मालकांगनी (Staff tree)

     मालकांगनी एक औषधीय पादप है। ज्योतिष्मती (मालकांगनी) कड़वी, तीखी, कसैली और गर्म होती है। ज्योतिष्मती का तना छूने पर खुरदरी लगती है। इसके फल लगभग गोलाकार और चिकने होते हैं। कच्चे रहने पर ये हरे होते हैं, लेकिन पक जाने पर पीले हो जाते हैं। इसके फलों के अन्दर 1 से 6 तक की संख्या में बीज होते हैं। ये बीज नुकीले अथवा अण्डाकार, गहरे लाल रंग की खोल से घिरे हुए होते हैं। पीले फलवाली यह विशाल आरोही झाड़ी भारत के समस्त पहाड़ी स्थानों में पाई जाती है। इसके बीज भूरे होते हैं तथा सिन्दूरी बीज चोल से ढंके होते हैं। इसकी पत्तियां आर्तवजनक होती हैं। पत्तियों का रस अफीम विषाक्तता में प्रतिकारक के रूप में प्रयुक्त होता है। इसका छाल गर्भस्रावक है। इसके बीज तिक्त, रेचक, वामक तथा बल्य होते हैं। ये आमवात, गठिया, विभिन्न ज्वरों में उत्तेजक तथा स्वेदजनक के रूप में प्रयुक्त होते हैं। यह अधकपारी, पक्षघात एवं मनोवसाद में भी उपयोगी है। ज्योतिष्मती का तेल वात–कफ का इलाज करता है। यह पेट के कीड़ों को खत्म करता है।डायबिटीज में भी मालकांगनी के फायदे मिलते हैं। बहुत सालों से मिर्गी और कुष्ठ रोग के इलाज के लिए ज्योतिष्मती का इस्तेमाल किया जाता है।

मालकांगनी के  उपयोग

  1. ज्योतिष्मती (मालकांगनी) के पत्ते एवं जड़ को पीसकर मस्तक पर लगाएं। इससे सिर दर्द से राहत मिलती है।
  2. ज्योतिष्मती (मालकांगनी) के तेल की पैर के तलवों पर मालिश करें। इससे आंख के रोगों का नाश होता है, और आंखों की रोशनी बढ़ती है।
  3. ज्योतिष्मती की जड़ को पीसकर छाती पर लेप करने से फेफड़े की सूजन कम होती है।
  4. ज्योतिष्मती (मालकांगनी) तेल 1-5 बूंद, सज्जीखार 60 मिग्रा तथा हींग 60 मिग्रा लें। इन्हें दूध के साथ 15 दिन या 1 माह तक सेवन करें। इससे पेट के रोग खत्म होते हैं। 
  5.  रसांजन, हल्दी, दन्ती, ज्योतिष्मती, नीम्बू के पत्ते और मंजीठ को गौमूत्र में पीस लें। इसका लेप करने से भगन्दर में लाभ होता है।
  6. बवासीर के मरीज ज्योतिष्मती की जड़ को चावल की धुले हुए पानी में पीस लें। इसमें काली मिर्च का चूर्ण मिला लें। इससे लेप करने से बवासीर में लाभ होता है। 
  7. खूनी बवासीर की बीमारी में ज्योतिष्मती के बीज को पीसकर बवासीर के मस्सों पर लगाएं। इससे फायदा होता है।
  8. ज्योतिष्मती के 2-5 बूंद तेल को लस्सी में डालकर पीने से मूत्र विकार (पेशाब से संबंधित बीमारी) ख़त्म होते हैं।
  9. गुड़हल के फूल को कांजी के साथ पीस लें। इसमें घी में भुने हुए ज्योतिष्मती के पत्तों को मिला लें। इसका सेवन करने से बहुत दिनों से रुका हुआ मासिक चक्र तुरंत शुरू हो जाता है।
  10. ज्योतिष्मती के 1-2 बीज के चूर्ण को खीर में डालकर खाने से नपुंसकता की समस्या खत्म होती है।
  11. ज्योतिष्मती के तेल की 5-10 बूंद पान में लगाकर दिन में दो बार खाएं। इससे नपुसंकता में लाभ होता है। इस अवधि में दूध और घी का अत्यधिक सेवन करना चाहिए।
  12. ज्योतिष्मती के बीज के 500 मिग्रा चूर्ण को मधु के साथ खाएं। इससे गठिया तथा बादी के रोग खत्म होते हैं।
  13. ज्योतिष्मती का तेल जोड़ों पर लगाने से छोटे जोड़ों की सूजन ठीक हो जाती है।
  14. किसी भी तरह के दर्द में ज्योतिष्मती के बीज तथा पत्तों को पीसकर दर्द वाले स्थान पर लगाएं। दर्द ठीक हो जाता है।
  15. ज्योतिष्मती आदि शोधन द्रव्यों का काढ़ा बनाकर घाव को धोएं। इससे घाव में सुधार होता है। ज्योतिष्मती को घाव पर लगाने से घाव जल्दी भरता है।
  16. ज्योतिष्मती के बीज का तेल लगाने से त्वचा रोग में लाभ होता है। इसके बीज के चूर्ण को गोमूत्र के साथ पीस लें। इसे लगाने से एक्जिमा में लाभ होता है।
  17. सात बार छाने हुए क्षार जल और ज्योतिष्मती के तेल को पका लें। इस तेल की मालिश करने से कुष्ठ रोग में लाभ होता है।
  18. ज्योतिष्मती के तेल से पिण्डार की जड़ को पीस लें। इसे नाक में 1-2 बूंद डालने से बुखार के कारण होने वाली कमजोरी दूर होती है।
  19. खुजली में मालकांगनी के तेल का प्रयोग करते है क्योंकि खुजली के रुक्षता ज्यादा होती है जो तेल की स्निग्धता से कम हो कर खुजली में आराम होता है। 
  20. बेरी बेरी नामक रोग में ज्योतिष्मती के तेल का इस्तेमाल बहुत लाभदायक होता है। मालकांगनी में वात शामक गुण इस रोग में फायदेमंद होता है।  
  21. ज्योतिष्मती का तेल लकवा वाले अंग पर लगाएं। इससे पक्षाघात (लकवा) में लाभ होता है। 

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