष्ट शाक बनता है।इसकी तीन प्रजातियाँ होती हैं, जो ये हैंः-

  • कमल

इसके पत्ते चौड़े होते हैं जो थाली की तरह पानी में तैरते हुए दिखाई देते हैं। इसके फूल अत्यन्त सुन्दर व बड़े होते हैं। रंग-भेद के अनुसार कमल कई प्रकार होते हैं।

  • कुमुद 

कुमुदनी का रूप कमल के जैसा ही होता है; लेकिन इसके पत्ते कमल के पत्ते से छोटे, चमकीले, चिकने, जल की सतह पर तैरने वाले होते हैं। इसके फूल सफेद तथा 5-12 सेमी व्यास के होते हैं।

  • उत्पल (नीलकमल)
इसके पत्ते पानी की सतह पर तैरते हैं, तथा इसके फूल नीले रंग के होते हैं।

कमल के उपयोग

  1. उत्पल तथा दूध को मिला लें। इसे मिट्टी के बर्तन में 1 महीने तक जमीन में दबाकर रखें। इसे निकालकर बालों में लगाने से बाल स्वस्थ होते हैं। इससे बालों का पकना कम होने लगता है।
  2. नीलकमल के फूल के केशर को तिल तथा आँवले के साथ पीस लें। इसमें मुलेठी मिलाकर सिर में लेप करने से रूसी खत्म होती है।
  3. अनन्तमूल, कूठ, मुलेठी, वच, पिप्पली और नीलकमल लें। इन 6 द्रव्यों को कांजी में पीसकर, थोड़ा एरण्ड तेल मिला लें। इसका लेप करने से आधासीसी (अधकपारी) तथा सूर्य उगने के बाद होने वाले सिर के दर्द में लाभ मिलता है।
  4. कमल के भुने हुए छिलके रहित बीजों को 1-2 ग्राम की मात्रा में लें। इसमें मधु मिलाकर सेवन करने से उल्टी बंद हो जाती है।
  5. शतावरी, नीलकमल, दूब, काली तिल तथा पुनर्नवा लें। इन 5 द्रव्यों को जल में पीसकर लेप करने से सभी तरह के सिर दर्द में लाभ मिलता है।
  6. बराबर भाग में नीलकमल, बहेड़ा फल मज्जा, तिल, अश्वगंधा, अर्ध-भाग प्रियंगु के फूल तथा सुपारी त्वचा को पीस लें। इसे सिर में लेप करने से गंजेपन की समस्या में लाभ होता है।
  7. कमल के फूल से दूध निकाल लें। इसे काजल की तरह आँखों में लगाने से आंखों के रोग ठीक होते हैं।
  8. कमल की जड़ को चबाने से दांतों के कीड़े खत्म होते हैं। 
  9. 1-2 ग्राम कमल की बीज के चूर्ण में शहद मिलाकर सेवन करें। इससे पित्त दोष के कारण होने वाली खांसी ठीक हो जाती है।
  10. कमल के 1-2 ग्राम पत्तों के चूर्ण में चीनी मिला लें। इसे खाने से गुदभ्रंश (गुदा का बाहर आना) में लाभ होता है।
  11. सुबह-सुबह 2 ग्राम कमल की जड़ के पेस्ट को गाय के घी के साथ मिलाकर सेवन करें। इससे गुदभ्रंश और इसकी वजह से होने वाले बुखार में लाभ मिलता है।
  12. कमल एवं नीलकमल से बने 10-20 मिली शीतकषाय (रात भर ठंडे पानी में रखने के बाद तैयार पदार्थ) या काढ़ा में मधु एवं चीनी मिला लें। इसे पीने से पेशाब में दर्द और जलन की समस्या ठीक होती है।
  13. तेल में पकाए हुए 2-4 ग्राम कमलकन्द को गाय के मूत्र के साथ सेवन करें। इससे पेशाब में दर्द की समस्या में लाभ होता है।
  14. कमल का काढ़ा बनाकर 10-20 मिली मात्रा में सेवन करने से बुखार में लाभ होता है।
  15. बराबर भाग में उत्पल, अनार फल की छाल तथा कमल केसर चूर्ण (1-2 ग्राम) लें। इसे तण्डुलोदक (चावल के धोवन) के साथ सेवन करने से बुखार के साथ होने वाली दस्त में तुरंत लाभ होता है।
  16. पित्तज दोष के कारण दस्त हो रही हो या पेचिश की समस्या हो तो बराबर भाग में कमल का फूल, नीलकमल, मंजिष्ठा तथा मोचरस लें। इन्हें 100 मिली बकरी के दूध में पका करें सेवन करें।
  17. 100 मिली बकरी के दूध में आधा भाग जल, 1-2 ग्राम सुंधबाला, 2-4 ग्राम नीलकमल, 1 ग्राम सोंठ का चूर्ण और 5-10 मिली पृश्निपर्णी रस मिला लें। इससे दस्त पर रोक लगती है।
  18. सफेद कमल केसर के पेस्ट में खाँड़, चीनी तथा मधु मिला लें। इसको चावल के धुए हुए पानी के साथ सेवन करने से पेचिश ठीक होता है।
