सर्पगन्धा (Serpentine root)

     भारत तथा चीन के पारंपरिक औषधियों में सर्पगन्धा एक प्रमुख औषधि है। भारत में तो इसके प्रयोग का इतिहास ३००० वर्ष पुराना है। सर्पगन्धा के पौधे की ऊँचाई ६ इंच से २ फुट तक होती है। इसकी प्रधान जड़ प्रायः २० से. मी. तक लम्बी होती है। जड़ में कोई शाखा नहीं होती है। इसका तना मोटी छाल से ढका रहता है। इसके फूल गुलाबी या सफेद रंग के होते हैं। ये गुच्छों में पाए जाते हैं। भारतवर्ष में समतल एवं पर्वतीय प्रदेशों में इसकी खेती होती है। पश्चिम बंगाल एवं बांग्लादेश में सभी जगह स्वाभाविक रूप से सर्पगन्धा के पौधे उगते हैं।  सर्पगंधा की जड़ी साँप के विष को उतारने की एक अच्छी दवा है। सर्पगंधा के बारे में अनेक रोचक कथाएं प्रचलित हैं। उदाहरण के लिए कहा जाता है कि कोबरा से लड़ने से पहले नेवला सर्पगंधा की पत्तियों का रस चूस कर जाता है। पहले इसे पागलों की दवा भी कहा जाता था क्योंकि सर्पगंधा के प्रयोग से पागलपन भी ठीक होता है। दो-तीन साल पुराने पौधे की जड़ को उखाड़ कर सूखे स्थान पर रखते है, इससे जो दवाएँ निर्मित होती हैं, उनका उपयोग उच्च रक्तचाप, गर्भाशय की दीवार में संकुचन के उपचार में करते हैं। इसकी पत्ती के रस को निचोड़ कर आँख में दवा के रूप में प्रयोग किया जाता है। इसका उपयोग मस्तिष्क के लिए औषधि बनाने के काम आता है। अनिद्रा, हिस्टीरिया और मानसिक तनाव को दूर करने में सर्पगन्धा की जड़ का रस, काफी उपयोगी है। इसकी जड़ का चूर्ण पेट के लिए काफी लाभदायक है। इससे पेट के अन्दर की कृमि खत्म हो जाती है।

