कूजा (Musk Rose)

     कूजा को कुब्जक भी कहते हैं। यह एक फूल है। कुब्जक के फूल गुलाब से थोड़े बड़े होते हैं। इसलिए कूजा को जंगली गुलाब भी कहा जाता है। कूजा एक जड़ी-बूटी भी है, और रतौंधी, दिन के समय आंखों से नहीं दीखने की समस्या, खांसी, सांसों से जुड़ी बीमारी में कूजा (जंगली गुलाब) के इस्तेमाल से फायदे मिलते हैं। कब्ज, ह्रदय रोग आदि में भी कूजा (जंगली गुलाब) के औषधीय गुण से लाभ मिलता है। कूजा का आकार गुलाब के जैसा होता है, लेकिन यह गुलाब से बड़ा होता है। इस पर बहुत घने काँटे होते हैं। इसमें पाँच पखुड़ीयुक्त सफेद फूल होते हैं। यह शीत, दस्त में खून आने पर, रक्तस्राव, रक्त विकार, कुष्ठ रोग, और बिच्छू के काटने पर फायदा देता है। कूजा के फूल से घाव, जलन के साथ-साथ वात-पित्त दोष ठीक होता है।

कूजा (कुब्जक) के उपयोग

  1. कुब्जक, अशोक, शाल, आम्र, प्रियंगु, नलिन तथा नीलोत्पल लें। इन सभी के फूल, रेणुका, पिप्पली, हरड़, आँवला को समान मात्रा में मिला लें। इनका चूर्ण बनाकर शहद और घी मिला लें। इसे बाँस की नलिका में सुरक्षित तरह से रख दें। इसे रोज काजल की तरह आंखों में लगाने से रतौंधी और दिन में ना देख पाने से संबंधित बीमारी में लाभ प्राप्त होता है।
  2. कूजा की जड़ को पीसकर आंखों के बाहर चारों तरफ लगाने से आंखों के रोगों में लाभ होता है।
  3. जंगली गुलाब के फूल का चूर्ण बना लें। इसमें मुलेठी चूर्ण और तुलसी के पत्ते मिलाकर काढ़ा बना लें। इसका सेवन करने से खांसी में लाभ होता है।
  4. कूजा के पंचांग का काढ़ा बना लें। इसे 10-20 मिली मात्रा में सेवन करें। इससे पित्त दोष के कारण होने वाले पेट की बीमारियां ठीक होती है।
  5. कब्ज एक आम बीमारी है, और अनेक लोग कब्ज से परेशान रहते हैं। कब्ज के उपचार के लिए जंगली गुलाब के फूल के चूर्ण को त्रिफला में मिलाकर सेवन करें। इससे कब्ज की समस्या ठीक होती है।
  6. जंगली गुलाब के फूल के चूर्ण में सौंफ तथा मुलेठी मिलाकर काढ़ा बना लें। इसे पीने से पेट संबंधी समस्या ठीक होती है, और विबंध आदि विकारों (इसका प्रयोग कोमल प्रकृति के व्यक्तियों तथा बालकों में ही करना चाहिए) में लाभ होता है। 
  7. जंगली गुलाब के फूलों का गुलकन्द बना लें। यह पौष्टिक होता है। इसका सेवन करें। इससे ह्रदय स्वस्थ बनाता है। 
  8. त्वचा संबंधी रोग जैसे- चेहरे पर झाई, चेहरे पर दाग-धब्बे, त्वचा पर काले दाग होने पर जंगली गुलाब का अर्क त्वचा पर लगाने से इन परेशानियों में लाभ मिलता है।
  9. जंगली गुलाब के फूलों का गुलकन्द बना लें। इसका सेवन करने से रक्त-विकार, रक्तपित्त में लाभ होता है।
  10. जंगली गुलाब के फूल के चूर्ण में मुलेठी चूर्ण और तुलसी के पत्ते मिला लें। इसका काढ़ा बना लें। इसका सेवन करने से कफज-विकारों में लाभ होता है।
  11. जंगली गुलाब के फूल के चूर्ण में मुलेठी चूर्ण और तुलसी के पत्ते मिला लें। इसका काढ़ा बनाकर सेवन करने से सांसों से संबंधित बीमारियों में लाभ होता है। 
  12. टाइफाइड या अन्य तरह के बुखार के इलाज के लिए कुब्जकासव को 15-30 मिली की मात्रा में पिएं। 

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