कचनार (Mountain ebony)

     कचनार एक सुंदर फूलों वाला वृक्ष है। कचनार के छोटे अथवा मध्यम ऊँचाई के वृक्ष भारतवर्ष में सर्वत्र होते हैं।कचनार की छाल  के रेशों से रस्सी बनाई जाती है। कई स्थानों पर काचनार की पत्तियों का साग भी खाया जाता है।फूलों के रंगों में अंतर के अनुसार कचनार की विभिन्न जातियां पाई जाती हैं। इनमें से तीन प्रकार के काचनारों का विशेष उल्लेख मिलता है, जो ये हैंः-
1.लाल फूल वाला कचना (Bauhinia purpurea)
2.सफेद फूल वाला कचनार (Bauhinia racemosa)
3.पीला फूल वाला कचनार  (Bauhinia tomentosa Linn.)
लाल काचनार – इसमें कुछ जामुनी लाल रंग के फूल आते हैं। अन्य कचनारों की अपेक्षा यह सभी जगह मिल जाता है।लाल फूल वाली प्रजाति को कचनार, और सफेद फूल वाली प्रजाति को कोविदार कहा जाता है। लाल फूल के आधार पर कचनार की दो प्रजातियां पाई जाती हैं, जो ये हैंः-
Bauhinia purpurea Linn. 
Bauhinia blakeana Dunn 
सफेद काचनार – इसके फूल सफेद रंग के और सुगन्धित होते हैं। सफेद फूलों के आधार पर कांचनार की मुख्यतया तीन प्रजातियां पाई जाती हैैं, जो ये हैंः-
Bauhinia racemosa Lam.
Bauhinia acuminata Linn. 
Bauhinia variegata var.candida (Aiton) Corner 
पीला काचनार – इसके फूल पीले रंग के होते हैं।  
इनके अतिरिक्त कचनार की एक और प्रजाति पाई  जाती है जिसे Bauhinia semla Wunderlin कहते हैं। कांचनार (Bauhinia variegata Linn.) से मिलते-जुलते बहुत सारे पौधे पाए जाते हैं, लेकिन प्रायः कांचनार व कोविदार का प्रयोग चिकित्सा में किया जाता है।
गुणों में तीनों कचनार एक समान होते हैं, लेकिन औषधि के रूप में प्रायः लाल या सफेद फूल वाले कचनार का ही प्रयोग किया जाता है। इसलिए अगर कहीं लाल फूल वाला कचनार नहीं मिलता है तो दूसरे का प्रयोग किया जा सकता है।