सर्पगंधा के उपयोग

  1. 250-500 मि.ग्राम सर्पगंधा चूर्ण को शहद के साथ सेवन कराने से कुक्कुर खाँसी या काली खांसी में लाभ होता है।
  2. दम फूलने या सांस उखड़ने की परेशानी में एक ग्राम सर्पगंधा चूर्ण में शहद मिलाकर सेवन करें। अवश्य लाभ होगा।
  3. पतले दस्त और उल्टी यानी हैजा होने पर 3-5 ग्राम सर्पगंधा की जड़ के चूर्ण को गुनगुने जल के साथ सेवन करें। इससे हैजा यानि विसूचिका में निश्चित लाभ होता है।
  4. 10-30 मिली कुटज की जड़ के काढ़े में 500 मि.ग्राम सर्पगंधा चूर्ण मिला लें। इसे पिलाने से खूनी पेचिश यानी पतले दस्त के साथ खून जाने की बीमारी में लाभ होता है।
  5. सर्पगंधा की जड़ का काढ़ा बनाकर 10-30 मिली मात्रा में पीएं। इससे अपच, कब्ज और गैस से होने वाले पेट के दर्द समाप्त होगा।
  6. यदि प्रसव के दौरान दर्द हो रहा हो और प्रसव नहीं हो रहा तो सर्पगंधा की जड़ के काढ़े का सेवन कराना चाहिए। इससे गर्भाशय में संकोचन होना प्रारंभ हो जाता है जिससे प्रसव होने में आसानी हो जाती है।
  7. 2-3 ग्राम सर्पगंधा की जड़ के चूर्ण में बराबार भाग शक्कर मिला लें। इसे शहद के साथ सेवन कराने से भी सामान्य प्रसव में सहायता मिलती है।
  8. सर्पगंधा के सूखे फल के चूर्ण को काली मिर्च तथा अदरक के साथ पीस लें। इसे खाने से मासिक धर्म नियमित होने लगता है। इससे मासिक धर्म के दौरान दर्द होना, कम या अधिक स्राव होना आदि आर्तव विकार भी ठीक होता है।
  9. गर्भावस्था के शुरुआती 3-4 महीनों में भ्रूण का मांस पूरी तरह नहीं बना होता है। इस अवस्था में यदि किसी कारण से गर्भपात हो जाए केवल खून ही गिरता है। इसे ही गर्भस्राव कहते हैं। गर्भस्राव होने के बाद यदि दर्द तथा खून का निकलना बंद न हो तो 2-4 ग्राम सर्पगंधा की जड़ के चूर्ण में शहद मिलाकर सेवन करें। अवश्य लाभ होगा।
  10. 1-2 ग्राम सर्पगंधा की जड़ के चूर्ण का सेवन करने से उन्माद या मैनिया तथा मिर्गी में लाभ होता है। 
  11. 2-4 ग्राम सर्पगंधा की जड़ के चूर्ण को गुलाब जल के साथ सेवन कराने से उन्माद में लाभ होता है।
  12. रक्तभार और रक्तदाब दो लगभग समान लेकिन खून से जुड़ी दो थोड़ी भिन्न समस्याएं हैं। रक्तभार के बढ़ जाने से मस्तिष्क को सही मात्रा में ऑक्सीजन मिलना बंद हो जाता है, जिससे ब्रेन हैमरेज तक होने का खतरा होता है। उच्च रक्तचाप से हृदय में समस्या होती है। सर्पगंधा दोनों को ही ठीक करने में लाभकारी है। सर्पगंधा हमारे हृदय की गति को नियमित करता है। सर्पगंधा से बनी वटी का सेवन करने से उच्च रक्तभार ठीक होता है। 1-2 सर्पगंधा घन वटीका सेवन करने से उच्चरक्तचाप यानी हाई ब्लड प्रेशर ठीक होता है। 
  13. अच्छी नींद के लिए 1-3 ग्राम सर्पगंधा की जड़ के चूर्ण को पानी के साथ सेवन करें। 
  14. दो ग्राम सर्पगंधा की जड़ के चूर्ण में दो ग्राम खुरासानी अजवायन का चूर्ण और बराबर मात्रा में शक्कर मिला लें। इसे रात को सोने से पहले सामान्य जल के साथ सेवन करने से भी नींद अच्छी आती है।
  15. साँप के काटने पर सर्पगंधा की जड़ को पानी में घिस कर 10-20 ग्राम पिलाने से लाभ होता है। साँप के काटे हुए स्थान पर इसकी जड़ के चूर्ण को लगाना भी चाहिए।
  16. सर्पगंधा की ताजी पत्तियों को कुचल कर पाँव के तलुओं में लगाने से भी साँप के काटने में आराम मिलता है।
  17. सर्पगन्धा, चोरक, सप्तला, पुनर्नवा आदि द्रव्यों का एकल या मिश्रित प्रयोग करने से विभिन्न प्रकार के विष के दुष्प्रभाव दूर होते हैं।

  • सर्पगंधा का अत्यधिक मात्रा में सेवन करने से घबराहट, हृदय में भारीपन, ब्लड प्रेशर का कम होना आदि समस्याएं पैदा होती हैं।
  • कई बार इससे पेट में जलन या हाइपर एसिडिटी की समस्या भी पैदा होती है।
  • स्तनपान कराने वाली माताओं और गर्भवती स्त्रियों को भी इसका सेवन नहीं करना चाहिए।
  • बच्चों को इसका सेवन कराने से भी बचना चाहिए।
  • शराबी को भी इसका सेवन नहीं कराना चाहिए।



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