  19. कमल का फूल  लें। इससे केसर निकाल लें। चीनी तथा कमल के केसर को मिलाकर मक्खन के साथ सेवन करने से खूनी बवासीर में लाभ होता है।
  20. 1-2 ग्राम कमल के फूल के केशर में मिश्री मिलाकर खाने से योनि से रक्त निकलने की परेशानी और खूनी बवासीर में लाभ होता है।
  21. बराबर भाग में चीनी, कमल नाल तथा तिल के 2-4 ग्राम चूर्ण में मधु मिलाकर सेवन करने से गर्भपात की संभावना कम हो जाती है।
  22. कमल तथा कुमुद के 1-2 ग्राम पत्ते के पेस्ट में मधु एवं चीनी मिलाकर सेवन करने से गर्भपात नहीं होता है।
  23. कमल के फूल की जड़ लें। इसके साथ ही नील कमल की जड़ लें। इनसे बने 1-2 ग्राम पेस्ट में 1 ग्राम मुलेठी चूर्ण, 2 ग्राम चीनी तथा 1 ग्राम तिल मिला लें। इसका सेवन करने से गर्भपात नहीं होता है।
  24. नीलकमल कन्द के 1-2 ग्राम चूर्ण में चीनी तथा मधु मिलाकर सेवन करने से गर्भपात के कारण होने वाला दर्द ठीक होता है।
  25. दूसरे महीने होने वाले गर्भपात को रोकने के लिए कमल नाल को नागकेसर के साथ मिलाकर दूध के साथ दिन में दो बार सेवन करना चाहिए।
  26. कमल-नाल, कमलगट्टा तथा उशीर को तेल में पकाएं। इसे योनि पर लेप करने  से योनि से आने वाली बदबू और योनि के ढीलेपन की समस्या में लाभ होता है।
  27. कमल की जड़ को पानी में पीसकर लेप करने से दाद, खुजली, कुष्ठ रोग और अन्य त्वचा रोगों में फायदा होता है।
  28. कमल के पौधे के पत्ते तथा बरगद के पत्तों को जलाकर भस्म बना लें। इसे तेल में पका लें। इसे लगाने से त्वचा रोगों में लाभ होता है।
  29. 65 मिग्रा कमल पंचांग के भस्म को पानी में घोल लें। इसे छानकर जो क्षारोदक मिलता है उसमें मधु मिलाकर पीने से रक्तपित्त (नाक-कान से खून बहने की समस्या) में लाभ (kamal ke fayde) होता है।
  30. कमलनाल के 1-2 ग्राम चूर्ण में बराबर भाग में लाल चंदन चूर्ण तथा चीनी मिला लें। इसे चावल के धोवन के साथ सेवन करें।
  31. कमलनाल से बने शीतकषाय (10-20 मिली),  रस (5-10 मिली), पेस्ट (1-2 ग्राम) अथवा काढ़ा (20-30 मिली) का सेवन करने से रक्तपित्त (नाक-कान से खून बहने की समस्या) में लाभ होता है।
  32. कमलकेशर के 1-2 ग्राम चूर्ण में मिश्री मिला लें। इसका सेवन करने से खून की उल्टी, थकान, सांसों के रोग, मुंह के सूखने की परेशानी, चक्कर आने की समस्या और अधिक प्यास लगने की समस्या ठीक होती है।
  33. कमल फूल का रस या काढ़ा को 1-2 बूंद नाक में डालने से नकसीर (नाक से खून बहने की समस्या) में लाभ होता है।
  34. बराबर भाग में नीलकमल, गैरिक, शंखभस्म तथा चंदन के पेस्ट में मिश्री युक्त जल मिला लें। इसे नाक में डालने से नाक से खून बहने के रोग (नकसीर) में लाभ होता है।
  35. बराबर भाग में खस, लालकमल तथा नीलकमल को जल में भिगो लें। इसे अच्छी तरह घोल लें। इस जल में चीनी तथा मधु मिलाकर सेवन करने से रक्तपित्त (नाक से खून बहने की बीमारी) जाता है।
  36. लाल कमल (इनका केसर), उत्पल, पृश्निपर्णी तथा प्रियंगु को जल में पका लें। इसका पीने से रक्तपित्त (नाक से खून बहने की बीमारी) में लाभ होता है।
  37. 1-2 ग्राम कमल के फूल के केशर को पीस लें। इसमें मधु मिलाकर खाने से शरीर की जलन खत्म हो जाती है।
  38. सफेद कमल को पीसकर शरीर पर लेप करने से जलन से आराम मिलता है।
  39. गुदभ्रंश में कमल का प्रयोग पारंपरिक तौर पर होता आ रहा है। इसके लिए कमल की ताजी पत्तियों को शर्करा के साथ प्रयोग का वर्णन मिलता है। 
  40. 1-2 ग्राम कमल के फूल के केशर को बराबर भाग में काली मिर्च के साथ पीस लें। इसे पिएं। इसे सांप के काटे जाने वाले स्थान पर भी लगाएं। इससे सर्प के काटने से होने वाला दर्द, सूजन आदि में बहुत लाभ होता है।

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