कचनार के उपयोग

  1. लाल कचनार की छाल को पीसकर मस्तक पर लगाने से सिर दर्द से आराम मिलता है।
  2. लाल कचनार की सूखी टहनियों को जलाकर राख बना लें। इस राख या कोयला से दांतों पर मंजन करें। इससे दांत के दर्द की बीमारी ठीक होती है।
  3. कचनार वृक्ष की छाल और अनार के फूल का काढ़ा बना लें। इससे कुल्ला करने से मुंह के छाले की बीमारी में लाभ होता है।
  4. 50 ग्राम कचनार वृक्ष  की छाल को आधा लीटर पानी में उबालें। जब आधा पानी रह जाए तो इस पानी से कुल्ले करें। ऐसा कोई छाला जो दूसरी दवा से ठीक नहीं हो रहा है, वह भी इस उपाय से ठीक हो जाता है।
  5. इससे प्रसूति स्त्रियों को होने वाले छाले भी ठीक हो जाते हैं।
  6. कांचनार फूल का काढ़ा बनाकर पीने से खांसी में लाभ होता है। इस काढ़े की 20 मिली मात्रा को दिन में दो बार पीना चाहिए। 
  7. कांचनार की छाल या फूल का काढ़ा बना लें। 10-20 मिली काढ़ा को ठंडा करके शहद मिला लें। इसे दिन में दो बार सेवन करें। इससे खून साफ होता है।
  8. कांचनार फूल का काढ़ा बनाकर पीने से अत्यधिक रक्तस्राव की समस्या में लाभ होता है। आपको 20 मिली काढ़ा को दिन में दो बार पीना है।
  9. कचनार की छाल का काढ़ा बनाकर गरारा करने से मसूड़ों के दर्द ठीक हो जाते हैं।
  10. लाल कचनार की छाल के 20 मिली काढ़ा में 1 ग्राम सोंठ चूर्ण मिलाएं। इसे सुबह-शाम पिलाने से भी गले के गांठ की बीमारी में लाभ होता है।
  11. 250 ग्राम कचनार की छाल के चूर्ण में 250 ग्राम चीनी मिलाकर रख लें। सुबह और शाम 5-10 ग्राम चूर्ण को पानी या दूध के साथ सेवन करें। इससे गण्डमाला रोग में लाभ होता है।
  12. कचनार की छाल का काढ़ा बनाकर गरारा करने से कंठ के रोग ठीक होते हैं।
  13. 10-20 ग्राम कांचनार छाल को 400 मिली पानी में उबालें। जब काढ़ा एक चौथाई रह जाए तो 10-20 मिली की मात्रा में पिलाएं। इससे गंडमाला रोग में लाभ होता है।
  14. लाल कचनार का रस मिलाकर गले में लगाने से भी गले के रोग में लाभ होता है।
  15. 20 मिली कांचनार की जड़ के काढ़ा में 2 ग्राम अजवायन चूर्ण डालकर पिलाएं। इससे पेट की गैस की परेशानी में लाभ होता है।
  16. लाल कचनार की 10-20 ग्राम जड़ का काढ़ा बनाकर दिन में दो बार पिएं। इससे पाचनतंत्र संबंधी विकारों में लाभ होता है।
  17. कचनार की जड़ और पत्ते का काढ़ा बना लें। इसे 10-20 मिली मात्रा में पिएं। इससे पेट के कीड़े खत्म होते हैं। 
  18. कचनार की कलियों से बने गुलकन्द को 5-10 ग्राम की मात्रा में खाने से कब्ज का इलाज होता है।
  19. 2-5 ग्राम सूखे फूल के चूर्ण में बराबर मात्रा में चीनी मिलाकर खाने से कब्ज की समस्या में लाभ होता है।
  20. लाल कचनार के तने की छाल को पीसकर गुदा में लगाने से गुदभ्रंश में लाभ होता है।
  21. सुुबह 1-2 ग्राम कोविदार की जड़ के चूर्ण को छाछ के साथ सेवन करें। शाम को पचने वाला भोजन करें। इससे बवासीर में लाभ होता है।
  22. लाल कचनार के तने का पेस्ट बना लें। 1-2 ग्राम पेस्ट को दही के साथ सेवन करने से बवासीर रोग में फायदा होता है।
  23. कचनार की कलियों से बने गुलकन्द को 5-10 ग्राम की मात्रा में खाने से बवासीर में लाभ होता है।
  24. 2-5 ग्राम सूखे फूल के चूर्ण में बराबर मात्रा में मक्खन और मिश्री मिलाकर दिन में तीन बार सेवन करने से खूनी बवासीर में लाभ होता है।
  25. जामुन, रीठा और कचनार की छाल को पानी में उबालकर गुदा को धोने से खूनी बवासीर में फायदा होता है।
  26. कांचनार फूल का काढ़ा बनाकर पीने से खूनी बवासीर की बीमारी में लाभ होता है। काढ़ा की 20 मिली मात्रा को दिन में दो बार पीना चाहिए।
  27. 1-2 ग्राम लाल कचनार फूल की कली का चूर्ण बनाएं। इसका सेवन करने से ल्यूकोरिया रोग में लाभ होता है।
  28. कचनार की जड़ को चावलों के धुले हुए पानी के साथ पीस लें, और घाव पर पट्टी के रूप में बांधें। इससे फोड़े जल्दी पक जाते हैं।
  29. घाव पर इसकी छाल को पीसकर लगाने से लाभ होता है।
  30. कचनार के फूल या पत्ते के चूर्ण (2.5 ग्राम) का काढ़ा बनाएं, या फिर 20 मिली छाल का काढ़ा बनाएं। इसमें प्रवाल भस्म (250 मिग्रा) और चीनी मिलाएं। इसे दिन में तीन बार सेवन करने से घाव में फायदा होता है। इसके सेवन के बाद दूध पीना चाहिए।
  31. लाल कचनार का काढ़ा बनाकर घाव को धोने से घाव सुख जाता है।
  32. 2-5 ग्राम कचनार के सूखे फूल का चूर्ण बनाएं। इसे 1 चम्मच मधु के साथ मिलाकर दिन में तीन बार चाटने से रक्तपित्त में लाभ होता है।
  33. कोविदार के फूलों से बनी सब्जी (उबालने के बाद घी में भूनकर या जूस बनाकर) का सेवन करें। इससे नाक-कान आदि अंगों से खून बहना बंद हो जाता है।
  34. बराबर-बराबर मात्रा में खदिरसार, फूलप्रियंगु, कोविदार तथा सेमल के फूल का चूर्ण बनाएं। इसमें 1-2 ग्राम में मधु मिलाकर सेवन करने से रक्तपित्त में लाभ होता है।
  35. कचनार के पत्तों का पेस्ट बना लें। व्याघएरण्ड का दूध निकालकर इसमें मिलाएं, और सेवन करें। इससे पीलिया रोग में फायदा होता है।
  36. कांचनार के फूल का काढ़ा बनाकर पिएं। इससे पेशाब में खून आने की परेशानी में लाभ होता है। इस काढ़ा की 20 मिली मात्रा को दिन में दो बार पीना चाहिए।
  37. कचनार की जड़ को चावलों के धुले हुए पानी के साथ पीस लें। इसे पट्टी के रूप में रसौली, और पेट पर बांधें। इससे रसौली जल्दी पक जाता है। इससे पेट फूलने की समस्या भी ठीक होती है। इसकी छाल को पीसकर लगाने से भी लाभ होता है।
  38. कचनार के फूल या पत्ते के चूर्ण का 2.5 ग्राम काढ़ा बना लें, या 20 मिली छाल के काढ़ा में प्रवाल भस्म (250 मिग्रा) मिला लें। इसमें चीनी मिलाकर दिन में तीन बार सेवन करने से भी रसौली, पेट फूलने की समस्या में फायदा होता है। इसके सेवन के बाद दूध पिलाना चाहिए।
  39. पीले कचनार के पत्ते, छाल तथा बीजों को सिरके में पीसकर लेप करने से रसौली में लाभ होता है।
  40. सफेद कचनार की छाल के चूर्ण (1-2 ग्राम) को चावल के धोवन के साथ पीने से गण्डमाला या कंठ के रोग में लाभ होता है। 
  41. 2-5 ग्राम कचनार के सूखे फल का चूर्ण बना लें। इसे पानी के साथ दिन में 3-4 बार सेवन करने से मूत्र रोग जैसे पेशाब का रुक-रुक कर आना, या पेशाब में दर्द होने की बीमारी ठीक होती है।
  42. 1-2 ग्राम कचनार के फूल का चूर्ण का सेवन करने से खूनी बवासीर में लाभ होता है।
  43. काचनार की जड़ की छाल को पीस लें। इसे लगाने से घाव, सूजन एवं अन्य प्रकार के त्वचा से संबंधित रोगों में लाभ होता है।
  44. काचनार के पत्ते का काढ़ा बनाएं। इसे 10-20 मिली मात्रा में पीने से बुखार के कारण होने वाले सिर दर्द से आराम मिलता है।
  45. पीले कचनार की जड़ और पत्ते का काढ़ा बनाकर 10-20 मिली मात्रा में पिएं। इससे दस्त पर रोक लगती है। 
  46. पीले कंचनार की 10-20 ग्राम जड़ की छाल का काढ़ा बना लें। 10-20 मिली काढ़ा को सुबह-शाम पिलाने से लिवर की सूजन में लाभ होता है।
  47. कचनार की जड़ और पत्ते का काढ़ा बनाकर 10-20 मिली मात्रा में पिएं। इससे लिवर के दर्द से राहत मिलती है।
  48. पीले कचनार के पत्ते और फूलों को सुखा लें। इसका चूर्ण बनाकर रख लें। 5 ग्राम चूर्ण का सेवन करने के बाद 2 चम्मच सौंफ का अर्क पिएं। इससे पेचिश में लाभ होता है।
  49. कचनार के 10 ग्राम फूलों को जल में उबालकर छान लें। इसे दिन में दो बार पिलाने से भी पेचिश में लाभ होता है।
  50. 2-5 ग्राम कचनार के सूखे फल के चूर्ण को पानी के साथ पीने से भी पेचिश में लाभ मिलता है। इसे दिन में 3-4 बार सेवन करें।
  51. 20 ग्राम पीले कचनार की छाल को 400 मिली पानी में पकाएं। जब काढ़ा एक चौथाई बच जाए तो इसे 10-25 मिली पिलाने से आंतों के कीड़े मर जाते हैं।
  52. पीले कचनार के पत्ते, छाल और बीजों को सिरके में पीस लें। इसका लेप करने से घाव के अन्दर के कीड़े मर जाते हैं।
  53. 5 मिली कांचनार की छाल का रस निकाल लें। इसमें 2 ग्राम जीरे का चूर्ण, या 250-500 मिलीग्राम कपूर मिला लें। इसे दिन में दो बार पिलाने से शरीर की जलन शांत हो जाती है।
  54. सफेद कचनार या पीले कांचनार की छाल का काढ़ा बना लें। इससे कुल्ला करने से मुंह के छाले की बीमारी ठीक होती है। 
  55. पीले कचनार के बीजों को पीसकर सांप के काटने वाले स्थान पर लेप करें। इससे सांप के काटने से होने वाले दर्द, जलन और सूजन में लाभ होता है।

Comments

Popular posts from this blog

वेत्र (Common rattan)

खैर या खादिर (Black Catechu)

नींबू (Lemon)